संजय कुमार सिंह
चुनाव करा रहे अधिकारियों के नाम ही वोटर लिस्ट में नहीं हैं तो वोटर लिस्ट का हाल कैसा होगा समझा जा सकता है। ऐसे वोटर लिस्ट वाले चुनाव को क्या कहा जाए – यह शायद बाद में तय होगा। यह भी संभव है कि भाजपा हार जाए मेरा मतलब है बंगाल में जीत न पाए और अगली कोशिश पांच साल बाद करने की बजाय मोदी आयोग चुनाव ही रद्द कर दे। नामुमकिन मुमकिन है, नरेन्द्र मोदी की एक प्रमुख चुनावी घोषणा थी और अब उसका अहसास हो रहा है। हालांकि, इस बात का तो अनुमान भी नहीं था कि ऐसा होगा और उसकी खबर भी नहीं छपेगी। यह दूसरा नामुमकिन मुमकिन होना है। दि इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित इस खबर के अनुसार, ये अफसर चुनाव कराने के लिहाज से तो विश्वसनीय हैं …. पर उन्हें जता दिया गया है कि वे अपने वोट नहीं डाल सकते हैं। अखबार ने चार प्रेसाइडिंग अधिकारियों की तस्वीर के साथ उनके नाम बताए हैं और यह भी कि ये किन जगहों के चुनाव अधिकारी हैं। खबर का शीर्षक है, ये अधिकारी दूसरों को मतदान कराने में मदद करते हैं लेकिन इनके अपने नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इस तरह, तथाकथित घुसपैठियों को मतदाता सूची से बाहर करने की कवायद का अंत चुनाव अधिकारियों के ही बाहर हो जाने से हुआ है। यह लॉजिकल डिसक्रिपेंसी ठीक करने की एक नई नौटंकी के नाम पर हुआ है और इसे सुप्रीम कोर्ट ने होने दिया है। संयोग हो या प्रयोग, आज ही नवोदय टाइम्स में छपी खबर के अनुसार, अमित शाह ने कहा है कि सत्ता में आए तो सीएए लागू करेंगे। दूसरी ओर, द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार, मतदाता सूची से हटा दिए जाने से डरे टेकी (नौकरीपेशा) की भीड़ से विमान किराया बढ़ा। जाहिर है, सरकार की इन घोषणाओं से लोग परेशान हो रहे हैं और डर रहे हैं। पहले ऐसा नहीं होता था और मतदाता सूची में नाम होना-नहीं होना बहुत मायने नहीं रखता था। अब मतदाता सूची में नाम होने को नागरिकता से जोड़ दिया गया है और इसके लिए आधार नहीं मानेंगे तथा भांति-भांति के जो दस्तावेज मांगे जा सकते हैं उससे लोगों में डर है।

इस तरह, हिन्दुओं का भला करने आई सरकार ने हिन्दुओं को भी डरा रखा है और एसआईआर के दौरान तो परेशान किया ही। अभी भी लोग परेशान हो रहे हैं जबकि एसआईआर का नतीजा यह है कि चुनाव कराने वाले अधिकारी भी बाहर हो गए हैं। दूसरे शब्दों में जो मतदान करा रहा है वह खुद मतदाता सूची में नहीं है फिर भी लोगों में डर है और ऐसा तब होता है जब कोई व्यवस्था नहीं होती है या कोई काम सिस्टम के अनुसार नहीं चल रहा हो। किसी देश के लिए यह अच्छी स्थिति नहीं है लेकिन भाजपा चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कर सकती है। इसी का नतीजा है कि आम आदमी पार्टी भी डरी हुई है। आबकारी नीति घोटाले के फर्जी मामले से पार्टी और उसके नेताओं को परेशान करने, इसके लिए मामला विशेष जज के ही सुनने की कोशिशों जैसे खुलासों के बाद अब उसके राज्यसभा संसदीय दल के 10 में से सात नेता भाजपा में चले गए हैं। आज के अखबारों में खबर है कि पार्टी अपने लोगों को साथ रखने के लिए संघर्ष कर रही है। लगभग इसी शीर्षक से एक खबर द टेलीग्राफ में है। दि इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर लीड है। भगवंत सिंह मान