अंजना ओम कश्यप ने आलोक मेहता को डांटा- ‘मुझे आप एंकरिंग न सिखाएं’

Ashwini Sharma : आजतक न्यूज चैनल पर कल संघ विचारक राकेश सिन्हा के प्रोफेसर होने को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता रागनी नायक ने सवाल कर दिया.. राकेश सिन्हा को यह सवाल / यह कांग्रेसी हमला निजी/ परसनल लगा तो वो तिलमिला कर शो से बाहर जाने के लिए उठे और रागनी को भला बुरा कहने लगे.. Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

संबित पात्रा ‘आजतक’ न्यूज चैनल में एंकर बन गए… मुझे तो शर्म आई… आपको?

आजतक के मालिक साहब अरुण पुरी जी कहते हैं कि लोकतंत्र खतरे में हैं और मीडिया पर हमले हो रहे हैं… दूसरी तरफ वे अपने ही चैनल में एंकर की कुर्सी पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा को बिठा देते हैं. कैसा दौर आ गया है जब मीडिया वालों को टीआरपी के कारण सिर के बल चलना पड़ रहा है. टीवी वाले तो वैसे भी सत्ताधारियों और नेताओं के रहमोकरम पर जीते-खाते हैं लेकिन वे शर्म हया बेच कर नेताओं-प्रवक्ताओं को ही एंकर बनाने लगेंगे, भले ही गेस्ट एंकर के नाम पर तो, इनकी बची-खुची साख वैसे ही खत्म हो जाएगी.

गेस्ट एंकर बनाना ही था तो किसी आर्टिस्ट को बनाते, किसी डाक्टर को बनाते, किसी बेरोजगार युवक को बनाते, किसी स्त्री को बनाते, किसी ग्रामीण को बनाते… किसी खिलाड़ी को बनाते… किसी संगीतकार को बनाते… किसी साहित्यकार को बनाते… किसी रंगकर्मी को बनाते…. अपनी रचनात्मकता और बौद्धिकता के बल पर दुनिया में नाम रोशन करने वाले किसी भी भारतीय को बना लेते… नासिक से मुंबई मार्च कर रहे किसानों में से किसी एक को बना लेते… जनांदोलनों से जुड़े किसी शख्स को बना लेते…

लंबा चौड़ा स्कोप था गेस्ट एंकर बनाने के लिए… लेकिन मोदी भक्ति में लीन न्यूज चैनलों को असल में कुछ भी दिखना बंद हो गया है… उनकी सारी रचनात्मकता अब किसी भी तरह भाजपा को ओबलाइज करते रहने की हो गई है… वे जज लोया कांड पर विशेष स्टोरी नहीं बनाएंगे… कोई सिरीज नहीं चलाएंगे… वे पीएनबी बैंक स्कैम के आरोपियों से मोदी जी के रिश्ते को लेकर पड़ताल नहीं करेंगे…

वे इन सब पर बुरी तरह चुप्पी साध जाएंगे लेकिन जब अगर तेल लगाने की बात आएगी तो भांति भांति तरीके से बीजेपी वालों को तेल लगाते रहेंगे… गाना गा गा के तेल लगाएंगे… अपना मंच उनके हवाले करके तेल लगाएंगे… जियो मेरे न्यूज चैनलों के छम्मकछल्लो….

किसी भी नेता को गेस्ट एंकर बनाने की इस खतरनाक प्रथा का मैं कड़ी निंदा करते हुए अपना विरोध दर्ज कराता हूं….

वैसे, आजतक को मेरी एडवांस सलाह है कि अपने दिवालियापन को विस्तार देते हुए अगले गेस्ट एंकर के तौर पर वह मोदी जी के दो खास उद्योगपतियों में मुकेश अंबानी जी या गौतम अडानी जी में से किसी एक को बुला लें… या चाहें तो क्रमश: दोनों को मौका दे दें…  पत्रकारिता सदा अरुण पुरी एंड कंपनी की एहसानमंद रहेगी…

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

इसे भी पढ़ सकते हैं…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

आज तक के संपादक रोहित को इतना जहर बोने क्यों दे रहे हैं?

Sanjaya Kumar Singh : एक मशहूर टेलीविजन एंकर के बारे में Dilip Mandal की यह पोस्ट पढ़ने लायक है।

“जिस संपादक ने रोहित सरदाना को टीवी में पहली नौकरी दी थी, उन”के दर्द को कौन समझ सकता है. उन्हें क्या मालूम था कि रोहित में इतना जहर भरा है. रोहित तब बेहद मासूम बनकर उनके पास आया होगा. चूंकि मैं उस संपादक को जानता हूं, इसलिए उस दर्द को महसूस कर सकता हूं. अगर उन्हें पता होता कि रोहित की हरकतों से आगे चलकर समाज टूटेगा, तो रोहित को वह नौकरी कतई न मिलती. रोहित की हरकतों से लोगों के मन में नफरत भर रही है. इस दुष्कर्म का बोझ लेकर रोहित पता नहीं क्या बनना चाहता है. वह एक सम्मानित पत्रकार तो कभी नहीं बन पाएगा. हद से हद उसकी हैसियत उस बंदर की होगी, जिसके बनाए पुल पर चढ़कर सेना ने लंका की ओर प्रस्थान किया था. इतिहास तो राजा का होता है, बंदरों का इतिहास नहीं होता. रोहितों का इतिहास में कोई जिक्र नहीं होता. रोहित पत्रकारिता का तोगड़िया बनेगा और आखिर में रोएगा. लेकिन यह होने तक समाज को इसकी कीमत चुकानी होगी. इतनी कड़वाहट क्यों बो रहे हो रोहित? हो सकता है कि निजी जीवन में तुम या तुम्हारे परिवार का कोई दर्द हो. कोई शिकायत हो. लेकिन मासूमों के घर जलाकर उसकी कीमत वसूलोगे क्या? आज तक के संपादक रोहित को इतना जहर बोने क्यों दे रहे हैं? उन्हें ही क्या हासिल हो जाएगा? गाड़ी की लंबाई चार इंच बढ़ भी गई तो क्या? कौन देखता है, कौन जानता है, कौन पूछता है? टीआरपी की वासना में लोगों की जान चली जाएगी. अब तो रुक जाओ. पत्रकारिता नहीं तो इंसानियत की खातिर ही सही.”

दिलीप मंडल की इस पोस्ट के बाद हिन्दी टेलीविजन पत्रकारिता में नियुक्तियों पर यह लेख पढ़िए। इसे मैंने अपनी पुस्तक, ”पत्रकारिता : जो मैंने देखा, जाना, समझा”  www.goo.gl/xBHcEx में भी साभार उद्धृत किया है। इस आलेख की सिफारिश इसलिए कर रहा हूं कि इसके बारे में एक पाठक ने लिखा है, “जितेंद्र जी, आपने जो बयां किया उसे पोस्टर बनाकर दीवारों पर चिपकाना चाहिए”। लिंक यह रहा…

http://old1.bhadas4media.com/article-comment/12842-2013-07-07-08-49-31.html

आलेख जिसकी सिफारिश कर रहा हूं

http://old1.bhadas4media.com/print/12808-2013-07-05-13-58-10.html

हिन्दी पत्रकारिता के पतन को समझना हो तो काम आएगा। खासकर उदारीकरण के बाद के भारत में पत्रकारिता के क्षेत्र में आए लोगों के लिए।

पुनःश्च

आपकी मान्यता (जो भी है, जैसी भी है) का विस्तार होगा अगर आप उस टिप्पणी को पढ़ेंगे। मैंने दिलीप की पोस्ट को बतौर संदर्भ लिया है। लिखा भी है कि इसके बाद इस टिप्पणी को पढ़िए। – किसी ने पढ़कर कमेंट लिखा हो ऐसा नहीं लगता है। सबकी दिलीप (और रोहित के बारे में) एक तय राय है जिसपर बात करने, सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है। चूंकि जो राय बनी है वह ऐसे ही, सुनी-सुनाई बातों पर, ऊपरी जानकारी के आधार पर है इसलिए कोई और जानना नहीं चाहता – शायद पढ़ने लिखने का रिवाज ही नहीं रह गया है। या हर कोई समझता है कि ज्यादा जानने की जरूरत नहीं है। जितेन्द्र जी को पढ़िए तो सही। यह पोस्ट दिलीप की पोस्ट पढ़वाने के लिए नहीं है। हिन्दी (टेलीविजन) पत्रकारिता पर आपकी जानकारी बढ़ाने के लिए है।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह की एफबी वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

आजतक का ‘क्रांतिकारी, बहुत क्रांतिकारी’ शो सुपरहिट साबित हुआ!

सुप्रिय ने सुधीर चौधरी को उन्हीं के हथियार से पीट दिया!

