सुप्रीम कोर्ट ने शोभना भरतिया के एफआईआर रद्द करने के आवेदन को ठुकराया

विज्ञापन घोटाला की जांच को जल्द पूरा करने का आदेश दिया

नई दिल्ली । हिंदी दैनिक हिंदुस्तान के विज्ञापन घोटाला में प्रमुख अभियुक्त शोभना भरतिया के प्राथमिकी रद्द करने के आवेदन को सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई को ठुकरा दिया. साथ ही पुलिस अनुसंधान पर लगी रोक को भी हटा लिया ओैर इस कांड में पुलिस को जल्द से जल्द अनुसंधान पूरा करने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में यह भी लिखा है कि- ‘सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट करता है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मुकदमे की मेरिट पर अपना कोई मन्तव्य नहीं दिया हैं।’ उपर्युक्त फैसला सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और माननीय न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर ने 11 जुलाई को सुनाया।

मंटू शर्मा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दो घण्टों तक चली बहस में मुंगेर (बिहार) के अधिवक्ता श्री कृष्णा प्रसाद, राजकिशोर चौधरी (एओआर) एवं अन्य ने भाग लिया। मुंगेर के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला में 11 जुलाई की सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम सुनवाई की श्रेणी में डाला था।

मुंगेर कोतवाली में दर्ज पुलिस प्राथमिकी में वादी व सामाजिक कार्यकर्ता मन्टू शर्मा ने आरोप लगाया है कि कंपनी की चेयरपर्सन शोभना भरतिया, प्रधान संपादक शशिशेखर, पटना संस्करण के तत्कालीन कार्यकारी संपादक अक्कू श्रीवास्तव, भागलपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बिनोद बन्धु और कंपनी के मुद्रक प्रकाशक अमित चोपड़ा ने वर्ष 2001 के 01 अगस्त से 30 जून, 2011 तक अवैध ढंग से दैनिक हिन्दुस्तान का बिना निबंधन वाले फर्जी मुंगेर संस्करण का प्रकाशन किया।

पटना संस्करण के दैनिक हिन्दुस्तान के नाम आवंटित निबंधन संख्या के आधार पर ही मुंगेर संस्करण लगातार छापते रहे। इस तरह केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और मुंगेर जिला व पुलिस प्रशासन से अवैध ढंग से लगभग दो सौ करोड़ का सरकारी विज्ञापन प्राप्त किया. पटना उच्च न्यायालय ने प्रमुख अभियुक्त शोभना भरतिया और अन्य नामजद अभियुक्तों के क्रिमिनल मिसलेनियस पीटिशन नं0-2951 को पहले ही रद्द कर चुका है।

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