नहीं रहे गुवाहाटी के मूर्धन्य पत्रकार डीएन सिंह

गुवाहाटी। मुर्धन्य पत्रकार दयानाथ सिंह का निधन हो गया। रविवार को अहले सुबह गले में संक्रमण की शिकायत के बाद उन्हें जीएमसीएच में भर्ती कराया गया था जहां दोपहर को उनका निधन हो गया। 88 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार स्व. सिंह अपने पीछे पत्नी और पांच बेटियों को छोड़ गए हैं। उनका सोमवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। इससे पहले 10.30 बजे उनके पार्थिव शरीर को गुवाहाटी प्रेस क्लब लाया जाएगा जहां उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

देवघर के वरिष्ठ पत्रकार आलोक संतोषी का निधन

अलविदा आलोक! यादों में हमेशा जिंदा रहोगे…  झारखंड के देवघर से एक दुखद खबर है। देवघर जिले के वरिष्ठ पत्रकार आलोक संतोषी ने हमारा साथ छोड़ दिया। अब आलोक हमारे साथ सिर्फ यादों में रहेंगे, खिलखिलाते हुए, जोर जोर से हंसते हुए। पिछले पांच साल से पेट के कैंसर की बीमारी ने आलोक को हरा दिया। ईलाज के दौरान उनको कई बार आर्थिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ा।

स्व. आलोक संतोषी

पहली पीढ़ी के महान आर्थिक पत्रकार शशिकांत वसानी को मेरी श्रद्धांजलि

देश के पहले आर्थिक समाचार पत्र ‘व्‍यापार’ के संपादक शशिकांत वसानी हमारे बीच नहीं रहे। यह समाचार आज मुझे एक गुजराती अखबार कमोडिटी वर्ल्‍ड में छपी न्‍यूज से पता चला। मुंबई में रहते हुए 22 अक्‍टूबर 2017 को उन्‍होंने अंतिम सांस ली और उनकी बेटी अल्‍पा ने उन्‍हें मुखाग्नि दी। आर्थिक पत्रकार बनने में मैंने उनसे ही अपने जीवन में बहुत कुछ नहीं सब कुछ सीखा। एक कर्मचारी से ज्‍यादा उन्‍होने बेटे सरीखा रखते हुए एक-एक शब्‍द के बारे में समझाया, बनाया और गढ़ा।

मांगा था मजीठिया का हक, इसलिए नहीं छापा निधन का समाचार

जिनके साथ 25 साल गुजारा उनका भी मर गया जमीर, नहीं शामिल हुए अंतिम यात्रा में, यह है सहारा परिवार का सच…  वाराणसी : सहारा समूह के हुक्मरान सुब्रत राय सहारा एक तरफ जहां सहारा को एक कंपनी नहीं बल्कि परिवार मानने का दंभ भरते हैं, वहीं इसी सहारा समूह के पत्रकार रह चुके जयप्रकाश श्रीवास्तव के निधन की एक लाईन की खबर इसलिये राष्ट्रीय सहारा अखबार में नहीं लगायी गयी क्योंकि जयप्रकाश ने अखबार प्रबंधन से जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार अपना बकाया मांग लिया था।

झारखंड में भूख से अबकी 40 साल का रिक्शा चालक मरा

डिजिटल इंडिया या भूखा इंडिया : आधार के निराधार फरमान से दम तोड़ता भूखा हुआ झारखंड

विशद कुमार, रांची

सिमडेगा की 11 वर्षीय बच्ची संतोषी की भूख से हुई मौत पर हंगामा अभी थमा भी नहीं है कि राज्य के धनबाद जिले का कोयलांचल क्षेत्र का झरिया में एक 40 वर्षीय रिक्शा चालक की मौत ने रघुवर सरकार के आधार के निराधार फरमान की हवा निकाल दी है। उल्लेखनीय है कि सिमडेगा जिला अन्तर्गत जलडेगा प्रखंड के कारीमाटी गांव की कोयली देवी की 11 वर्षीय बेटी संतोषी कुमारी की मौत भात—भात रटते रटते हो गई थी। उसे कई दिनों से खाना नहीं मिल पाया था और उसके परिवार का राशन कार्ड इसलिए रद्द हो गया था कि राज्य की रघुवर सरकार द्वारा साढ़े 11 लाख अवैध राशन कार्ड रद्द कर दिए गए, जिसमें से एक राशन कार्ड कोयली देवी का भी था। ठीक उसी तरह झरिया के बैद्यनाथ दास के घर में भी कई दिनों से अनाज का एक दाना नहीं था क्योंकि बैद्यनाथ दास का गरीबी रेखा से नाम हट गया था और राशन कार्ड भी रद्द हो गया था।