टीवी न्यूज चैनलों की टीआरपी में इस बार भी आजतक नंबर वन है। आजतक का नंबर वन होना नई बात नहीं है, नई बात ये है कि टीआरपी में कुछ हफ्ते पहले आजतक के करीब पहुंच चुका जी न्यूज अब 5.4 प्वाइंट के फासले पर बहुत नीचे खिसक चुका है। आजतक की इस हफ्ते की टीआरपी 18.7 है, जबकि जी न्यूज की 13.3। इसके साथ ये भी साबित हो गया कि आजतक के मैनेजिंग एडिटर सुप्रिय प्रसाद के मुकाबले में दूर दूर तक भी किसी चैनल का संपादक नहीं है। उनकी प्लानिंग, चौकस निगाहें और टीआरपी की समझ के आगे सभी संपादक पानी मांग रहे हैं। सब कन्फ्यूज हो रहे हैं कि क्या दिखाएं, लोग क्या देखना चाहते हैं।

करीब साल भर पहले तक प्राइम टाइम में जी न्यूज ने सुधीर चौधरी के प्रोग्राम डीएनए से काफी बढ़त ली थी, लेकिन सुधीर चौधरी को सुप्रिय ने उन्हीं के हथियार से पीट दिया। अब आजतक का नौ बजे का प्राइम टाइम शो ‘खबरदार’ जी न्यूज के कार्यक्रम ‘डीएनए’ से आगे निकल चुका है। जी न्यूज ने शाम पांच बजे के रोहित सरदाना के शो-‘ताल ठोंक के’ से बढ़त ली थी। आजतक समेत तमाम चैनल 5-6 के स्लॉट में पीछे हो गए थे। सुप्रिय ने मास्टर स्ट्रोक लगाते हुए एक नया शो प्लान कर दिया-‘क्रांतिकारी, बहुत क्रांतिकारी’। दिलचस्प बात ये है कि ‘क्रांतिकारी, बहुत क्रांतिकारी’ का इस्तेमाल पुण्य प्रसून वाजपेयी ने कभी केजरीवाल के इंटरव्यू के बाद उनसे बातचीत के दौरान किया था। जिसका सोशल मीडिया ने बहुत मजाक बनाया तो जी न्यूज ने बाकायदा उस पर प्रोग्राम भी चलाया। जिसमें पुण्य प्रसून वाजपेयी के साथ साथ आजतक की भी खिंचाई की गई थी।

खैर, ‘क्रांतिकारी, बहुत क्रांतिकारी’ शो के लिए सुप्रिय प्रसाद न्यूज 24 से नवीन कुमार को ले आए। अपनी प्रखर लेखन शैली और शानदार वॉयस ओवर के जरिए इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने वाले नवीन कुमार को खुलकर खेलने का मौका मिला। ‘क्रांतिकारी, बहुत क्रांतिकारी’ शो सुपरहिट साबित हुआ। टीआरपी की रेस में रोहित सरदाना का शो पिछड़ गया। इसके अलावा सुप्रिय ने सुबह 11 बजे का नया शो नई पैकेजिंग के साथ शुरू करवाया-‘एक और एक ग्यारह’। नए दौर की एंकर्स नेहा बाथम और मीनाक्षी कंडवाल के साथ। ये शो भी अपने स्लॉट में अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों से बहुत आगे है। जी न्यूज ने घेराबंदी शाम 5 बजे से शुरू की थी, सुप्रिय ने ये काम 4 बजे से शुरू कर दिया। बिल्कुल नए कॉन्सेप्ट के साथ 5 महिला एंकर्स के साथ नया शो लांच कर दिया-पांच का पंच। यहां ये भी बता दें कि शाम 7-30 के स्पोर्ट्स बुलेटिन, रात 8 से 9 बजे के स्पेशल रिपोर्ट और रात दस बजे के पुण्य प्रसून वाजपेयी के शो दस्तक की टीआरपी हमेशा सभी चैनलों की अपेक्षा सबसे ज्यादा है और रही है। सुप्रिय ने घेराबंदी वहां लगाई, जिस चंक में बाकी चैनल या तो चुनौती देते नजर आ  रहे थे या फिर आजतक से आगे निकल रहे थे।

सुप्रिय के इसी मास्टर प्लान की वजह से आजतक ने अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को काफी पीछे छोड़ दिया था। चाहे वो एबीपी न्यूज हो या फिर जी न्यूज। इंडिया टीवी हो या फिर न्यूज नेशन या फिर इंडिया न्यूज। दरअसल सुप्रिय न सिर्फ टीआरपी मास्टर हैं, बल्कि वो अपनी टीम के एक एक बंदे की काबीलियत पहचानते हैं, उन्हें पता है कि उनका कौन सा टीम मेंबर किस चीज का माहिर है। उनकी निगाहें जहां हर खबर और हर विजुअल पर होती हैं, तो अपनी टीम के हर सदस्य पर होती हैं। अपनी टीम के लोगों की काबीलियत के के हिसाब से ही सुप्रिय फील्डिंग लगाते हैं, नतीजा सबके सामने है।

करीब छह साल पहले जब सुप्रिय प्रसाद  दोबारा आजतक गए थे, तब आजतक टीआरपी की रेस में इंडिया टीवी और एबीपी न्यूज से पिटते हुए कभी दूसरे तो कभी तीसरे नंबर पर रहने लगा था। सुप्रिय के आने के बाद से आजतक तीन हफ्तों के भीतर फिर नंबर वन हुआ, तबसे लगातार नंबर वन बना हुआ है। सुप्रिय के पीछे उनकी पूरी टीम खड़ी है। दूसरे चैनलों की परेशानी ये भी है कि कई जगह कप्तान को आजादी नहीं है तो कहीं राजनीति हावी है। इंडिया टीवी में कई कौन असली बॉस है, पता ही नहीं चलता, वहां स्वतंत्र कबीले बने हैं, जहां कोई दखल नहीं दे सकता। जी न्यूज में हिटलरशाही है, सारा फोकस सुधीर चौधरी के शो डीएनए पर होता है। एबीपी न्यूज पूरी तरह कन्फ्यूज हो चुका है और टीआरपी के लिए वो कुछ भी करने के लिए तैयार रहता है। न्यूज से बिल्कुल डिफोकस हो चुका है। इस दौर में न्यूज 24 और न्यूज 18 इंडिया (पूर्व में आईबीएन-7) इन दोनों चैनलों ने रेस में जगह बनाई है। दिग्गजों के आपसी टकराव में इंडिया न्यूज का बेड़ा गर्क हो चुका है। सुप्रिय प्रसाद की अगुवाई में आजतक कॉन्सेप्ट, प्रेजेंटेशन, फॉरवर्ड प्लानिंग और अपनी मजबूत टीम के जरिए न सिर्फ टीआरपी में बढ़त हासिल किए हुए है, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी दूसरे चैनलों को बैकफुट पर ढकेल दिया है।

इसे भी पढ़ें…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

खबरचोर आजतक डिजिटल को योरस्टोरी डाट काम ने भेजा लीगल नोटिस, एक करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा

To,
The Editor In Chief
AajTak Digital
Delhi

Subject : PLAGIARISM AND COPYRIGHT INFRINGEMENT NOTICE

1. We, YourStory Media Private Limited (“YS”), is a company registered under the Indian Companies Act 1956 with its registered office at #259, 6th Cross Rd, 2nd Main, Indiranagar, 1st Stage, Bengaluru, Karnataka 560038, that hosts and maintains various websites including www.yourstory.com amongst others. YS is India’s leading media platform for entrepreneurs, dedicated passionately to championing and promoting the country’s entrepreneurial ecosystem since 2008. We have incurred and continue to incur expenses and have put in a lot of effort and skill for the content production and publication on our website. We have an extensive network of content writers and other sources from whom the content is legitimately sourced.

2. It has come to our notice during a search that you are hosting an article on your website at the following URL(s): http://aajtak.intoday.in/education/story/adventure-tourism-guru-surbhit-dixit-1-910328.html which has been plagiarized from our website i.e. https://hindi.yourstory.com/read/379606510d/guru-intoxication-nomadic-adventure-tourism . We have ownership over the entire intellectual property rights, including copyrights, of the aforesaid contents, which you have illegally and without our proper authorization copied and have made available and accessible on your website. We have not granted you any license, authorization or permission nor have you sought the same from us, in any manner whatsoever for making our content (including photos) available on your website and, therefore, your aforesaid action is a gross violation of our rights. This act of yours is in clear violation of the provisions of Indian Copyright Act 1957, Indian Penal Code 1860 and other related and applicable laws.

3. By intentionally and deliberately posting such contents on your website without any authorization or permission from YS, you are causing undue gain to yourself and losses to YS. Your unlawful and unauthorized act of deliberately posting such contents on your website without any authorization or permission from YS has caused not only commercial and financial losses to YS but also has immensely damaged the reputation and goodwill of YS.

4. In view of such unauthorized and unlawful acts, we hereby call upon you to do the following:

a) Immediately within one day of receipt of this notice, cease and desist and refrain from reproducing, copying, displaying, making accessible or available any content /photos from any of our website(s) of which we are the owners, proprietors, publishers or copyright holders or in which we have any intellectual property rights, on your website either directly or through any links or otherwise in any manner whatsoever.

b) Pay damages amounting to the sum of Rs 1,00,00,000/- (Rupees One crore) for wrongful commercial gain to yourself and causing wrongful loss to YS within 7 days from the receipt of this notice.

c) Pay damages amounting to the sum of Rs 1,00,00,000/- (Rupees One crore) for loss of reputation and goodwill within 7 days from the receipt of this notice.

d) Confirm by email that you have carried out actions as mentioned in point (a) above by return within 3 days;

e) Confirm by email whether you also published the infringing articles in any print editions by return;

f) Undertake by email not to breach our copyright henceforth by return email.