ने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा, आम आदमी पार्टी के तीन लोकसभा सदस्यों पर फोकस। हिन्दुस्तान टाइम्स के शीर्षक के अनुसार, आम आदमी पार्टी राज्य सभा के सभापति से भी अपील करेगी। इसके साथ प्रमुखता से छपी खबर है, भाजपा ने केजरीवाल के नए घर के इंटीरियर का फोटो जारी किया महंगा बताया, आप ने कहा फोटो फर्जी है। यहां गौर करने वाली बात है कि आप ने कहा कि फोटो फर्जी है तो खबर को इतनी प्रमुखता क्यों दी गई। तब दी जानी चाहिए थी जब फोटो सही होती और दावा गलत होता। यहां दावा फर्जी है। वैसे भी, भाजपा वाले केजरीवाल के शीश महल का मामला पहले भी उठा चुके हैं और इसमें कानूनन कुछ गलत नहीं था। इसलिए कुछ हुआ नहीं पर फिर चुनावी माहौल बना, केजरीवाल ने आप की व्यवस्था की पोल खोली तो भाजपा ने नए सिरे से फर्जी आरोप लगा दिया। अखबार का काम था कि वह आप के दावों के बाद सबूत मांगता और अपने पाठरों को बताता कि भाजपा ने क्या किया। या फिर भाजपा के आरोप को ही रहने देता। फर्जी होने की जानकारी के बावजूद खबर को प्रमुखता देने का मतलब भाजपा की दलाली करना या दबाव में आना है। पता नहीं सच क्या है या कुछ है भी नहीं। लेकिन यह खबर किसी भी तरह से इस शीर्षक के साथ पहले पन्ने के लायक नहीं है। अगर रिपोर्टर- संपादक को पता नहीं था तो और गंभीर मामला है। जहां तक आम आदमी पार्टी की बात है, राज्यसभा में पार्टी के 10 में से सात सदस्यों के भाजपा में चले जाने और इतनी बड़ी संख्या में जाने पर दल बदल कानून लागू न होने की उम्मीद के बाद इस मुलाकात के अलग मायने हैं। खबर के अनुसार, पार्टी के तीन लोकसभा सदस्यों में से एक ने बेहतर संयोजना की मांग की है जबकि दो ने कहा है कि वे कहीं नहीं जा रहे हैं। आप जानते हैं कि भाजपा के सांसदों को टिकट मिल जाए तो भाजपाई उपायों और भाजपा के तंत्रों से चुनाव जीतने की उम्मीद हो सकती है लेकिन ज्यादातर को अपने स्तर पर ही चुनाव जीतना होता है। इसलिए दल बदल आसान नहीं है। राज्य सभा की सदस्यता तो सेटिंग गेटिंग का खेल है। इसलिए उसकी बात अलग है।
इंडियन एक्सप्रेस में आज एक खबर इसपर भी है कि 2014 के बाद राज्यों में भाजपा के साथ विधायकों का ‘विलय’ कैसे हुआ। देशबन्धु की आज की लीड मणिपुर से है। शीर्षक है, मणिपुर में पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी। यह खबर आज और भी अखबारों में है। इंडियन एक्सप्रेस में इसका शीर्षक है, दो बच्चों की हत्या को लेकर विरोध बढ़ने से पूरे इंफाल में झड़प। द हिन्दू का शीर्षक है, मणिपुर में मुख्यमंत्री के घर तक मार्च विफल; 22 जख्मी। इस तरह, मणिपुर की हालत फिर खराब है। तीन साल से जल रहा है। सरकार कुछ नहीं कर पाई है या जो किया है उससे कोई फायदा नहीं है। चुनाव जीतने वाली केंद्र की सरकार का पूरा जोर बंगाल जीतने पर है और केंद्रीय गृहमंत्री एलान कर चुके हैं कि वे बंगाल जीतने के लिए 15 दिन बंगाल में रहेंगे। उल्लेखनीय है कि मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने 2023 की जातीय हिंसा से जुड़ी कथित ऑडियो क्लिप के संबंध में अपनी आवाज का नमूना नहीं दिया है। 