राजेश शर्मा के निधन से भड़ास ने एक सच्चा शुभचिंतक खो दिया

राजेश शर्मा चले गए. दिवाली की रात. हार्ट अटैक के कारण. उमर बस 44-45 के आसपास रही होगी. वे इंडिया न्यूज यूपी यूके रीजनल चैनल के सीईओ थे. राजेश भाई से मेरी जान पहचान करीब आठ साल पुरानी है. वो अक्सर फोन पर बातचीत में कहा करते- ”यशवंत भाई, तुम जो काम कर रहे हो न, ये तुम्हारे अलावा कोई दूसरा नहीं कर सकता. मैंने मीडिया इंडस्ट्री को बहुत करीब से देखा है. यहां सब मुखौटे लगाए लोग हैं. भड़ास के जरिए तुमने आजकल की पत्रकारिता को आइना दिखाया है.”

इंडिया न्यूज यूपी-यूके रीजनल चैनल के सीईओ राजेश शर्मा का हार्ट अटैक से निधन

दीपक चौरसिया और रवि शर्मा के साथ सबसे बाएं राजेश शर्मा

एक दुखद खबर आ रही है दिल्ली से. इंडिया न्यूज समूह के रीजनल न्यूज चैनल इंडिया न्यूज यूपी यूके के सीईओ राजेश शर्मा का ऐन दिवाली की रात हार्ट अटैक से निधन हो गया. उनकी उम्र 45 वर्ष के आसपास रही होगी. जिंदादिल स्वभाव वाले राजेश बेहद मेहनती और निष्ठावान शख्सियत थे. यही कारण है कि इंडिया न्यूज में एंट्री के बाद उन्होंने लगातार तरक्की की.

वरिष्ठ पत्रकार श्री सत्येंद्र आर शुक्ल (92) नहीं रहे

Sarvesh Kumar Singh : दुखद समाचार। वरिष्ठ पत्रकार श्री सत्येंद्र आर शुक्ल (92) नहीं रहे। 13 अक्टूबर को शाम 5 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। मेरे मित्र राजीव शुक्ला के पिता NUJI और UPJA के संस्थापक सदस्य थे। भगवान उनकी आत्मा को सद्गति प्रदान करे। विनम्र श्रद्धांजलि। शनिवार की अपरान्ह भैंसाकुण्ड श्मसान घाट पर उनकी अन्त्येष्टि की गई। उनके ज्येष्ठ पुत्र राजीव शुक्ल ने मुखाग्नि दी। इस दौरान राजधानी के अनेक पत्रकार और उनके परिवारीजन मौजूद थे।

एचटी बिल्डिंग के सामने सिर्फ एक मीडियाकर्मी नहीं मरा, मर गया लोकतंत्र और मर गए इसके सारे खंभे : यशवंत सिंह

Yashwant Singh : शर्म मगर इस देश के मीडिया मालिकों, नेताओं, अफसरों और न्यायाधीशों को बिलकुल नहीं आती… ये जो शख्स लेटा हुआ है.. असल में मरा पड़ा है.. एक मीडियाकर्मी है… एचटी ग्रुप से तेरह साल पहले चार सौ लोग निकाले गए थे… उसमें से एक ये भी है… एचटी के आफिस के सामने तेरह साल से धरना दे रहा था.. मिलता तो खा लेता.. न मिले तो भूखे सो जाता… आसपास के दुकानदारों और कुछ जानने वालों के रहमोकरम पर था.. कोर्ट कचहरी मंत्रालय सरोकार दुकान पुलिस सत्ता मीडिया सब कुछ दिल्ली में है.. पर सब अंधे हैं… सब बेशर्म हैं… आंख पर काला कपड़ा बांधे हैं…

न्यूज24 के एसोसिएट प्रोड्यूसर कामता सिंह को जहर देकर और गला घोंटकर मारा गया था!