5. Please note that, payment of the above monies by you to YS should not be construed as a permission to use our brand name.  Non-payment of the above-stated amounts within the time frame indicated above, shall entitle YS to claim interest at 24% p.a. compounded from the due date till realization. Further, we shall continue to monitor your website very closely for any  unauthorized use of our content and reserve the right to initiate legal action against you in case of any such violation  noticed in future without any further notice to you whatsoever.

6. Notwithstanding anything stated above, please note that if you do not comply within the period, we would have no option but to take appropriate legal proceeding against you and your legal representatives jointly and severally under the various provisions of Indian law, which shall be entirely at your cost and expense.

Yours Sincerely,
Grievance Officer
YourStory Media Private Limited

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

खबरिया चैनल ‘आज तक’ ने चुराया मेरा व्यंग्य कंटेंट

देश के तथाकथित सबसे तेज़ चैनल ‘आज तक’ की साहित्यिक चोरी पकड़ी गयी है. मेरा व्यंग्य लेख ‘लाल बत्ती का हैंगओवर’ रोरहिंदी डॉट कॉम पर 27 अप्रैल को पब्लिश हुआ. इसे मैंने उसी दिन अपने फेसबुक वाल पर भी लगाया. उसके ठीक चार दिन बाद यानि 1 मई को रात 9 बजे ‘आज तक’ चैनल के खबरदार कार्यक्रम में उसी व्यंग्य को उनकी एंकर श्वेता सिंह ने इसी शीर्षक से बनाए गए लाल बत्ती पर दिखाए गए कार्यक्रम में हुबहू पढ़ा.

यह एक गंभीर मामला है. लाखों के विज्ञापन लेने वाले चैनल की यह साहित्यिक चोरी बर्दाश्त के लायक नहीं है. रोरहिंदी डॉट कॉम ने चैनल आज तक के ऊपर कॉपी राईट के उल्लंघन के लिये कानूनी कार्यवाही करने का निश्चय किया है.

Alankar Rastogi

rastogi.alankar@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

‘आजतक’ निष्पक्ष है तो भाजपा की जबरदस्त जीत पर इस चैनल के न्यूज रूम में क्यों बंटी मिठाई? (देखें वीडियो)

Mayank Saxena : इस वीडियो में एक समाचार चैनल है, एक पत्रकार है; जिसको निष्पक्ष होना चाहिए…वह जाहिल एक राजनैतिक दल के जीतने पर कभी बेहद पवित्र और निष्पक्ष रही न्यूज रूम जैसी जगह पर मिठाई बांट रहा है…एक पत्रकार जिसका निष्पक्ष होने का दावा है; जिसको संघी गुंडों ने क्या-क्या न कहा, बेशर्मी से कैमरा पर मिठाई खा कर, अमित शाह को अपनी निष्ठा की दुहाई दे रहा है…10 और पत्रकार ताली बजा रहे हैं…और बजाय अपने न्यूज़रूम में मिठाई बांट रहे इस पत्रकार को नौकरी पर रखने के लिए शर्मिंदा होने के; चैनल इस वीडियो को गर्व से अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित कर रहा है।

ये पत्रकारिता का ऐतिहासिक युग है, अभी आप एक राजनैतिक दल के प्रति दंडवत हो जाने के लिए; पत्रकारों को सर पर बिठाये हैं। एक विशेष दल के समर्थक पत्रकारों को ही देशभक्त मान रहे हैं। बाद में आप इस युग को याद करेंगे, रोते हुए…कि वो जो इस दौर में भी सर उठाये और रीढ़ सीधी करे खड़े थे…आपने उनको गाली दी और धीरे-धीरे परिदृश्य से ही बाहर कर दिया। न सदन में विपक्ष बचा और न ही पत्रकारिता में…ये ऐतेहासिक युग के तौर पर याद किया जाएगा, क्योंकि तब आपको बचाने वाला कोई नहीं होगा। सिर्फ ये मिठाई बांटने वाले पत्रकार होंगे…दरअसल तब मिठाई खाने वाले पत्रकार भी नहीं बचेंगे…जो बचेंगे, उनको ज़बरन मिठाई खानी पड़ेगी!!

रामराज्य मुबारक़ हो, पत्रकारिता का भस्मासुर युग मुबारक़ हो!!!

वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=rH__gndxcFA

युवा पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट मयंक सक्सेना की एफबी वॉल से… उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं….

Shahid Khan : I did not find anything wrong in this video particularly Rajdeep conduct. Please note Rajdeep is just an employee any by accepting laddo he has shown he has big heart. Anjana om kashyap conduct is questionable.

Pashupati Jha : खुशियां मानते हुए आधुनिक पॉलीटिक्स की आधुनिक परिभाषा भी बता रहे हैं। Politics is about messaging…..it’s about road shows…it’s about social media…it’s about sending out simple messages.

Kashyap Kishor Mishra : एक पत्रकार को निष्पक्ष होना चाहिए पर निष्पक्षता की सान भी तो निरपेक्ष हो, यदि दक्षिणपंथी राजनितिक रूझान का प्रदर्शन जाहिल हरकत है तो एक पत्रकार का अपना वामपंथी रूझान प्रदर्शित करना भी उतनी ही जाहिल हरकत है

Mayank Saxena : न्यूज़रूम में या ऑन ड्यूटी कैसा भी रुझान प्रकट करना ग़लत है। लेकिन आप अगर पत्रकार के तौर पर साम्प्रदायिकता के विरोध की बात कर रहे हैं या बिना वजह इसमें वाम को घसीटने की प्रवृत्ति के कारण ये लिख रहे हैं, तो आप भी जानते हैं कि आप क्या कर रहे हैं। ज़रा दिखाइए कि कब किस वामपंथी पत्रकार ने ऐसे लड्डू बांटे हैं, टीवी पर खड़े हो कर वाम का समर्थन किया है?

Shakti Singh Bhabor : राजदीप सरदेसाई पक्का जाति समर्थक है। प्रभु, पर्रिकर, गडकरी, जावडेकर के मंत्री बनने पर इन्होंने ट्वीट कर कहा था कि अब सरकार सही हाथो में है।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

आजतक की अहमदाबाद ब्यूरो चीफ गोपी घांघर को पता था यूपी में भाजपा 300 से उपर सीट लाएगी!

Vikas Mishra : ये हैं गोपी घांघर। अहमदाबाद में हमारे चैनल की ब्यूरो चीफ। लंबे वक्त से गुजरात की राजनीति को करीब से देख रही हैं। पिछले दिसंबर महीने में एजेंडा आजतक में आई थीं, तब गोपी ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सीटों का आकलन किया था। गोपी ने कहा था कि मोदी और अमित शाह यूपी में करामात करने वाले हैं, बीजेपी को तीन सौ के आसपास सीटें मिलेंगी।

मैंने कहा कि यहां तो बहुमत मिलता नहीं दिख रहा। कुछ तर्क भी रखे मैंने। गोपी बोली-आप तर्क की बात कर रहे हैं, मैंने मोदी को गुजरात में 12 साल देखा है, मैं मोदी को जानती हूं। खैर, चुनाव के बाद यहां मेरे दफ्तर में सीटों के आकलन को लेकर शर्तें लग रही थीं। गोपी मुझसे बार-बार कह रही थी कि आप कम से कम 280 सीटों पर दांव लगाइए। मैंने डरते-डरते बीजेपी को 209 सीटें दी थीं। अब नतीजे आए तो गोपी सौ फीसदी सही साबित हुई। मान गए गोपी Gopi Maniar आपके आकलन को।

आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत टीवी पत्रकार विकास मिश्र की एफबी वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से एक प्रमुख कमेंट इस प्रकार हैं….

Sanjay Dave गोपी मणीयार घांघर को मैं २००२ से जानता हूं, एक ही शहर के होने के नाते कई बार रीपोर्टिंग भी साथ साथ कि है, स्टोरी और स्थल कोई भी हो गोपी के अन्दर हंमेशा एक अलग सा आत्मविश्वास देखा है । मुझे बराबर याद है २००८ दिपेश-अभिषेक मौत मामला समय अहमेदाबाद स्थित आसाराम आश्रम कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों के उपर आसाराम के गुंडों ने अचानक किए हमले समय प्रेग्रन्ट होने के बावजूद स्टोरी करने आई गोपी ने अपने शरीर के उपर लाठीया खाई लेकिन डटी रही पीछे नहीं हटी। हम सबको गोपी मणीयार-घांघर के उपर गर्व है ।

Vikas Mishra सही कहा आपने, गोपी हमारी जांबाज सेनानी है।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अखिलेश यादव संग साइकिल चलाते राहुल कंवल का चमचई भरा इंटरव्यू पेड न्यूज़ ही तो है!

