
पुष्प रंजन-
तू इधर-उधर की बात न कर, ये बता कि 3,643.78 करोड़ रुपये कैसे लूटा, और किस-किस ने बाँटा?
1985 की बात है। भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी सूखे प्रभावित ओडिशा के कालाहांडी जिले में दौरे पर थे। उन्होंने कहा था कि सरकार जब भी 1 रुपया खर्च करती है, तो लोगों तक 15 पैसे ही पहुंच पाते हैं।
यहां राजीव गांधी बिचौलियों और कमीशनखोरों द्वारा भ्रष्टाचार का जिक्र कर रहे थे। राजीव गांधी की साफगोई को पीएम मोदी ने राजनीतिक कटाक्ष का हथियार बना लिया.
मान्यवर जब भी भ्रष्टाचार की चर्चा करते, “रूपये में पंद्रह पैसे” को मुद्दा बनाते. लेकिन, पूरे दस साल गाल बजाने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने कभी नहीं स्वीकार किया, कि उनके कालखंड में घूसखोरी के रेट किस रफ़्तार में बढ़े हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 4 दिसंबर को शिवाजी की मूर्ति का अनावरण किया था. इसके ठीक 8 महीने बाद, 26 अगस्त 2024 को शिवाजी की मूर्ति भरभरा के गिरी, और टुकड़ों में बिखर गई.
इस मामले में मूर्ति निर्माण कार्य के ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. लोक निर्माण विभाग की शिकायत में दावा किया गया है कि मूर्ति का निर्माण घटिया गुणवत्ता का था, और संरचना में इस्तेमाल किए गए नट- बोल्ट जंग खाए हुए पाए गए.
इस घटना को लेकर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार ने माफी मांगी है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में मैं महाराष्ट्र के 13 करोड़ लोगों से माफी मांगता हूं. लेकिन, पतले टीन से बनी इस मूर्ति के बहाने 3,643.78 करोड़ रुपये ऊपर से नीचे तक किन-किन महानुभावों ने डकारे, यह बताने में पवार की पैंट ढीली हो जाती है.

क्या केवल हाथ जोड़कर माफ़ी मांग लेने से बात ख़त्म हो जाएगी? महाविकास अघाड़ी 1 सितंबर को हुतात्मा चौक से दक्षिण मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया तक मार्च निकालेगी. भ्रष्टाचार डकारने में डबल इंजन सरकार का जोड़ नहीं है. ये निकाल लेंगे कोई न कोई तोड़.
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