इसी साल मार्च महीने में न्यूज24 के एसोसिएट प्रोड्यूसर कामता सिंह की रहस्यमय हालात में मौत हो गई थी. जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई है उसमें बताया गया है कि उन्हें जहर देकर और गला घोंटकर मारा गया. कामता चैनल से ड्यूटी करके रात 12 बजे सोने चले गए थे. साथ में पत्नी भी सो रही थीं. सुबह छह बजे वे नहीं उठे और न हलचल कर रहे थे. तब पत्नी उन्हें अस्पताल ले गईं. वहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था. फिलहाल बिसरा रिपोर्ट का आना अभी बाकी है.

वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह के पिताजी लालता प्रसाद सिंह का निधन

स्वर्गीय लालता प्रसाद सिंह

अमर उजाला, इंडिया टुडे, चौथी दुनिया समेत कई अखबारों मैग्जीनों में वरिष्ठ पद पर काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह के पिता जी लालता प्रसाद सिंह का मास्को में निधन हो गया. वे 92 वर्ष के थे. उनका काफी समय से इलाज चल रहा था और हर बार वह स्वस्थ होकर घर लौट आते थे. इस बार वह अस्वस्थ हुए तो अस्पताल से वापस नहीं लौट पाए. वह अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री समेत नाती-पोतों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. इन दिनों वह मास्को में अपने छोटे बेटे के यहां रह रहे थे.

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार अरविंद नारायण सिंह का निधन

Sad news. journalist Arvind Narayan Singh, who had been associated with Nav Bharat Times, Rashtriya Sahara and Hindustan, died at his Indira Nagar, Lucknow residence on Sept. 7, Thursday. RIP

Devesh Singh : वरिष्ठ पत्रकार अरविंद नारायण सिंह हमारे बीच नहीं रहे। आज हम सब के बीच वरिष्ठ पत्रकार अरविंद नारायण सिंह नहीं रहे। प्रातः तकरीबन सवा चार बजे उन्होंने अन्तिम सांस ली। लंबे समय से वह हिपेटाइटिस से जूझ रहे थे। अन्तोगत्वा आज मौत के आगे जिंदगी ने घुटने टेक दिये। यूं तो मीडिया जगत में उनकी लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। हिन्दुस्तान अखबार से अलग होने के बाद वह कुछ बुझे-बुझे से रहने लगे थे। कभी उन्होंने अपने दर्द को बयां नहीं किया।

समाचार सम्पादक विजय विनीत को पितृशोक, मणिकर्णिका घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

वाराणसी। ‘जनसंदेश टाइम्स’ के समाचार सम्पादक एवं संपादकीय प्रभारी विजय विनीत के पिता डा. रणवीर सिंह (87) ने शनिवार को अंतिम सांस ली। वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। उनका उपचार एक निजी अस्पताल में चल रहा था। उपचार के दौरान ही उन्होंने आंखें मूंद ली। मूलत: चंदौली जिले के उतरौत निवासी डा. रणवीर सिंह इसी जिले के बबुरी स्थित अशोक इंटर कालेज से प्रवक्ता पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

बेहतरीन अनुवादक और ब्लागर मनोज पटेल नहीं रहे

Amitaabh Srivastava : बेहतरीन अनुवादक, ब्लॉगर, फेसबुक मित्र मनोज पटेल का यूँ अचानक चले जाना! क्या कहें सिवाय इसके कि जीवन बहुत अनिश्चित है, समय बहुत क्रूर. पुस्तक मेले की मुलाकात याद आयी और मन भर आया. हम जैसों के लिए तो उनके अनुवाद एक नयी दुनिया की खिड़कियों का काम करते थे. उनका ब्लॉग पढ़ते-पढ़ते पढ़कर ही कई नामों से परिचय हुआ था. बहुत अफ़सोस है मन में, बड़ा मनहूस दिन रहा आज. विनम्र श्रद्धांजलि

नवगछिया के वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार झा उर्फ सुनील झा नहीं रहे

शुक्रवार को चार बजे सुबह पटना के आईजीआईएमएस में ली अंतिम सांस… बिहार के भागलपुर जिले के बिहपुर के दयालपुर ग्राम के निवासी सुनील कुमार झा का शुक्रवार को पटना के आईजीआईएमएस में इलाज के दौरान निधन हो गया. वे कैंसर से पीड़ित थे. कुछ दिनों पूर्व जब उन्हें परेशानी हुई तो उन्हें इलाज के लिए भागलपुर के जेएलएनएमसीएच में भर्ती कराया गया था. उन्होंने अन्न जल लेना पूरी तरह से बंद कर दिया था.