अखिलेश यादव के साथ साईकिल चलाते हुए ‘आज तक’ के राहुल कंवल का आधा घंटे का चमचई भरा इंटरव्यू करना क्या पेड न्यूज़ में नहीं आता? साईकिल पर ही बैठे हुए डिंपल यादव का इंटरव्यू करना भी। गोमती रिवर फ्रंट का भी प्रचार। [वैसे गोमती रिवर फ्रंट बहुत सुंदर बना दिख रहा है।]

याद कीजिए बीते विधान सभा चुनाव में चुनाव आयोग के निर्देश पर मायावती की बसपा के चुनाव निशान हाथी को सभी पार्कों में ढंक दिया गया था, लखनऊ से लगायत नोयडा तक। अलग बात है मायावती की बसपा बहुमत से बहुत दूर रह गई। इस बार भी पेट्रोल पंप पर से मोदी की फ़ोटो चुनाव आयोग ने हटवा दीं। ज़िक्र ज़रुरी है कि साईकिल समाजवादी पार्टी का चुनाव निशान है और कि आज तक की दिल्ली से आई टीम हफ़्ते भर से लखनऊ में डेरा डाले हुई है।

आज तक के मालिक अरुण पुरी और चैनल के पत्रकार राहुल कंवल, अंजना ओम कश्यप, जावेद अंसारी आदि समूची कैमरा टीम सहित सभी उपस्थित हैं। दिलचस्प यह कि अखिलेश यादव का इंटरव्यू खत्म होते ही उन के पिता मुलायम सिंह यादव का गुडी-गुडी वाला इंटरव्यू भी आधा घंटा का शुरू हो गया है जब कि मुलायम परिवार की एकता दौड़ का विश्लेषण अगला कार्यक्रम है। ऐसे ऐलान की एक पट्टी चल रही है। एक पुराना फ़िल्मी गाना है, क्या प्यार इसी को कहते हैं? की तर्ज़ पर पूछा जा सकता है क्या पेड न्यूज़ इसी को कहते हैं?

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार दयानंद पांडेय की एफबी वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

यूपी के मुसलमान, आजतक चैनल और एंकर अंजना कश्यप

Arun Maheshwari : यूपी के मुसलमान और ‘आज तक’… ‘आजतक’ चैनल की एक एंकर है अंजना कश्यप। हमेशा वीर रस वाले भाव बोध में रहने वाली -‘दुर्गा वाहिनी’ वालों का तेवर लिये हुए। आज वे यूपी की राजनीति में मुसलमानों के बारे में एक रिपोर्ट पेश कर रही थी। मुसलमान देश के अन्य सभी तबक़ों से कितने पिछड़ गये हैं, इसके तमाम आँकड़े रख रही थी।

जैसे प्रधानमंत्री मोदी यूपी वालों की चर्चा करते हैं तो उनमें एक अजीब सा हिक़ारत का भाव छा जाता है। आपको लगेगा कि जैसे यूपी के लोगों जितना अधम प्राणी इस धरती पर कोई नहीं है! ये गुंडे हैं, हत्यारें और बलात्कारी हैं। हर लिहाज से पिछड़े हुए- ख़ास तौर पर उनके गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान से तो बुरी तरह पिछड़े हुए! प्रधानमंत्री का यूपी के लोगों के साथ खेला जा रहा यह एक अनोखा मनोवैज्ञानिक खेल है। पहले आदमी को हीनता-ग्रंथी में डालो और फिर उस दबे हुए आदमी पर शासन करो।

‘आज तक’ चैनल पर अंजना जी का तेवर भी ऐसा ही था। इन्हीं अंजना जी को आप अक्सर मुस्लिम तुष्टीकरण के लिये सेकुलर पार्टियों को लताड़ते हुए देख सकते हैं। इसी से पता चलता है कि मुसलमानों की दुर्दशा से इनके मन में उनके प्रति कोई सहानुभूति पैदा नहीं होती है और न ही व्यवस्था के प्रति कोई ग़ुस्सा। इनका उद्देश्य सिर्फ मुसलमानों की छवि को बदतर दिखाने का होता है।

ईमानदारी का तक़ाज़ा तो यह है कि मुसलमानों की इस बुरी दशा को देख कर उन्हें मुस्लिम तुष्टीकरण की तरह की बात करने वालों को कठघरे में खड़ा करना चाहिए। माँग करनी चाहिए कि अल्प-संख्यकों के उत्थान की विशेष योजनाएँ बने। उन्हें सांप्रदायिक उपद्रवियों के खौफ से पूरी तरह मुक्त किया जाए। सांप्रदायिक ज़हर फैलाने वालों को दंडित किया जाए। लेकिन ये तो उल्टे ‘तुष्टीकरण’ का राग अलापने वालों की सेवा में लगी रहती है!

साहित्यकार अरुण माहेश्वरी की एफबी वॉल से. उपरोक्त पोस्ट पर आए कमेंट्स में से कुछ प्रमुख यूं हैं :

Uday Prakash किसी चेहरे पर जब ऐसी छपी हुई सतत हिक़ारत हो और आवाज़ के भीतर हर पल कौंधती आग, वह चेहरा किसी मनुष्य का तो लगता नहीं। स्त्री, पुरुष, हिंदू-मुसलमान, पत्रकार-पुलिस, संघी या कम्युनिस्ट, ब्राह्मण या दलित तो बहुत दूर की बात है।

Vasudev Sharma आपको हर ऐसे गैरे पर शब्दों की पूंजी नहीं लुटानी चाहिए. मीडिया में अंजना जैसों की बडी जमात है जिन्हें कुछ भी कहलवाने के लिए तैनात किया गया. अंजना के साथ एक और हैं श्वेताजी. कभी कभी इन दोनों में होड़ भी होती गिरने की

Ish Ish इन बिके हुए पत्रकारों का लगातार भंडाफोड़ करते रहने की जरूरत है.

Suresh Swapnil ‘ब्राह्मण की बेटी’ है, भाई जी। चैनल के मालिकान को भी आजकल अपनी ब्रह्म-ग्रंथि याद आने लगी है।

Vidya Sagar Singh पूण्य प्रसून वाजपेयी के बारे में क्या ख्याल है? आपलोग विरोधी बातो को क्यों नहीं स्वीकार कर पाते हैं। आपको क्यों लगता है कि सारे एंकर रवीश कुमार और वाजपेयी की भाषा बोलेंगे?

Arun Maheshwari नहीं। हर किसी को अपनी राय रखने का पूरा हक़ है। हमें भी हर किसी के बारे में अपनी राय बनाने का हक़ है।

Asghar Wajahat दरअसल इन लोगों का उद्देश्य समस्या का समाधान नहीं बल्कि लोगों को भड़का कर दंगा फसाद की स्थिति पैदा करना है यह समझते हैं की इनका भला उसी में है

Devendra Yadav चैनल की खासियत है कि वह प्रधान सेवक के खिलाफ बोल सुनना बर्दाश्त नहीं कर पाता. बोलने वाले के सामने से चोंगा तुरन्त हटा लिया जाता है.

Ajay Kumar यही नहीं और चैनल व पत्रकार हैं ज़िन्हें सुनकर ही लोग बता देते हैं कि ये राष्ट्रभक्ति का प्रमाणपत्र बांटने वाली पार्टी का विज्ञापन कर रहे है वही इन्हे लगता है कि आम जन मानस इनको बहुत बुद्धिमान समझ रहा है लेकिन इन्हे लोग सत्ता का एजेंट कहते है. इन लोगों ने लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को खोखला कर दिया है.

Subhas Chandra Ganguly कई चैनल सत्ता पक्ष का माउथपीस बन गया है। यह चैनल भी मैंने देखना बंद कर दिया है।

Obaid Nasir सर अजीब ज़माना है जो जितना बदतमीज़ वह उतना ही कामयाब

Kailash Manhar पतंजलि से प्रायोजित कार्यक्रम में यह सब करना जरूरी है

Omendra Jaipur आप चिंता ना करें ये हार रहे हैं, चोकीदार इसीलिए बोखला रहा है जी

Mahesh Saraswat संघी मानसिकता वाले चेनल्स के मुसंघी एंकर

Rajesh Kamaal मुस्लिमों का रोना रोने वालों ने कौनसा भला किया है.

Vaibhav Maheshwari बड़ी चिल्लाने वाली महिला है ये, पत्रकार की खाल में। मेरा 6 साल का बेटा एक दिन बोला कि प्लीज़ चैनल बदल दो, ये फालतू में चीखती बहुत है।

Subhash Singathiya Arun jee! Anjana jee ke baare mein aapkee raay bilkul durust hai jee, vaise bhee ye mahodaya pricharcha pesh karte samay anchor kam aur BJB kee pravakta jyada lagti hain jee. khair..

DrSushil Chaudhary सर आजकल उसे देखता ही नहीं हूँ । एक प्रोग्राम में जो नेता थे उसे बोल रही थी लोग भी क्या सोच रहे होंगे किस पागलों को देख रहा हूँ ।

Giriraj Kishore kal PM ki latad congress ke liye hi nahi thi, sab samajh len, dabang agaya hai, Anjnaj i samajhdar haun.

Arvind Varun मोदी सरकार इनके पति को क्रीम पोस्टिंग दे चुकी है।

Ashutosh Tripathi मै तो वीर रस वालों को देखता सुनता ही नही। वीर रस वाले मीडिया कर्मी न तो देश का भला कर रहे है और न अपने पेशे का।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

आजतक पर श्वेता की यह क्या खबू एंकरिंग है!

