संजय कुमार सिंह
आज टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड सबसे अलग और खास है। सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने सरकार के इशारे पर जज का तबादला करने के लिए कॉलेजियम की आलोचना की है और यह अखबार में लीड है। वैसे तो यह खबर कल सोशल मीडिया पर थी और कुछ भी गुप्त नहीं है फिर भी खबर नहीं है। जो खबरें हैं वे नैरेटिव सेट करने वाले। हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर, इंडियन एक्सप्रेस में सिंगल कॉलम और दि एशियन एज में दो कॉलम में एक खबर है। इसका शीर्षक है, यह आधिकारिक है : बांग्लादेश टी20 विश्व कप से बाहर, स्कॉट लैंड भीतर। दि एशियन एज में शीर्षक है, भारत में खेलने से मना करने पर बांग्लादेश टी20 से बाहर। आप जानते हैं कि बांग्लादेश ने भारत में खेलने से मना कर दिया था और टी20 वर्ल्ड कप से बाहर किए जाने की शर्त के बावजूद उसने भारत में खेलना मंजूर नहीं किया। सही हो या गलत, भारतीय अखबारों में यह शीर्षक बता रहा है कि बांग्लादेश को भारत में नहीं खेलने की ‘सजा’ मिली। सच्चाई यह है कि नहीं खेलने का कारण नहीं बताया गया है और यह भी नहीं बताया गया है कि भारत में नहीं खेलने की यह कीमत बांग्लादेश ने क्यों चुकाई है। उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी से कहा कि बांग्लादेश के सारे मैच भारत के बाहर सह-मेज़बान श्रीलंका या दूसरे स्थान पर रखें, लेकिन आईसीसी ने इसे नहीं माना। आखिरकार बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया है। इससे पहले, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान भारत ने पाकिस्तान में खेलने से मना किया था तो भारत के मैच न्यूट्रल वेन्यू पर कराए गए थे।
आज दूसरी बड़ी खबर वोट चोरी पर राहुल गांधी का आरोप है, चुन-चुन कर हो रही है वोट चोरी (देशबन्धु) और द हिन्दू की लीड, बंगाल के 3.5 लाख वोटर अभी तक एसआईआर सुनवाई के लिए नहीं पहुंचे। खबर के अनुसार, अधिकारियों ने कहा है कि 32 लाख अन मैप्ड वोटर्स में से करीब 10 प्रतिशत सुनवाई के लिए पेश नहीं हुए। बड़ी संख्या इनके फर्जी प्रविष्टि की शंका पैदा करती है। दूसरी ओर, ऐसे लोगों के लिए सूचना है कि वे वैध कारण बताते हुए नए सिरे से सुनवाई के लिए बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं। द टेलीग्राफ की लीड भी एसआईआर से संबंधित है। इस खबर के मुताबिक, अमर्त्य सेन ने कहा है कि बंगाल में चल रहा एसआईआर अभियान लोकतंत्र के लिए अनुचित है। पीटीआई की यह खबर बताती है कि एसआईआर के दौरान की जा रही जल्दबाजी नोबल विजेता, भारत रत्न अमर्त्य सेन की राय में चिन्ता जनक है। 92 साल के अमर्त्य सेन ने कहा है कि चुनाव अधिकारियों ने उन्हें नोटिस भेजा क्योंकि उनके पास पर्याप्त समय नहीं था कि अपने ही रिकार्ड से उनकी मां का ब्यौरा जांच लेते। अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेता 92 वर्षीय श्री सेन ने बोस्टन से कहा कि मतदाता सूचियों की जल्दबाजी में की गई गहन समीक्षा लोकतांत्रिक भागीदारी को खतरे में डाल सकती है। खासकर बंगाल विधानसभा चुनाव के कुछ ही महीनों में होने वाले चुनावों को देखते हुए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसा अभ्यास सावधानीपूर्वक और पर्याप्त समय के साथ किया जाना चाहिए, जो उन्हें लगता है कि बंगाल के मामले में नहीं है। सेन ने कहा, “पर्याप्त समय के साथ मतदाता सूचियों की गहन समीक्षा एक अच्छी लोकतांत्रिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इस समय ऐसा नहीं हो रहा है।”
कहने की जरूरत नहीं है कि एसआईआर अपनी रफ्तार से अपनी शैली में चलता जा रहा है। मतदाता सूची से जो हटाए गए उनके नाम सार्वजनिक नहीं हैं और तार्किक विसंगति के आधार पर जिन लोगों को कंप्यूटर से तैयार नोटिस भेजे गए हैं उनके सुनवाई में नहीं आने का मतलब यह लगाया जा रहा है कि वे घुसपैठिये हो सकते हैं जबकि तमाम दूसरे कारणों से लोगों का शामिल होना मुश्किल है। इसमें परेशानी उठाकर मतदाता बनने की इच्छा या अनिच्छा दोनों शामिल है। वैसे भी, मतदाता बनने के कोई लाभ नहीं हैं और वोट चोरी में वोट कहां जा रहे हैं पता नहीं। इसके बावजूद एसआईआर की तमाम गड़बड़ियों पर कोई रोक नहीं है तो अनिच्छा होना स्वाभाविक है और नहीं जाने वालों को घुसपैठिया या फर्जी प्रविष्टि मान लेना दिलचस्प है। खासकर तब जब एक से ज्यादा बार नाम होने का बचाव किया जाता रहा है। वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह ने लिखा है, पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने बड़ी तादाद में दूसरे राज्यों के वोटर पकड़े हैं..