48 मिनट के एक वीडियो के जरिए पूर्व मुख्यमंत्री को मणिपुर में जातीय हिंसा से जोड़ा गया है। लिहाजा, एन बिरेन सिंह की आवाज के कथित नमूनों की जांच नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू), गांधीनगर द्वारा की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इन ऑडियो क्लिप्स की प्रामाणिकता की जांच करने का आदेश दिया है। शुरु में ट्रुथ लैब्स ने कथित ऑडियो क्लिप और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध एन बिरेन सिंह के भाषणों में 93% मेल होने की बात कही थी। नवंबर 2025 में, एनएफएसयू ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऑडियो क्लिप के साथ छेड़छाड़ की गई है। इससे यह निर्णायक रूप से नहीं कहा जा सकता कि वह सिंह की ही आवाज है। एन बीरेन सिंह ने इन ऑडियो क्लिप्स को ‘फर्जी’ और अपने खिलाफ ‘साजिश’ बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने बीरेन सिंह को एक नया, प्रत्यक्ष वॉयस सैंपल देने का सुझाव दिया है लेकिन दिया या नहीं, पता नहीं चल पाया है।
दूसरी ओर, दि एशियन एज की लीड के अनुसार केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और अमित शाह ने बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से पहले माहौल गर्म कर दिया है। इस खबर के साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री का यह दावा भी है कि भाजपा अपने 19 मुख्यमंत्रियों की मदद के बाद भी बंगाल में चुनाव नहीं जीत सकती है। चार कॉलम में छपी इन दो खबरों के नीचे चार ही कॉलम में छपी खबर का शीर्षक है, पश्चिम बंगाल चुनाव में कांग्रेस तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ सख्त नहीं है? मुझे लगता है कि यह पहले पन्ने का शीर्षक नहीं है। अगर यह पक्की सूचना होती तो जरूर हो सकती थी लेकिन यह सवाल है और इसका जवाब यह भी हो सकता है कि कांग्रेस के लिए बंगाल में जोर लगाने की जरूरत ही नहीं है। उपशीर्षक में तीन बुलेट हैं, राहुल ने सिर्फ दो रैलियां कीं, प्रियंका ने नहीं की और भाजपा मुख्य निशाना है। ऐसा हो रहा है तो क्यों? समझना मुश्किल नहीं है लेकिन अखबार ने ऐसा शीर्षक लगाकर एक खुली सच्चाई को फुसफुसाहट में बदलने की कोशिश की है। चुनाव और रैली की इन खबरों के बीच अमर उजाला ने आज टॉप की खबर का शीर्षक आठ कॉलम में रखा है। इसमें यह जानकारी दी गई है कि पूरा देश तप रहा है और 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर वाले दुनिया के 100 शहरों में 92 भारत के हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया का बॉटम आज एक ही खबर है। दोनों तीन कॉलम की है और लगभग एक ही फोटो के साथ। जाहिर है, पुलिस के प्रेस नोट से बनी है। यह ऐसी खबर है जो सतर्क पत्रकारिता से छूटनी नहीं चाहिए थी और छूट गई का मतलब यही है कि रिपोर्टिंग ढंग से नहीं हो रही है। हो रही होती तो यह खबर पुलिस नहीं अखबार वाले पहले छाप चुके होते और पुलिस की कार्रवाई खबर के आधार पर हुई होती। शीर्षक है, सजायाफ्ता हत्यारा 26 साल बाद पकड़ा गया। 63 हजार फॉलोअर वाला यू-ट्यूबर बन गया था। मुझे लगता है कि यह स्वार्थी, मतलबी और डरपोक लोगों के समाज में नालायक मीडिया के साथ ही संभव है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



Kundan kumar
April 26, 2026 at 8:59 pm
Bengal ka election agar bjp ne election harne ke baad agar cancel karwa diya SIR ke bahane se toh phir bihar election ko bhi cancel karna padega.