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मंत्री के चरणों में बैठ गया आजतक एवं समाचार प्‍लस का स्ट्रिंगर!

क्‍या चैनलों के उदय के साथ पत्रकारिता के पराभव की शुरुआत हो चुकी है? देश का नंबर वन कहा जाने वाला चैनल आजतक भले ही देश भर में एक बेहतरीन न्यूज़ चैनल के रूप में जाना जाता हो, लेकिन इस ग्रुप से जुड़े लोग आए दिन इसकी छवि को धूमिल करने से बाज नहीं आते हैं. चैनल से जुड़े पत्रकार तमाम तरह के विवादों में आते ही रहते हैं, लेकिन इस बार मामला चैनल से जुड़े एक पत्रकार के मंत्री के चरणों में बैठ जाने का है. 

क्‍या चैनलों के उदय के साथ पत्रकारिता के पराभव की शुरुआत हो चुकी है? देश का नंबर वन कहा जाने वाला चैनल आजतक भले ही देश भर में एक बेहतरीन न्यूज़ चैनल के रूप में जाना जाता हो, लेकिन इस ग्रुप से जुड़े लोग आए दिन इसकी छवि को धूमिल करने से बाज नहीं आते हैं. चैनल से जुड़े पत्रकार तमाम तरह के विवादों में आते ही रहते हैं, लेकिन इस बार मामला चैनल से जुड़े एक पत्रकार के मंत्री के चरणों में बैठ जाने का है. 

तमाम चैनल आए दिन अधिकारियों के मंत्रियों-नेताओं के चरणों में बैठ जाने की घटना को बड़ी खबर बनाकर चलाते हैं, लेकिन इस बार आजतक और समाचार प्‍लस चैनल के लिए काम करने वाला पत्रकार ही मंत्री के चरणों में बैठ गया. वो भी मात्र इसलिए कि वह फोटो खिंचवा सके. यह वाकया उत्तर-प्रदेश के चंदौली जिले में घटा, जहां कसवड़ गाव में पीडब्ल्‍यूडी मंत्री शिवपाल सिंह यादव एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुचे थे. उनके साथ एक अन्‍य कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश सिंह, चंदौली जिले के पूर्व सांसद रामकिसुन यादव व अन्य कार्यकर्ता कुर्सी पर बैठे हुए थे. 

इसी बीच वहां खबर की कवरेज करने पहुचे आजतक व समाचार प्लस के स्ट्रिंगर उदय गुप्ता को पता नहीं क्‍या सूझा कि अचानक मंत्री जी के साथ फोटो खिंचाने के लिए के लिए उनके चरणों में जा बैठा. शायद पत्रकारिता का स्‍तर ऐसे लोगों के चलते लगातार गिर रहा है. फोटो खिंचवाने से ज्‍यादा शर्मनाक बात यह है कि फोटो खिंचवाने के लिए चरणों में बैठे उदय गुप्‍ता को इस बात का भी ख्‍याल नहीं रहा कि वे पत्रकार हैं और इस तरह की स्थिति ना केवल उन्‍हें बल्कि उनके चैनलों के लिए भी उचित नहीं है. 

फोटो खिंचवाना कोई अपराध नहीं है, लेकिन अगर ये फोटो चरणों में बैठने की जगह खड़े होकर खिंचवाया गया होता तो शायद बराबरी का एहसास आता, लेकिन पत्रकारिता के पतनकाल में शायद ज्‍यादा समझदारी की उम्‍मीद करना बेवकूफी है. उदय इसके पहले भी एक कोतवाल की कोतवाली बचाने के लिए मंत्री के दरबार में जा चुके हैं. जाहिर हैं उनका असली मकसद पत्रकारिता के बजाय इसकी आड़ में किए जा सकने वाले दूसरे काम ज्‍यादा हैं?

चंदौली से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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3 Comments

3 Comments

  1. देवानन्द यादव

    February 1, 2015 at 4:09 pm

    आज के जमाने में चाटुकारिता वाले ही सक्सेज है …सच्चाई से रहने पे जेल देखना पड़ता है लम्बी जांच झेलनी पड़ती है और बाद में अधिकारी कहते है नहीं आप निर्दोष है ।
    जिलें में थोड़े से विज्ञापन पे क्या खबार और क्या टीवी ज्यादातर की बोलती बन्द हो जाती है ।रही बात जब मीडिया हाऊसेस ही विज्ञापन का रुख देखकर दशा बदल रहे है तो रिपोर्टर क्या करेगा…
    चन्दौली में अनगिगत खबर है जो कि खबर नही बनती … सबसे बड़ा भष्ट्र विभाग है आबकारी जिसमें ज्यादातर भांग के ठीके में या अगल बगल गांजा बिकता है ।चलियें छोड़ियें फिर कभी ….भडास निकालूगां…

  2. abhishek

    February 1, 2015 at 5:55 pm

    मंत्री के चरण में बैठकर स्ट्रिंगर ने पकड़ बनायीं हैं आजकल मीडिया में ऐसे ही लोगों की जरुरत हैं। पत्रकार की नहीं यानी सीधी सी बात हैं आजाद भारत में गुलाम पत्रकारों की आवश्यकता हैं नाकि क्रांति लाने वालों की। और हां इलेटरेसी यानी अशिक्षा ही आज की पत्रकारिता का सवर्ण आभूषण और गहन हैं नाकि शिक्षा

  3. kuldeep shah

    February 6, 2015 at 4:28 am

    Kay yhi patrkarya hn

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