
अडानी ग्रुप निवेशकों की हेराफेरी को लेकर फिर से चर्चा में है. सेबी ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि अडानी की कंपनियों में निवेश करने वाले 12 विदेशी फंड ने उसके डिस्क्लोजर नियमों का उल्लंघन किया और निवेश की सीमा से ज्यादा का निवेश किया था. इस हेराफेरी पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी को घेरते हुए सवाल उठाया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस वर्ष की शुरुआत में अडानी ग्रुप में निवेश करने वाले एक दर्जन ऑफशोर निवेशकों को नियमों के उल्लंघन के आरोप में नोटिस भेजा गया था. साथ ही सभी से डिस्क्लोजर नियम और निवेश सीमा के उल्लंघन पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा था.
नोटिस में डिस्क्लोजर वॉयलेशन और निवेश सीमाओं के उल्लंघन पर जवाब मांगा गया था. इस अनुसार सेबी अडानी समूह के प्राथमिक शेयरधारकों के साथ संभावित निष्कर्ष को निर्धारित करेगी. जिसके लिए अडानी समूह और इनमें से एक फंड के बीच संभावित लिंक की जाच की जाएगी.
उधर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को मीडिया से हुई बातचीत में कहा कि, “यदि इस बार देश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो पार्टी बिजनेसमैन गोतम अडानी के खिलाफ आरोपों की जांच कराएगी. इसके लिए एक संसदीय समिति को मामले की जांच सौंपी जाएगी.” कांग्रेस महासचिव ने कहा कि, “साल 2024 के चुनाव में केंद्र की सत्ता में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद जेपीसी का गठन करेंगे. जिससे साफ होगा की यह लूट आखिर कितनी बड़ी है.”
जयराम रमेश ने एक्स पर किए अपने एक ट्वीट में लिखा कि, “SEBI ने अब इस बात की पुष्टि की है कि अडानी समूह की कंपनियों में निवेश किए गए एक दर्जन ऑफशोर फंडों ने डिस्क्लोजर नियमों और निवेश सीमा का उल्लंघन किया है. यह हिमशैल के सिरे की तरह है- जो अब दिख रहा हैं, वो पूरे स्कैम का सिर्फ़ एक छोटा हिस्सा है. जब हम जून 2024 में सत्ता में आने के बाद जेपीसी का गठन करेंगे, तब यह साफ़ होगा की यह लूट आखिर कितनी बड़ी है.”
प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाते हुए जयराम ने लिखा, “हम अडानी मेगास्कैम में भारतीय प्रतिभूति कानूनों के इन घोर उल्लंघनों पर सेबी की लंबे समय से विलंबित रिपोर्ट के तत्काल प्रकाशन की प्रतीक्षा कर रहे हैं. ट्वीट में रमेश ने मोदी सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग करने का भी जिक्र किया है. उन्होंने लिखा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में कंपनियों को संपत्ति बेचने के लिए मजबूर करने औप पीएम के करीबी दोस्तों को संपत्ति इकट्ठा करने में मदद करने के लिए ईडी, सीबीआई और आयकर जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग किया गया.”