Jaishankar Gupta : क्या ऐंकरिंग है। खुद को नंबर एक कहने और सबसे आगे रहनेवाले टीवी चैनल पर यूपी में पहले चरण के मतदान पर चर्चा के दौरान 4.12 बजे ऐंकर द्वारा मथुरा में मौजूद रिपोर्टर संजय शर्मा से मतदाताओं की प्रतिक्रिया पूछने और रिपोर्टर द्वारा एक मतदाता के हवाले यह बताने पर कि युवा बड़े उत्साह के साथ भाजपा के पक्ष में मतदान कर रहे हैं, बड़े चाव के साथ दिखाया गया। संजय ने वरिष्ठ पत्रकार शशिशेखर के पूछने पर भी बताया कि गोलबंदी भाजपा के पक्ष में साफ दिख रही।

उनकी यह टिप्पणी भी श्वेता को नहीं अखरी।

लेकिन जब बालकृष्ण ने मुजफ्फरनगर से बताना शुरू किया कि लोकसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में मतदान करनेवाले जाट किसान इस बार उसके विरोध में और रालोद के पक्ष में मतदान कर रहे हैं, यह चिंता किए बगैर कि उसका उम्मीदवार हारे या जीते। दूसरी तरफ अल्पसंख्यक सपा कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में एक तरफा मतदान कर रहे हैं। बसपा के मुस्लिम उम्मीदवार भी उनके मतों में विभाजन नहीं कर पा रहे, यह सुनते ही श्वेता के जैसे कान खड़े हो गये। उन्हें इलहाम हुआ कि मतदान जारी रहते कोई आचार संहिता भी होती है। उन्होंने बालकृष्ण और फिर अन्य संवाददाताओं से भी कहा कि किसी दल का नाम न लें और ना ही किसी मतदाता को भी यह बताने को कहें कि उसने किस दल को वोट दिया है। अब भी मीडिया की निष्पक्षता पर कोई सवाल?

वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त की एफबी वॉल से. उपरोक्त पोस्ट पर आए कई कमेंट्स में से कुछ प्रमुख यूं हैं :

Nadeem Ahmad Kazmi Sir..journalist are becoming party to their political leanings…dangerous trend. you may have your leanings but it should not be as open as these anchors do.

Suraj Kumar Singh सर…..मीडिया संस्थान में हमें पढ़ाया गया था कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एजेंडा सेटर है इसलिए इनका सब माफ़। अब ये अलग बात है कि वह किसका एजेंडा सेट कर रहा है और क्यों कर रहा है। रही बात आचार संहिता और चुनाव आयोग की तो परिवर्तन के नाम पर वर्तमान भारत में अच्छे-अच्छे संस्थान का ढांचा बदल दिया गया है तो तो फिर? वैसे एंकर को पता है कि यूपी चुनाव में किसका एजेंडा सेट करना है। पार्टी हार गई तो भी चैनल की चित और हार गयी तो भी चित।

Rajkeshwar Singh जयशंकर जी, सब तो नहीं लेकिन एक तबक़ा अब यह ठीक से परखने लगा है कि किस मीडिया की आस्था किस पार्टी में है। देश में चैनल पर ज़ोर ज़ोर से एंकर के चिल्लाने की परंपरा शुरू करने वाले पत्रकार के बताए रास्ते पर कई नए एंकर चल पड़े हैं और ‘nation wants to know’ पर वे वैसे डटे हैं जैसे उनकी आस्था है। एक मित्र व 30 साल से सक्रिय पत्रकार का ताज़ा आंकलन इस चुनाव में एक गठबंधन को 65-70 सीट से ज़्यादा नहीं मिलेगी– दूसरे पत्रकार मित्र 20 दिन से फ़ील्ड पर हैं, उनका आंकलन उस गठबंधन को 230 तक सीटें मिल सकती हैं।

Ghanshyam Dubey दरअसल ये संवाददाता रेनकोट पहन लर रिपोर्टिंग कर रहे थे। एंकरिन ने कोट पहना, फिर नाम न लेने को कहा। यानी काम कर दिया बस!

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

आजतक वाली श्वेता सिंह की मूर्खता का वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल, आप भी देखें

टीवी जर्नलिस्ट कई बार ऐसी मूर्खता कर जाते हैं कि उसे देख गुस्सा के साथ साथ जोरदार हंसी भी आती है. ताजा मामला श्वेता सिंह का है जो आजतक न्यूज चैनल की एंकर और रिपोर्टर हैं. खुद को बेहद काबिल मानने वाली इस महिला एंकर ने ऐसी मूर्खता की है कि लोग खूब मजे ले लेकर वीडियो देख रहे हैं और हंस रहे हैं. कायदे से आजतक प्रबंधन को इस गल्ती के लिए श्वेता सिंह को बर्खास्त कर देना चाहिए, साथ ही उस रिपोर्टर को भी जिसने ये फर्जी सूचनाएं श्वेता तक पहुंचाईं.

वैसे आजकल जिस तरह से आजतक विशुद्ध भगवा रंग में रंगा हुआ है, वह बहुतों को चिंतित कर रहा है. लगता है चैनल के मालिक अरुण पुरी को ठीकठाक सरकारी डोज दे दी गई है या चैनल के प्रबंध संपादक सुप्रिय प्रसाद को मोदी सरकार ने कायदे से ओबलाइज कर दिया है जिसके कारण वह भी अर्णव गोस्वामी के नक्शेकदम पर चल पड़े हैं और पूरे चैनल को भगवा रंग में रंगने लगे हैं. तभी तो आजतक चैनल को नोटबंदी के कारण बैंककर्मियों की पीड़ा तो खूब दिखाई दे रही है लेकिन आम जन की पीड़ा कतई नहीं दिखाई दे रही.

आजतक की एक महिला एंकर अंजना ओम कश्यप तो भाजपा प्रवक्ता की तरह बार बार कहती रहती हैं लाइव कि बस कुछ दिन और इंतजार कर लें, सब ठीक हो जाएगा. वे नोटबंदी के दिन से ही इस निर्णय के पक्ष में अटल अडिग दिख रही हैं और अपने पूर्वाग्रह को केंद्र में रखकर बहस विमर्श संचालित करती हैं जिससे पूरा शो मोदी परस्त हो जाता है. यहां तक कि दूसरे पार्टियों के लोगों को इसी चैनल पर लाइव कहते देखा गया है कि आजतक भगवा रंग में रंग चुका है.

लगता है जैसे आजतक के सभी एंकरों की ट्रेनिंग खुद मोदी ने ली हो. अगर इन पत्रकारों में थोड़ी भी पत्रकारिता जिंदा हो तो एक बार फिर से पत्रकारिता की किताबें पढ़कर समझ लेना चाहिए कि आखिर पत्रकारिता किसके लिए की जाती है, सत्ता भी भाषा बोलने के लिए ये आम जनता की पीड़ा दिखाने बताने के लिए. सोशल मीडिया पर वायरल श्वेता सिंह के वीडियो को डाउनलोड कर भड़ास के एफबी पेज पर अपलोड कर दिया गया है. इसे देखने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें :

https://www.facebook.com/bhadasmedia/videos/1070955059669585

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

आजतक के ‘सर्वे’ पर सवाल उठाने वाली पोस्ट सोशल मीडिया पर हुई वायरल

इन दिनों सोशल मीडिया ने बड़े से बड़े मीडिया हाउस को घुटने के बल बैठने को मजबूर कर दिया है. आप झूठ दिखाएंगे या डील के हिसाब से शो पेश करेंगे तो सोशल मीडिया पर उसके खिलाफ एक आवाज तो उठ ही जााएगी. जब एक आवाज उठाएगा तो उसके संग समान धर्मा सोच वाले हजार जुट जाएंगे और देखते ही देखते पोस्ट वायरल हो जाएगी. पंजाब में आम आदमी पार्टी को 46 सीट मिलने वाले आजतक के सर्वे पर किन्हीं मनोज सिंह गौतम नामक शख्स ने एक पोस्ट अपडेट की है जो वायरल हो गई है.

इस पोस्ट में एक तस्वीर है जिसमें आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप को दिखाया गया है और बगल में लिखा हुआ है कि ”जब आजतक ने 6 सीट दिखाई थी तो 28 आई, जब 30 सीटें दिखाता था तो 67 आई… अब 46 दिखा रहा है… मुबारक हो दोस्तों, 110 से उपर ही आएगी….”इस तस्वीर के साथ जो स्टेटस है उसमें लिखा गया है- अंजना ओम कश्यप के पति को मोदी जी ने सीवीओ बना दिया है तो इससे सच्ची खबरों की अपेक्षा कैसे कर सकते हैं”.

लेकिन कोई इन मनोज सिंह गौतम को बताए कि अंजना ओम कश्यप आजतक चैनल की मालकिन नहीं हैं. अंजना वहां नौकरी करती हैं. इसलिए वे या उनके पति आजतक के सर्वे को प्रभावित नहीं कर सकते. सर्वे स्वतंत्र एजेंसीज से कराया जाता है. ये बात सही है कि हाल के दिनों में सर्वे एजेंसीज एजेंडा लेकर काम करती हैं और सत्ताधारियों के प्रति साफ्ट कार्नर रखती हैं क्योंकि उन्हें फंडिंग वगैरह काफी दे दी जाती है. लेकिन वहीं यह भी सच है कि कुछ सर्वे एजेंसीज बिलकुल सच्चाई से काम करती हैं. आज के दिनों में जब सारै चैनल मोदी मय हो चुके हैं, आजतक से ये उम्मीद करना कि वह तटस्थ रहेगा, बेमानी है. सारे मीडिया हाउस आजकल प्राफिट हाउस में तब्दील हो चुके हैं और वे रेवेन्यू के लिए सत्ता से गठजोड़ किए रहने को मजबूर हैं.