वेद उनियाल यानि एक ‘संघर्ष’ का ‘संघर्षमय’ अंत…

Yogesh Bhatt : एक ‘संघर्ष’ का ‘संघर्षमय’ अंत. आज की पीढ़ी में बहुत कम लोग होंगे जो वेद भाई (वेद उनियाल) के नाम से परिचित होंगे। वेद भाई संघर्ष का वो नाम है , जो जिया भी संघर्ष में और विदा भी संघर्ष करते करते हुआ। वेद उनियाल उत्तराखंड राज्य आंदोलन का वो नाम है, जिसने इस आंदोलन को उम्र भर जिया। न कोई कारोबार, न कोई सियासत, न कोई रोजगार, सिर्फ और सिर्फ संघर्ष। राज्य आंदोलन के दौर में वह सिर्फ प्रथम पंक्ति के योद्धा ही नहीं, बल्कि चिंतक, विचारक और प्रमुख रणनीतिकार भी रहे। अस्सी-नब्बे के दशक के दौरान जनांदोलनों, जन सरोकारों से जुड़े लोग बखूबी वेद उनियाल से वाकिफ हैं।

खनन माफिया ने अमर उजाला के पत्रकार को कुचला, अखबारों ने बताया दुर्घटना!

खनन माफिया के शिकार अमर उजाला के पत्रकार मिंटू मिश्रा

एक और कलम के सिपाही की निर्मम हत्या कर दी गई. खनन माफिया ने बेहजम (लखीमपुर खीरी) के अमर उजाला के पत्रकार मिंटू मिश्रा की शाम होते ही भरे चौराहे पर टैक्टर टाली से कुचल दिया. इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गयी. दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि अखबारों ने पत्रकार की हत्या को दुर्घटना में मौत बताकर छापा. इससे साथी पत्रकारों में आक्रोश है. पुलिस ने भी दुर्घटना का मुकदमा दर्ज किया है. हत्या के दो घंटे बाद मौके पर पहुंची थी पुलिस. आक्रोशित लोगों ने लखीमपुर मैगल गंज मार्ग जाम कर अपना विरोध प्रकट किया.

मुम्बई के जाने माने प्रेस फोटोग्राफर राजू उपाध्याय का दुर्घटना में निधन

मुम्बई के जाने माने फ़िल्म प्रेस फोटोग्राफर राजू उपाध्याय का वाराणसी से सटे गोपीगंज थाना इलाके के छतमी में एक ट्रक से हुई दुर्घटना में गुरुवार की सुबह निधन हो गया। वो मूलतः भदोही जिले के रहने वाले थे। वो सोमवार को भदोही आए थे। उनकी पत्नी यहां सीतामढ़ी में शिक्षिका हैं। हादसे के वक्त राजू सीतामढ़ी स्थित आवास से दवा लेने के लिए बाइक द्वारा गोपीगंज बाजार जा रहे थे।

पठानिया जी का अंतिम संदेश- ”जिंदगी बहुत खूबसूरत है, लेकिन अपनों के बिना तू अच्छी नहीं लगती”

भला ऐसे भी कोई जाता है… : जिंदगी बहुत खूबसूरत है, लेकिन अपनों के बिना तू अच्छी नहीं लगती। मेरे व्हाट्सएप पर वरिष्ठ पत्रकार पठानिया जी का अंतिम संदेश यही था। पत्रकारिता में अपना जीवन खपा देने वाले बड़े भाई समान मित्र राकेश पठानिया अंतिम समय में मुझे याद करते रहे। (जैसा पारिवारिक सदस्यों ने आज अल सुबह बताया)। पता नहीं दोस्ती के कई कर्ज चुकाने बाकी रह गए।

नहीं रहे धर्मशाला के वरिष्ठ पत्रकार राकेश पठानिया

(स्व. राकेश पठानिया)

