मनोज अभिज्ञान-
मनुष्य की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि वह भविष्य को वर्तमान की आँखों से देखता है और अतीत की धारणाओं से परखता है। उसे लगता है कि जो बीते कल में हुआ, वही आने वाले कल में भी होगा—बस और तेजी से, और ज्यादा मुनाफे के साथ। यह आत्मविश्वास नहीं, बल्कि भ्रम है, जो उसे बार-बार इतिहास की उन्हीं गलतियों की ओर धकेलता है जिनसे उसने कुछ नहीं सीखा। जब हर कोई किसी चीज़ पर अंधविश्वास करने लगे, तो समझ लीजिए कि वह चीज़ अपने अंत की ओर बढ़ रही है।
1999 में, जब अमेरिकी निवेशकों से पूछा गया कि अगले दशक में वे स्टॉक मार्केट से क्या उम्मीद रखते हैं, तो नए निवेशकों ने सालाना 22.6% रिटर्न की कल्पना की थी। वास्तविकता ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया—2009 तक बाजार ने नकारात्मक रिटर्न दिया। कल्पना करें, अगर अनुमानित रिटर्न की कल्पना सच होती, तो हर डॉलर 150 गुना बढ़ चुका होता, और कोई भी मात्र 600 डॉलर बचाकर करोड़पति बन सकता था। लेकिन बाजार में कभी भी ऐसी गारंटी नहीं होती।
यह कहानी केवल निवेशकों की नाकामी की नहीं, बल्कि इस तथ्य की भी है कि जब बाजार को लेकर अति-आत्मविश्वास बढ़ जाता है, तो अक्सर बुरे दिनों की शुरुआत हो जाती है। आत्मविश्वास, जिसे अक्सर निवेश का सबसे बड़ा गुण माना जाता है, दरअसल उलटा संकेत हो सकता है—जितना अधिक आत्मविश्वास, उतनी ही अधिक गिरावट की संभावना।
इतिहास भी इस बात की पुष्टि करता है। जब भी निवेशकों का भरोसा चरम पर पहुंचा, उसके बाद का बाजार प्रदर्शन फीका ही रहा। 2023 इसका ताजा उदाहरण है—संभावित मंदी की आशंका के बीच अमेरिका को निवेश के लिए कम पसंदीदा माना गया था, लेकिन अगले दो वर्षों में अमेरिकी बाजार ने विदेशी बाजारों को 36% के अंतर से पछाड़ दिया।
आश्चर्य नहीं कि 2024 की शुरुआत में निवेशकों का विश्वास अपने उच्चतम स्तर पर था। वेंगार्ड ग्रुप की रिपोर्ट कहती है कि निवेशकों की उम्मीदें अब तक के इतिहास में सबसे ऊंची थीं। गोल्डमैन सैक्स की ग्लोबल स्ट्रैटेजी कॉन्फ्रेंस में भी अधिकांश क्लाइंट्स ने अमेरिकी बाजार को सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र माना। लेकिन परिणाम? साल की शुरुआत में ही गैर-अमेरिकी बाजारों ने S&P 500 को 15 प्रतिशत अंकों से पछाड़ दिया।
शेयर बाजार का इतिहास एक बार फिर यही कहता है—जब हर कोई किसी बाजार या संपत्ति पर अत्यधिक भरोसा कर रहा हो, तो वहां सावधानी बरतने का समय आ जाता है। आत्मविश्वास का मीटर हमेशा सही दिशा नहीं दिखाता। यह अक्सर हमें पीछे देखने पर मजबूर करता है, लेकिन सच यह भी है कि अगर आप केवल रियरव्यू मिरर पर नजर गड़ाए रहेंगे, तो हो सकता है अगला मोड़ आपको किसी गड्ढे में ले जाए।