यशवंत सिंह

संपादक

भड़ास4मीडिया डाट काम

संपर्क : +91 9999330099 ! yashwant@bhadas4media.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

‘आजतक’ ने अरनब को मोदी का चमचा बताने वाले ट्वीट के लिए मांगी माफी

पीएम नरेंद्र मोदी के अंग्रेजी चैनल टाइम्‍स नाऊ को दिए इंटरव्यू का मजाक उड़ाती एक फोटो, जिसमें लिखा अरनब को मोदी का चमचा बताया गया है, को आजतक चैनल की तरफ से ट्वीट किए जाने के बाद से बवाल बच गया. यह फोटो न्‍यूज चैनल ‘आज तक’ के टि्वटर हैंडल से शेयर हुआ. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने ‘आज तक’ को आड़े हाथों लेते हुए जमकर निशाना साधा. बहुत सारे सोशल मीडिया यूजर्स ने आरोप लगाया कि उनके चैनल को इंटरव्यू का मौका न मिलने की वजह से वे यह अनाप शनाप बिलो द बेल्ट ट्वीट कर रहे हैं.

आज तक के ऑफिशियल टि्वटर अकाउंटर से मंगलवार को एक फोटो शेयर हुई. इस तस्‍वीर का कैप्‍शन है, ‘Ahem Ahem! Yuki ye maine nahi bola:)’ इसमें ऊपर के फ्रेम में अरनब गोस्‍वामी और पीएम नरेंद्र मोदी आमने-सामने नजर आते हैं. नीचे के फ्रेम में मोदी इंडिया टुडे के एंकर करन थापर के साथ दिखते हैं. अरनब और मोदी वाली तस्‍वीर में लिखा है, ‘जब एक चमचा इंटरव्यू लेता है।’ वहीं, थापर वाली तस्‍वीर में लिखा है, ‘जब एक जर्नलिस्‍ट इंटरव्यू लेता है.’

दरअसल, दूसरे फ्रेम की तस्‍वीर मोदी के एक पुराने इंटरव्यू की है, जो थापर ने लिया था. इस इंटरव्यू को मोदी बीच में छोड़कर चले गए थे. इसमें थापर ने गुजरात दंगों से जुड़े कुछ सवाल पूछे थे. मोदी इंटरव्यू के दौरान पानी पीते नजर आए थे. मोदी विरोधियों का कहना है कि वे थापर के सवालों से असहज हो गए और बाद में इंटरव्यू बीच में ही छोड़ दिया. 

बाद में आजतक ने अपनी सफाई में कहा कि यह फोटो किसी के पर्सनल अकाउंट से ट्वीट की जानी थी, लेकिन वो गलती से ‘आज तक’ के अकाउंट से शेयर हो गया, लेकिन इस गलती के लिए बार बार माफी और अब यह ट्वीट डिलीट किया जा रहा है.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

‘आजतक’ की पंचायत और मुख्तार अंसारी की पार्टी का सपा से निकालना एक फिक्स स्क्रिप्ट!

मेरे तजुर्बे के अनुसार मुख्तार अंसारी की पार्टी का समाजवादी पार्टी में शामिल किया जाना, विवाद होना और तय प्लानिंग के तहत ‘आजतक’ चैनल की पंचायत में मुख्यमंत्री द्वारा मुख्तार अंसारी की पार्टी को सपा से बाहर का रास्ता दिखाना एक फिक्स स्क्रिप्ट है. मैंने बहुत दिनों तक तो नहीं, 7 साल टीवी की दुनिया में काम किया है. इन सबके साथ काम किया है जो आज का कार्यक्रम चला रहे थे. क्षेत्रीय चैनल से लेकर राष्ट्रीय चैनल में काम किया. अन्दर का खेल देख मन भर गया. यहाँ पत्रकारिता नहीं है, केवल चकाचौंध है.

मेरा तजुर्बा यह कहता है कि अरुण पुरी भी दिल्ली से आकर लखनऊ में इस क्षण के लिए मौजूद थे जब मुख्यमंत्री ने यह एलान किया. अगर आपने कार्यक्रम को ठीक से देखा हो तो ध्यान दीजिये. पुण्य प्रसून बाजपेयी जब जनता से सवाल पुछवा रहे थे उसके बाद राहुल कँवल को आवाज लगाकर सवाल पूछने के लिए कहते हैं. ये आखिरी सवाल था जो मुख्यमंत्री से पूछा गया और टीवी ने ब्रेकिंग चलाई. सब कुछ तय था.

मुख्तार अंसारी का सवाल कौन पूछेगा? मुख्यमंत्री कब जवाब देंगे और उनका एपिसोड खत्म हो जायेगा. ध्यान दीजिये. ये टीवी की दुनिया बहुत भूलभुलैया है. आज ये हुआ है. अब ऐसे ही एपिसोड भाजपा के भी देखने को मिलेंगे. राजनीति और टीवी दोनों सहचरी है. अब इसका सौदा कितने में हुआ होगा, ये पता लगाने और अंदाजा लगाने की बात है. वैसे छवि सुधारने के लिए 100 करोड़ की रकम आज के दौर में कुछ भी नहीं.

लेखक पंकज दीक्षित फर्रुखाबाद के टीवी जर्नलिस्ट हैं. उनसे संपर्क akanksha47@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

इसे भी पढ़ें…

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

आजतक में कार्यरत शम्स ताहिर खान, रेहान अब्बास, मुहम्मद अनस जुबैर और शादाब मुज्तबा की फेसबुक पर क्यों हो रही है तारीफ, आप भी पढ़िए

Vikas Mishra : मेरे दफ्तर में शम्स ताहिर खान, रेहान अब्बास, मुहम्मद अनस जुबैर, शादाब मुज्तबा हैं, उच्च पदों पर हैं ये लोग, बेहद जहीन। जानते हैं कि इनमें एक समानता क्या है, इन सभी की एक ही संतान है और वो भी बेटी। वजह क्या है, वजह है इनकी तालीम, इनकी शिक्षा। क्योंकि इन्हें पता है कि जिस संतान के दुनिया में आने के ये जरिया बने हैं, उसके पालन-पोषण में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। इन्हें नहीं रटाना है कम संतान-सुखी इंसान।

मेरे गांव में मेरे हमउम्र दयाराम के आठ बच्चे हैं। मेरे खुद दो सगे भाई और तीन बहनें हैं। मेरे लखनऊ के एक साथी पत्रकार के 11 मामा और चार मौसियां हैं। सुभाष चंद्र बोस अपने पिता की नौवीं संतान थे। इसके बाद भी प्रोडक्शन जारी था, 14 भाई बहन थे। तो दूसरे की संतानों की तादाद गिनने से पहले जरा अपना भी इतिहास देख लेना चाहिए। अभी हाल में मैंने एक चुटकुला पढ़ा था कि एक कलेक्टर साहब गांव में नसबंदी के लाभ बताने पहुंचे थे। एक ग्रामीण ने पूछा-साहब आपने नसबंदी करवाई है? साहब बोले-नहीं, हम पढ़े-लिखे हैं। ग्रामीण बोला-तो साहब हमें भी पढ़ाओ-लिखाओ, नसबंदी करवाने क्यों आ गए।

फेसबुक पर लिखने वाले तमाम लोग विद्वान हैं, जानकार हैं, लेकिन अपनी विद्या का इस्तेमाल नफरत फैलाने में ज्यादा कर रहे हैं। हिंदू हो या मुस्लिम, दोनों समुदाय की मूल समस्या है शिक्षा। जो पढ़कर आगे बढ़ गए, वो भी शिक्षा के लिए प्रेरित नहीं करते, बल्कि अपने ही समुदाय के उन लोगों का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें अक्षर ज्ञान हो गया है और जो सोशल मीडिया पर फेंका उनका कचरा उठाकर अपने दिमाग में डालने के लिए अभिशप्त हैं। दो समुदाय जो इंसानियत के तकाजे से एक-दूसरे के करीब आ सकते हैं, उन्हें बरबस ये दूर करना चाहते हैं। मुस्लिम समुदाय के अच्छे लिखने वाले अपने ही सहधर्मियों को बरगला रहे हैं। उनके अपने घर में अपनी बेटी तो डॉक्टरी-इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है। लेकिन फेसबुक पर वो ‘मोदी की डियर’ पर मौज ले रहे हैं।

कोई मुस्लिम अगर इस्लाम या कट्टरता के खिलाफ अगर कोई पोस्ट लिखता है तो उसमें कमेंट करने वालों में हिंदू लोगों की भरमार होती है, जो उस पोस्ट का स्वागत करते नजर आते हैं। उस पोस्ट के कमेंट्स में मुस्लिमों की तादाद भी होती है। या तो वो अपने उस साथी को गालियां दे रहे होते हैं या फिर कुछ ऐसे भी होते हैं जो पोस्ट का समर्थन कर रहे होते हैं। ठीक इसी तरह, जब कोई हिंदू कट्टर हिंदुत्व और धर्म के नाम पर फैले अंधविश्वास के विरोध में कुछ लिखता है तो उस पोस्ट पर मुस्लिम साथियों के कमेंट थोड़े से आते हैं, अगर पोस्ट पब्लिक है तो फिर उस पर हिंदू धर्म वालों की गालियां पड़नी तय है। मेरी फ्रेंडलिस्ट में भी ऐसे साथी हैं, जिनमें से कुछ कभी परशुराम के भक्त बन जाते हैं, तो कभी देखते ही शेयर करें वाली तस्वीरें भेजते हैं, बेवजह मोदी-मोदी करते रहते हैं।