एक कलमकार की मौत और सौ सवाल : कहने को तो अब हिमाचल प्रदेश का शहर धर्मशाला प्रदेश की दूसरी राजधानी है और स्मार्ट सीटी भी बनने जा रही है, मगर आज से दो दशक पहले भी धर्मशाला की प्रदेश की राजनीति में काफी अहमियत थी। तब की पत्रकारिता आज के दौर से कहीं अलग और काफी मुश्किल भरा टास्क थी। कुछ गिनी चुनीं अखबारें प्रदेश के बाहर से छपकर आती थीं और इनके पत्रकारों के तौर पर घाघ लोगों का कब्जा था। किसी नए खबरनवीस के लिए अखबार में जगह तलाशना कोयले के खान में हीरा तलाशने जैसा मुश्किल काम था। सीनियर भी ऐसे थे, जो उस समय के दौर में मिलने वाली तबज्जों और आवभगत के चलते किसी को करीब फटकने नहीं देते थे, और शागिर्द की बात करें तो ऐसा सांप सूंघ जाता था कि मानो वह एकलव्य बनकर उनके लक्ष्य को भेदने को तैयार हो।

लोकस्वामी मैग्जीन के संपादक रजनीकांत वर्मा का निधन

लोकस्वामी समूह के ग्रुप एडिटर रजनीकांत वर्मा नहीं रहे. हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया. वे पचपन साल के थे. वे पिछले कुछ समय से बीमार भी चल रहे थे जिसके कारण उनका इलाज चल रहा था. उत्तराखंड के हल्द्वानी (नैनीताल) के रहने वाले रजनीकांत ने करियर का काफी लंबा अरसा इंदौर में व्यतीत किया.

सन्मार्ग अखबार के संपादक आनंद बहादुर सिंह का बनारस में निधन

वाराणसी। राजा टोडरमल के वंशज और पत्रकारिता के युग पुरुष सन्मार्ग अखबार के संपादक अनंदबहादुर सिंह का इलाज के दौरान शनिवार को तड़के 4 बजे निधन हो गया। उनके निधन से पत्रकारिता क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। श्री सिंह की 87 वर्ष कीअवस्था थी। उनके निधन की जानकारी जैसे ही समाज के बुद्धिजीवी, पत्रकारों और उनके शुभचिंतकों को लगा जो जैसे था उनके भदैनी स्थित आवास की ओर दौड़ पड़ा। श्री सिंह का जन्म 29 अगस्त 1930 (लोलार्कछठ) के दिन हुआ था। वह शुरु से धार्मिक प्रवृत्ति और काशी के गंगो-जमुनी यकजहती के संवाहक थे। उनका श्री संकटमोचन मंदिर के महंत परिवार से ताल्लुकात होने की वजह से उनकी रूचि गोस्वामी तुलसीदास जी में रही। वह रामचरित मानस में जबरदस्त पकड़ रखते थे। इतना ही नही वह काशी के इतिहास के बारे में भी अच्छी जानकारी रखते थे।

आगरा-मथुरा के वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्रवाल का निधन

मथुरा के नियति हास्पीटल में आज सुबह करीब सवा आठ बजे वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्रवाल जी ने आंखें मूंद ली। उन्होंने आज अखबार में लंबे समय तक क्राइम रिपोर्टर और फिर सिटी इंचार्ज के तौर पर सेवा दी। इससे पहले उन्होंने विकासशील भारत में बतौर क्राइम रिपोर्टर काम किया। आज अखबार छोड़ने के बाद वे डीएलए से जुड़ गए। यहां उन्होंने बतौर सीनियर क्राइम रिपोर्टर काम किया।

मुंबई की वरिष्ठ फिल्म पत्रकार पिरोज वाडिया का निधन

SAD DEMISE OF SENIOR JOURNALIST PIROJ WADIA

Dear Member,

With great sorrow and regret we have to inform you that Piroj Wadia, a senior film journalist and Press Club member passed away today in Mumbai after a brief illness. Piroj, aged 67 was in journalism for almost four decades with Free Press Journal, The Daily, Indian Express and Cine Blitz.

नहीं रहे लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार केसी खन्ना

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट (आईएफडब्लूजे) के दशकों पुराने सहयोगी केसी खन्ना का निधन हो गया है। अंग्रेजी दैनिक दि पॉयनियर के उप समाचार संपादक रहे केसी खन्ना आईएफडब्लूजे की राष्ट्रीय कार्यकारिणी व यूपी प्रेस क्लब की गवर्निंग बाड़ी के सदस्य रहे थे। दिवंगत पत्रकार केसी खन्ना की रस्म पगड़ी …

