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सुख-दुख

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह के पिताजी लालता प्रसाद सिंह का निधन

स्वर्गीय लालता प्रसाद सिंह

अमर उजाला, इंडिया टुडे, चौथी दुनिया समेत कई अखबारों मैग्जीनों में वरिष्ठ पद पर काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह के पिता जी लालता प्रसाद सिंह का मास्को में निधन हो गया. वे 92 वर्ष के थे. उनका काफी समय से इलाज चल रहा था और हर बार वह स्वस्थ होकर घर लौट आते थे. इस बार वह अस्वस्थ हुए तो अस्पताल से वापस नहीं लौट पाए. वह अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री समेत नाती-पोतों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. इन दिनों वह मास्को में अपने छोटे बेटे के यहां रह रहे थे.

स्वर्गीय लालता प्रसाद सिंह

अमर उजाला, इंडिया टुडे, चौथी दुनिया समेत कई अखबारों मैग्जीनों में वरिष्ठ पद पर काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह के पिता जी लालता प्रसाद सिंह का मास्को में निधन हो गया. वे 92 वर्ष के थे. उनका काफी समय से इलाज चल रहा था और हर बार वह स्वस्थ होकर घर लौट आते थे. इस बार वह अस्वस्थ हुए तो अस्पताल से वापस नहीं लौट पाए. वह अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री समेत नाती-पोतों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. इन दिनों वह मास्को में अपने छोटे बेटे के यहां रह रहे थे.

शीतल पी. सिंह पिता जी की मृत्यु की खबर सुनते ही मास्को के लिए रवाना हो गए. कल पार्थिव शरीर के साथ वह लोग भारत आएंगे और संभव: परसों अपने गृह जिले सुल्तानपुर पहुंचेंगे. पिता लालता प्रसाद सिंह बेहद उदात्त चेतना के शख्स थे. वे हल्थ सर्विसेज में कार्यरत रहे. रिटायरमेंट के बाद वह सुल्तानपुर जिले के कादीपुर तहसील स्थित अपने गांव सराय कल्यान के निवास करते रहे. साथ ही साथ दिल्ली से लेकर मास्को तक अपने पुत्रों के यहां आते-जाते रहे. उनके निधन पर उनके पुत्र शीतल पी. सिंह और उनको जानने-चाहने वाले पत्रकार असरार खान ने फेसबुक पर जो लिखा वह इस प्रकार है–

Sheetal P Singh : पिता बहुत अस्वस्थ थे। कल शाम (22 सितंबर) उनकी आख़िरी शाम थी! बहुत जुझारू रहे। चार दशक मधुमेह के साथ निकाल गये। कई अस्पतालों को छकाया। छोटे भाई के यहाँ मास्को में थे बीते तीन महीने से। वापसी के दिन ब्रेन स्ट्रोक हुआ। मैं भी पता लगते ही आया। पिछले महीने मिलकर गया ही था।

Asrar Khan : प्रिय साथी शीतल सिंह और अभिन्न मित्र बीपी सिंह के पिता परम आदरणीय श्री लालता प्रसाद सिंह जी अब इस दुनिया में नहीं रहे… इस दुःखद समाचार को सहने की ताकत तो मुझमें नहीं है क्योंकि मेरे भी पिता की तरह थे और विचारों से इतना प्रगतिशील और आधुनिक थे कि सहज ही हम उन्हें मित्र और कामरेड भी समझते थे…. सच तो यह है कि एक साधारण व्यक्ति के रूप में वे एक महात्मा थे जो किसी भी महत्वाकांक्षा से परे विशाल ह्रदय वाले मानवता नैतिकता और उच्च आदर्शों एवं व्यवहार के प्रेरणाश्रोत थे… उनकी कमी कभी पूरी नहीं होगी… इन्हीं शब्दों के साथ मैं अतुलनीय व्यक्तित्व के धनी प्रिय पिता जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं…

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