व्हाट्सएप के ग्रुप में तो कई मूर्खतापूर्ण मैसेज चलते रहते हैं। और हां, फेसबुक पर कई मुस्लिम मित्र जान बूझकर बड़े शातिराना तरीके से पोस्ट लिखते हैं। आरएसएस पर हमला करने की आड़ में हिंदुओं की ‘बहन-महतारी’ करते हैं। कई लोग मुझसे फोन करके कह चुके हैं कि ये आदमी आपकी फ्रेंडलिस्ट में क्यों है ? दरअसल ऐसी पोस्ट का अंजाम क्या होता है, मैं बताता हूं। उसमें एक मुसलमान लिखता है, बाकी मुसलमान पढ़ते हैं, वाह-वाह करते हैं, कई हिंदू पढ़कर कुढ़कर रह जाते हैं, कुछ से रहा नहीं जाता तो पोस्ट पर पहुंचकर तर्क-वितर्क करना शुरू करते हैं, तो वहीं कुछ सीधे ‘मां-बहन’ पर उतारू होते हैं। ‘मां-बहन’ करने वाले दोनों तरफ हैं। कोई डायरेक्ट परखनली से पैदा नहीं हुआ है, सबके घर में मां-बहन हैं।

दरअसल सोशल मीडिया को कई लोग अपने अपने तरीके से यूज कर रहे हैं। असली मुद्दे पर कोई आना नहीं चाहता। अपने मजहब वाले सही बात नहीं सिखा रहे हैं, सिर्फ डरा रहे हैं। दूसरे मजहब वालों से वो सीखना-पढ़ना चाहेंगे नहीं। खासतौर पर ये मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ ज्यादा हो रहा है, यही वजह है कि भारत में पाकिस्तान से ज्यादा मुसलमान हैं, लेकिन एक भी मुसलमान उनका सर्वमान्य नेता नहीं बन पाया। क्षेत्रीय स्तर पर आजम, ओवैसी उभरे, लेकिन इन्होंने भी तो मुसलमानों का सिर्फ इस्तेमाल ही किया है।

आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत पत्रकार विकास मिश्र के एफबी वॉल से यह मैटर कापी कर भड़ास पर प्रकाशित किया गया है.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

संजीव पालीवाल, जमशेद खान और सुशांत पाठक पहुंचे ‘आजतक’

आईबीएन7 से कार्यमुक्त होने के बाद कई चैनलों से होते हुए संजीव पालीवाल को अब जाकर सही ठिकाना मिला है. उन्होंने ‘आजतक’ में बतौर एग्जीक्यूटिव एडिटर ज्वाइन कर लिया है. वे आजतक की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा रह चुके हैं. अभी वो लाइव इंडिया चैनल में थे जो काफी मुश्किलों से गुजर रहा है. बरेली निवासी संजीव पालीवाल दो दशक से टीवी में हैं. वे बीआईटीवी, आजतक, डीडी न्यूज और आईबीएन7 में लंबे समय तक रहे. आजतक में यह उनकी दूसरी पारी है. करियर की शुरुआत उन्होंने बीआईटीवी से की थी. संजीव पालीवाल को टीवी की दुनिया का विनम्र और सहज व्यक्तित्व माना जाता है.

उधर, खोजी पत्रकार जमशेद खान ने भी आजतक के नाव की सवारी कर ली है. उन्हें ‘आजतक’ की एसआईटी टीम में बतौर डिप्टी एडिटर जुड़े हैं. जमशेद के नाम कई चर्चित स्टिंग हैं. जैन टीवी से करियर शुरू करने वाले जमशेद मूलत: आगरा के हैं. हाल ही में जमशेद ने कई मित्रों के साथ मिलकर विकीलीक्स इंडिया नाम से कंपनी की शुरुआत की और कई स्टिंग कर डाले. जमशेद के साथ काम करने वाले सुशांत पाठक ने भी ‘आजतक’ की एसआईटी टीम ज्वाइन कर लिया है.

ये भी पढ़ें….

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

सुप्रीम कोर्ट आजतक चैनल के बारे में फैसले पर पुनर्विचार करे : यूपी विधानसभा

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा ने मुजफ्फरनगर दंगों पर हुए स्टिंग आपरेशन के सिलसिले में आजतक समाचार चैनल के पत्रकारों के पेश होने पर उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थगनादेश दिये जाने के बाद एक प्रस्ताव पारित कर तय किया कि शीर्ष अदालत से फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया जाएगा. विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने प्रस्ताव पेश किया, जिसमें कहा गया, ‘‘जांच समिति ने टीवी टुडे नेटवर्क के जिन पदाधिकारियों को दोषी पाया है, उन्हें सदन में पेश होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिये गये हैं. माननीय सर्वोच्च न्यायालय के प्रति पूर्ण सम्मान के साथ सदन यह प्रस्ताव पारित करता है कि शीर्ष अदालत से अनुरोध किया जाये कि चार मार्च को इस संबंध में दायर रिट याचिका में सदन की कार्यवाही स्थगित करने के विषय में पारित आदेश पर पुनर्विचार किया जाये.”

प्रस्ताव में आगे कहा गया, ‘‘तथा उसे इस आशय से संशोधित, परिवर्तित एवं निष्प्रभावी किया जाये जिससे प्रस्तुत प्रकरण में सदन की कार्यवाही बाधित नहीं हो और जांच समिति की संस्तुतियों के क्रम में आगे की कार्यवाही सदन में हो सके।” प्रस्ताव में कहा गया कि सदन सर्वोच्च न्यायालय का पूर्ण रुप से सम्मान करता है लेकिन सदन की कार्यवाही स्थगित किये जाने के संबंध में अदालत द्वारा रिट याचिका में चार मार्च को पारित आदेश संवैधानिक रुप से उपयुक्त नहीं लगता है. संवैधानिक योजना के तहत न्यायालय और विधायिका के कार्यक्षेत्र विशिष्ट रुप से परिभाषित किये गये हैं तथा इनमें आपस में कोई विरोधाभास नहीं है.

प्रस्ताव में कहा गया कि सदन को अपनी कार्यवाही संचालित करने की संवैधानिक स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता. इस संबंध में सदन की संप्रभुता पर कोई प्रतिबंध लगाना संवैधानिक योजना के अनुरूप नहीं है. प्रस्ताव को सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया. प्रस्ताव पारित करने की प्रक्रिया में भाजपा सदस्य शामिल नहीं हुए.भाजपा नेता सुरेश खन्ना ने कहा कि जांच समिति के गठन से लेकर अब तक भाजपा इस प्रक्रिया में शामिल नहीं रही है, इसलिए वह इस प्रस्ताव में भी शामिल नहीं होगी.

इससे पहले अध्यक्ष पांडेय ने उच्चतम न्यायालय के स्थगनादेश के आलोक में सर्वदलीय बैठक बुलाकर विचार विमर्श किया था. बैठक मे शामिल दलों ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी. सपा नेता एवं प्रदेश सरकार के मंत्री आजम खां से जुडे स्टिंग आपरेशन में शामिल लोगों का पक्ष सुनने और दंड तय करने के लिए संबंधित चैनल के अधिकारियों को चार मार्च को तलब किया गया था लेकिन चैनल ने उच्चतम न्यायालय से स्थगनादेश हासिल कर लिया था. इससे पहले 25 फरवरी को चैनल ने पत्र के जरिये पेशी के लिए और समय मांगा था. नेता प्रतिपक्ष बसपा के स्वामी प्रसाद मौर्य ने फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे विधायिका के कामकाज में दखलअंदाजी करार दिया.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अखिलेश यादव और आजम खान के मीडिया विरोधी मंसूबे पर सुप्रीम कोर्ट ने फेरा पानी

आज 4 मार्च है. आज के दिन आजतक वाले पत्रकारों को यूपी विधानसभा के कठघरे में पेश होना था. अखिलेश यादव और आजम खान तुले हुए हैं कि आजतक चैनल को सबक सिखाया जाए. इसी बहाने वे सारे मीडिया संस्थानों को कड़ा संदेश देना चाहते थे. इसी बहाने वह चौथे खंभे को आतंकित करना चाहते थे. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इनके मंसूबे पर पानी फेर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने पूरी कार्रवाई पर रोक लगा दी और यूपी सरकार को फटकारा.

यूपी सरकार की तरफ से गौरव भाटिया और आजतक वालों की तरफ से सोली सोराबजी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए. कल और आज चली लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी. कोर्ट का कहना है कि स्टिंग न तो विधानसभा का हुआ, स्टिंग से जुड़ी कई तरह की जांचों में स्टिंग को फर्जी नहीं पाया गया, ऐसे में सदन की अवमानना का मामला बनता ही नहीं है. उधर, यूपी विधानसभा में चर्चा चल रही है कि सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई पर रोक लगाकर ठीक नहीं किया और यह सदन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है. कुल मिलाकर पूरा मामला चूहा बिल्ली के खेल की तरह रोचक हो गया है.

