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सुख-दुख

अरुण नौटियाल सर की सूचना ने आंखों के सामने बड़ा शून्य खड़ा कर दिया है!

जितेंद्र अवस्थी-

ज सिर्फ दुःख ही नहीं हो रहा, एक ऐसा असीम कष्ट मानो शरीर ही शरीर को अंदर से नोच रहा हो, हजारों चींटियां एक साथ मिलकर शरीर को काट रही हों. ज़िंदगी कई बार अचानक ये एहसास कराती है कि इंसान सिर्फ एक कठपुतली की तरह है, जिसकी सीमाएं एक दायरे तक सीमित हैं. मैं कुछ भी नहीं कर सकता. चंद दिनों पहले ही उन्होंने अपने नेतृत्व में मुझे पत्रकारिता की ही नहीं ज़िंदगी की भी सीख दी.

अरुण नौटियाल सर के न रहने की सूचना ने मुझे सिर्फ स्तब्ध ही नहीं किया बल्कि लगातार मेहनतकश चल रही जिंदगी को झकझोर सा दिया है. एक बड़ा शून्य सा आंखों के सामने खड़ा हो गया. एक के बाद एक ऐसी सूचनाएं यह बार-बार एहसास दिलाती हैं कि हम बहुत बुरे दौर, तकलीफदेह और तनाव भरे समय से गुजर रहे हैं.

जो लोग करीब से उन्हें जानते हैं वे जानते होंगे अरुण सर बहुत शिष्ट और विनम्र इंसान थे वे बहुत मेहनती, जिम्मेदार और बेहद ही काबिल पत्रकार थे, चंद शब्दों की सीमा में उनके व्यक्तित्व को बांध पाना आसान नहीं वो सामने कोई भी इंसान हो उसे इंसान ही समझते थे. सभी की बातों का सम्मान, कुछ दिनों पहले बहुत बड़ी बात कही थी उन्होंने जो जीवन पर्यंत मुझे सीख देती रहेगी.

अरुण सर को श्रद्धांजलि और उनके परिवार के प्रति हार्दिक संवेदना.. मेरा ये कष्ट जीवन पर्यंत रहेगा.

लेखक जी न्यूज में कार्यरत हैं.

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