बनारस के वरिष्ठ पत्रकार रत्न शंकर व्यास का निधन

Ak Lari : वरिष्ठ पत्रकार रत्न शंकर व्यास का निधन। वह ‘आज’ अखबार से जुड़े थे। वह ‘आज’ अखबार में संपादक रहे लक्ष्मी शंकर व्यास के बड़े पुत्र थे। अवस्था करीब 76 साल थी। रिटायर्ड होने के बाद ‘आज’ अखबार में संम्पादकीय लेखन का दायित्व निभा रहे थे। जानकारी के अनुसार रत्न शंकर जी तीन दिन से कार्यालय नहीं आ रहे थे। अस्वस्थ थे। घर पर ही इलाज चल रहा था।

कैंसर से पीड़ित वरिष्ठ पत्रकार धर्मेंद्रपाल सिंह का निधन

Jaishankar Gupta : करीब चार दशकों की दोस्ती को एक झटके में तोड़ कर धर्मेंद्रपाल सिंह का इस तरह असमय चले जाना भारी दुख दे गया। 1980 में हमारी मुलाकात लोदी एस्टेट में स्थित असली भारत के दफ्तर में हमारी मुलाकात हुई थी। हम वहां संवाददाता सह उप संपादक थे। धर्मेंद्र हिन्दुस्तान अखबार में कार्यरत थे लेकिन हमारे संपादक, पूर्व सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री रहे अजय सिंह से करीबी के कारण धर्मेंद्र वहां आते जाते या कहें सलाहकार सहयोगी की भूमिका में थे। 1997 में जब हम हिन्दुस्तान से जुड़े तब वह वहां वरिष्ठ और पुराने सहयोगी के रूप में मिले। कुछ बातों को लेकर मतभेद भी होते थे लेकिन मनभेद कभी नहीं हुए। कम मिलते थे लेकिन निजी रिश्तों में प्रगाढ़ता में कमी कभी नहीं आई। कैंसर से वह जूझ रहे थे। और कुछेक अवसरों पर और खासतौर से आपरेशन के बाद तो लगा कि उन्होंने अपराजेय कहे जानेवाले कैंसर को परास्त कर दिया है लेकिन कल रात वह इस लड़ाई को हार गए। मन बोझिल और सदमें में है। अपने बेलौस ठहाकों के लिए मशहूर मित्र को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि। शोक की इस घड़ी में हमारी सहानुभूति और संवेदना सुषमा जी और उनके परिवार के साथ है।

पहले प्रदीप संगम, फिर ओम प्रकाश तपस और अब संतोष तिवारी का जाना….

एक दुर्भाग्यपूर्ण संयोग या दुर्योग, जो कहिए… मेरे ज्यादातर प्रिय पत्रकारों का समुदाय धीरे-धीरे सिकुड़ता छोटा होता जा रहा है… दो-तीन साल के भीतर एकदम से कई जनों का साथ छोड़कर इस संसार को अलविदा कह जाना मेरे लिए स्तब्धकारी है… पहले आलोक तोमर, फिर प्रदीप संगम, उसके बाद ओमप्रकाश तपस और अब संतोष तिवारी… असामयिक रणछोड़ कर चले जाना या जीवन के खेल में आउट हो जाना हर बार मुझे भीतर तक मर्माहत कर गया… सारे पत्रकारों से मैं घर तक जुड़ा था और प्यार दुलार का नाता बहुत हद तक स्नेहमय सा बन गया था… इनका वरिष्ठ होने के बाद भी यह मेरा सौभाग्य रहा कि इन सबों के साथ अपना बोलचाल रहन-सहन स्नेह से भरा रसमय था… कहीं पर कोई औपचारिकता या दिखावापन सा नहीं था… यही कारण रहा कि इनके नहीं होने पर मुझे खुद को समझाने और संभलने में काफी समय लगा…

संतोष तिवारी की प्रतिभा को अंकुरित-पल्लवित होते बहुत निकट से देखा था मैंने

Rajendra Rao : दैनिक ट्रिब्यून के संपादक और मेरे अजीज संतोष तिवारी का असमय प्रस्थान स्तब्ध और उदास कर गया। सत्तर के दशक में मैंने उनकी प्रतिभा को अंकुरित और पल्लवित होते बहुत निकट से देखा था। तब वे इंटर में पढ़ते थे। लेखन का जुनून सवार था और अपनी प्रारंभिक रचनाएं दिखाने लाल कालोनी (किदवई नगर) से मेरे घर (अर्मापुर) नियमित रूप से आते थे। उनकी पहली ही कहानी धर्मयुग में छपी और फिर उन्होंने मुड़ कर नहीं देखा।