हंगामा हो रहा है। इनमें नासिक ज़िला परिषद चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार रही उज्ज्वला अप्पा बुरुंगले शामिल हैं। इनका नाम बंगाल की वोटर लिस्ट में हैं। उज्ज्वला ने स्वीकार किया है कि वे महाराष्ट्र में बीजेपी उम्मीदवार थीं। इससे पहले बिहार, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान वग़ैरह के लोगो को बंगाल में वोटर बनाए जाने का इल्ज़ाम है। टीएमसी ने इस तरह के तमाम वोटर्स को ढूंढ निकाला है और “फॉर्म 7” जमा किए हैं ताकि इन का नाम काटे जा सकें। टीएमसी का कहना है कि उन लोगों ने घर-घर जा कर शिनाख़्त किए हैं। ये दूसरे राज्यों के वोटर हैं जो बंगाल में नहीं रहते हैं। सवाल है कि इनके नाम कैसे आ गए? सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद चुनाव आयोग ने अब तक 1.5 करोड़ वोटर की लिस्ट नहीं दी है जिन्हें नोटिस भेजा गया है। सुप्रीम कोर्ट का दिया 72 घंटे का वक़्त ख़त्म हो चुका है…मगर लिस्ट अब तक नहीं आई है?
एक तरफ तमाम विरोध, खामियों और अस्पष्टता के बावजूद एसआईआर लगभग जबरदस्ती चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट रोक नहीं रहा है और चुनाव आयोग लगभग यही कह रहा है कि सुप्रीम कोर्ट रोक ही नहीं सकता है। इसके बावजूद लंबें समय से सुनवाई चल रही है। बातें हो रही हैं लेकिन आदिश कुछ खास नहीं होता है। अब तो जजों का तबादला चिन्ता वाला कारण है। गनीमत है कि सर्वोच्च अदालत के एक न्यायाधीश ने इसकी बात की और द टाइम्स ऑफ इंडिया में न्यायमूर्ति भुइयां का कहा हाईलाइट किया गया है। उन्होंने कहा है, “जब स्वयं कॉलेजियम यह दर्ज करता है कि तबादला केंद्र सरकार के अनुरोध पर किया गया था… तो यह स्पष्ट रूप से इस बात की स्वीकारोक्ति दर्शाता है…कि राजनीतिक कार्यपालिका कॉलेजियम के निर्णय को प्रभावित कर रही है। न्यायपालिका, विशेषकर कॉलेजियम के सदस्यों के लिए, स्वतंत्र रूप से काम करना जारी रखना और भी महत्वपूर्ण हो गया है… और कॉलेजियम प्रणाली की अखंडता को हर कीमत पर बनाए रखना आवश्यक है… अगर हम अपनी विश्वसनीयता खो देते हैं तो न्यायपालिका का कुछ भी नहीं बचेगा… उसका दिल और आत्मा नष्ट हो जाएगी। किसी न्यायाधीश का राजनीतिक और वैचारिक झुकाव होना स्वाभाविक है… [लेकिन] न्यायपालिका और हमारे लोकतंत्र के लिए यह एक दुखद दिन होगा यदि किसी मामले का निर्णय किसी विशेष न्यायाधीश या पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होते ही पहले से तय हो जाए।”
इन सब खबरों को छोड़कर, अमर उजाला में भाजपा का प्रचार सबसे लंबी खबर है। दो कॉलम की फोटो के साथ आठ कॉलम में छपी इस खबर का शीर्षक है, यूपी भारत की धड़कन और आत्मा, यह देश का विकास इंजन भी बनेगा:शाह । अमर उजाला में मौसम और बर्फबारी की खबर लीड है लेकिन नवोदय टाइम्स की लीड मिडिल ईस्ट के लिए उड़ानें रोकी खबर हैं। इसके अनुसार, ईरान पर अमरीकी कार्रवाई की आशंका है। वोट चोरी के राहुल गांधी के आरोप इन अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं हैं। आज एक खबर और है जो कई अखबारों में है, भारत से अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ हटा सकता है अमेरिका। कहीं इसकी शर्त है कहीं इसे आधार बताया गया है और यह शर्त या आधार है रूस से तेल का आयात। कोई कह रहा, कम करके टैरिफ में छूट पाई जा सकती है कोई कह रहा है , कम करने से अमेरिका को सफलता मिली है। आज की एक और बड़ी खबर द हिन्दू में छोटी सी छपी है। मध्य प्रदेश के महू में बोरवेल का संक्रमित पानी पाने से 24 लोग बीमार हो गए हैं। इंदौर में कई लोगों की मौत के बाद देश के भिन्न शहरों में खराब पानी से लोगों के बीमार होने की खबर आई है। सरकार क्या कर रही है, पता नहीं है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


