रवि सिंह-
ये तमाचा है उस पूरे सिस्टम पर जो इसे सुसाइड बताती रही। चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी और SSP अभिनव पर तत्काल एक्शन होना चाहिए। पैसे पर बिकने वाले प्रभात मेमोरियल अस्पताल के डॉक्टर की गिरफ्तारी होनी चाहिए।
दिलीप कुमार-
जहानाबाद की बेटी NEET छात्रा की पटना मे रेप और हत्या मामले में परिजनों के गंभीर आरोप के बाद भी गर्ल्स हॉस्टल के संचालक और प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के डाक्टरों पर अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? Dr. सतीश को कौन बचा रहा है?
कोचिंग संस्थान का काला चिट्ठा नामक एक्स हैंडल लिखता है- अगर शंभू गर्ल्स हॉस्टल की सही से जांच हुई तो मुजफ़्फरपुर बालिका गृह जैसा कांड सामने आ सकता है।
रोहिणी आचार्य-
पटना के शम्भू गर्ल्स हॉस्टल में बलात्कार की शिकार हुई युवती के इलाज के दौरान पटना के प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल व वहाँ के डॉक्टरों के द्वारा युवती के शरीर पर मौजूद दर्जनों जख्मों के निशानों को जान- बूझ कर अनदेखा करना, उन्हें छुपाने- दबाने की हरसंभव कोशिश करना, मामले के बारे में बिना पुलिस- प्रशासन को इत्तला किए युवती को हॉस्पिटल में भर्ती कर इलाज करना, परिजनों को सच्चाई से अवगत नहीं कराना, साक्ष्यों के साथ आपराधिक छेड़छाड़ करना और युवती के साथ हुए बलात्कार की बात को नकारना- झुठलाना प्रथदृष्टया ही संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है..
मृतक युवती के परिजनों के द्वारा भी हॉस्पिटल की संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठाते हुए, हॉस्पिटल प्रबंधन और इलाज करने वाले डॉक्टर पर सीधा आरोप लगाया गया है.. परिजनों के आरोपों व हॉस्पिटल के द्वारा बरती गयी लापरवाही के संदर्भ में उजागर तथ्यपूर्ण जानकारी को आधार बना कर हॉस्पिटल व इलाज करने वाले डॉक्टर के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई एवं जाँच की प्रक्रिया के पूरे होने तक हॉस्पिटल को सील किए जाने की आवश्यकता है..

मामले की गंभीरता के मद्देनजर माननीय मुख्यमंत्री जी से मेरी अपील है कि वो इस मामले की मॉनिटरिंग स्वयं करें और अपने मातहत अधिकारियों को जाँच की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने का निर्देश देते हुए त्वरित न्याय मिलना सुनिश्चित करें..
सौरव राज-
प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल से कुछ सवाल:-
- बेहोश छात्रा को प्रभात मेमोरियल में एडमिट किसने कराया?
- परिजन और पुलिस की अनुपस्थिति में बेहोश छात्रा को एडमिट क्यों लिया?
- लड़की का वस्त्र क्या हुआ?
- मनीष रंजन का प्राइवेट गार्ड हॉस्पिटल में क्यों आया?
- सेंसेटिव इश्यू केस होने के बावजूद चार दिनों तक AIIMS/PMCH/IGIMS में क्यों रेफर नहीं किया गया
- मनीष रंजन के कौन रिलेटिव प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल में काम करता है?

मदन मोहन झा-
6 जनवरी एक लड़की जो अपने भविष्य के लिए अपने जगह छोड़ कर पटना आती है, उसके साथ बंद कमरे में यौन उत्पीड़न हुआ और पांच दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई। पोस्टमार्टम में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है, जबकि पुलिस ने इसे “आत्महत्या” बताकर परिवार पर मामला वापस लेने का दबाव बनाया।
ऐसी क्या हड़बड़ी थी पुलिस को? SIT बनाओ या जांच CBI को देना पड़े, न्याय मिला चाहिए!
आलोक चिक्कू-
पता नहीं क्यूँ मुझे ऐसा लग रहा है कि पटना गर्ल्स हॉस्टल मामले में SP कार्तिकेय शर्मा बलि का बकरा बन गए हैं।
आम चर्चा है कि इस केस में माननीय जी दखल दिए थे। माननीय के दबाव में थाना ने शिथिल रवैया अपनाया। माननीय हैं तो थाना उनके आदेश का अवहेलना करने का जोखिम नहीं उठाता।
घटना के बाद चूंकि पुलिस पर दबाव था तो SP ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में वही बात बोला जो थाना और हॉस्पिटल द्वारा बताया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आया नहीं था तब तक इसलिए SP वही बोले जो साक्ष्य था।
अब SP साहब के आगे के करियर में यह मामला एक धब्बा समान लगा रह जाएगा। SP साहब को अगर यह दाग धोना है तो इस केस में जो भी हॉस्टल के तरफ से पैरवीकार थे सबका नाम सार्वजनिक कर देना चाहिए।
मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं। पूरे देश में एक रोल मॉडल बन जाएंगे अगर इस केस में शामिल सभी लोगों (पैरवीकार सहित) का केवल नाम और कॉल डिटेल्स सार्वजनिक कर दें तो।
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