ज्ञात हो कि मुजफ्फरनगर दंगे का आजतक वालों ने स्टिंग किया था. इस स्टिंग से सबसे ज्यादा नाराज आजम खान हुए थे क्योंकि स्टिंग में एक सिपाही ने कहा कि आजम खान के आदेश के कारण मुस्लिम दंगाइयों को थाने से छोड़ना पड़ा था. इसी बात को लेकर आजम खान ने आजतक के खिलाफ हल्ला बोल दिया. पत्रकारों के खिलाफ कई किस्म के एफआईआर कराए जो बाद में हाईकोर्ट की जांच में झूठे पाए गए व खारिज कर दिए गए. साथ ही विधानसभा की अवमानना का मामला बनाकर विधानसभा जांच समिति गठित करवा दी जिसमें अपने खास करीबियों को सदस्य बनवाया और रिपोर्ट मनमाफिक फाइल करा दी. आजम खां की हां में हां मिलाते हुए अखिलेश यादव भी आजतक वालों को विधानसभा के कठघरे में खड़े देखना चाहने लगे. लेकिन इनके सपने मुंगेरीलाल के हसीन सपने बनकर रह गए हैं.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मुजफ्फरनगर दंगा स्टिंग प्रकरण : यूपी विधानसभा में नए बने कठघरा में 4 मार्च को खड़े किए जाएंगे आजतक के पत्रकार

उत्तर प्रदेश विधानसभा ने मुजफ्फरनगर दंगे का स्टिंग ऑपरेशन करने के मामले में आजतक न्यूज चैनल के कुछ पत्रकारों की हाजिरी माफी की अर्जी को स्वीकार कर लिया है। अब इन पत्रकारों को 4 मार्च को फिर से सदन में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। मुजफ्फरनगर दंगे संबंधी स्टिंग ऑपरेशन करने वाले आजतक चैनल के पत्रकारों को विधानसभा में पेश होना था, लेकिन चैनल ने पेशी के लिए विधानसभा सचिवालय के पत्र को 24 फरवरी को देर शाम मिलने के आधार पर अपना पक्ष रखने के लिए पत्र लिखकर सदन से समय मांगा।

इस पर विधानसभाध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने अब चैनल वालों को 4 मार्च को दिन में 12.30 बजे उपस्थित होने का फैसला सुनाया है। विधानसभा सचिवालय के आदेश पर असेंबली में एक अस्थाई कठघरा भी बनाया गया है जिसमें खड़े होकर सभी आरोपी पत्रकार अपनी बात रखेंगे। सूबे के नगर विकास मंत्री आजम खान ने शुक्रवार को विधानसभा में इस्तीफे की पेशकश की। उन्होंने कहा कि अगर वे मुजफ्फरनगर दंगे में दोषी हैं तो इस्तीफा देने को तैयार हैं। सदन में अपना इस्तीफा लेकर पहुंचे आजम ने कहा, ‘सदन का एक भी सदस्य बताये अगर मैं दोषी हूं। मैं इस्तीफा देने को तैयार हूं।’

जब सदन में पत्रकारों के हाजिरी माफ़ी की चिट्ठी पढ़ी जा रही थी उस दौरान बीजेपी विधायकों ने उनको समन किये जाने का विरोध किया और सदन से वाक आउट कर गए। हालांकि सदन के अन्य सदस्यों ने पत्रकारों को तलब किये जाने पर अपनी सहमती जताई। सपा विधायक सतीश कुमार निगम की अध्यक्षता में सात मेंबरों की कमिटी ने मंगलवार को विधानसभा में 350 पन्नों की जांच रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में पैनल ने कहा, ’17-18 सितंबर 2013 को न्यूज चैनल का स्टिंग ऑपरेशन फर्जी था।’

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

आजतक के कई बड़े पत्रकार 26 को यूपी विधानसभा में होंगे पेश, जाएंगे जेल या मिलेगी माफी?

Ambrish Kumar : मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित आजम खान को लेकर हुए स्टिंग आपरेशन में मीडिया खासकर इलेक्ट्रानिक चैनल के कई पत्रकारों को 26 फरवरी को विधान सभा में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं. इन पत्रकारों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153 a, 295 a, 200, 463, 454, 465, 469 और 471 लगाई गई है. इतनी बड़ी संख्या में संभवतः पहली बार चैनलों के पत्रकार विधान सभा में पेश होंगे.

विधान सभा चाहे तो उन्हें माफ़ भी कर सकती है. बसपा के स्वामी प्रसाद मौर्य ने उन सभी चैनल वाले पत्रकारों पर राष्ट्रद्रोह की धारा लगाने को भी कहा है जिन्होंने फर्जी स्टिंग के जरिए आजम खान को फंसाने का प्रयास किया. इन पत्रकारों को अब 26 फरवरीको विधान सभा में भी पेश होना है क्योंकि इन्हें विधान सभा की समिति ने दोषी पाया है.

वरिष्ठ पत्रकार अंबरीश कुमार के फेसबुक वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

आज तक की वेब टीम ने क्रिकेटर मोहम्मद शमी को करा दिया गिरफ्तार, विरोध में सोशल मीडिया पर चला अभियान

Mohammad Anas : ये देखिए आज तक की वेब टीम का कमाल। आज तक की वेब टीम में काम कर रही मोनिका शर्मा, ने अमरोहा की एक ख़बर लगाई है जिसमें उसने मोहम्मद शमी की फ़ोटो लगाते हुए लिखा है कि पशु तस्करी में भारतीय क्रिकेटर शमी पकड़े गए। लेकिन जब आप लिंक पर चटका लगा कर ख़बर पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि शमी नहीं बल्कि उनका भाई पकड़ा गया है। वैसे भी वेब वाले हिट्स पाने के लिए साथ काम कर रही महिलाओं का ही फ़ोटो और वीडियो डालते रहे हैं लेकिन यह पहली बार हुआ है कि मोनिका शर्मा ख़ुद ही इस नीच हरकत में कूद पड़ीं। मोनिका शर्मा कौन है यह मुझे नहीं पता। आज तक की वेब टीम की नीचता को मुँह तोड़ जवाब देने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में इसे शेयर करें।

xxx

थोड़ी देर पहले मेरी मोहम्मद शमी के घरवालों से बात हुई। उनका कहना है कि गोकशी के एक साल पुराने मामले में गाँव के एक व्यक्ति को पुलिस ले जा रही थी। कुछ मिसअंडर्सटैंडिग की वजह से शमी के भाई और पुलिस से तकरार हो गई इस वजह से उनको थाने पर बैठा लिया गया। मैंने उन्हें आजतक वेब पोर्टल पर आई मोहम्मद शमी से जुड़ी ख़बर के बारे में बताया तो उन्होंने कहा हम आजतक के वेब हेड कमलेश सिंह, मोनिका शर्मा आदि के नाम मानहानि के तहत मामला दर्ज करवाएँगे। मीडिया का एक वर्ग ख़ासकर वेब माध्यम जिस तरह से ख़बर लिखता और उसे प्रचारित करता है वह निंदनीय है। ग़ैरज़िम्मेदारी और जानबूझकर भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी को लेकर आजतक वेब डेस्क ने जो ख़बर लगाई वह घोर आपत्तिजनक है।

xxx

आजतक की वेब डेस्क टीम ने भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी को लेकर अफ़वाह उड़ाई की उनको पुलिस ने पशु तस्कर की मदद के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है। मुझे एक साथी ने ख़बर की लिंक भेजी तो देखा उस ख़बर पर सैकड़ों की तादाद में आम जनता ने विरोध दर्ज कराते हुए ख़बर हटाने का आवेदन कर रखा था। लेकिन दो घंटे से वेब टीम हिट्स के चक्कर में भारतीय टीम के शानदार गेंदबाज़ के चरित्र और कैरियर से खेल रही थी। मुद्दा मेरा नहीं था। आम लोगों का था। पत्रकारिता के नाम पर गुंडई और फूहड़ता, दंगाई भाषा और झूठी रिपोर्टिंग का था। मैंने अफ़वाह फैलाने वालों को छिछोरा कहा और ये भी लिखा की किसी दिन हिट्स के लालच में कहीं ख़ुद की न्यूड तस्वीर न वॉयरल कर दें। और ऐसा हुआ भी है। पंजाब केसरी ने तहलका की मशहूर पत्रकार और माखनलाल में मेरी सीनियर रही प्रियंका दुबे की फ़ोटो उनके वॉल से उठाकर लिखा था, पत्नी पीट रही पति को, आगे देखिए।’ मेरा पोस्ट लिखना भर था कि वेब डेस्क तुरंत हरकत में आया और ख़बर को हटा कर फिर से लगाया। ऐसे गंदी हरकत करने वाले लोगों के साथ कुछ लोग खड़े हैं। वे इसलिए खड़े हैं क्योंकि उन्हें मुझसे व्यक्तिगत खुन्नस है। वे नहीं चाहते की मैं या कोई और उन्हें सही रास्ता दिखाए। बहुत से लोगों का ईगो हर्ट हुआ है। बहुतों को लगता है मैंने उन पर हमला कर दिया है। जबकि यह साफ़ और सीधा टीआरपी और कॉरपोरेट गुंडों के बीच फँस चुकी मीडिया को बचाने का मुद्दा है। जनपक्षधरिता रहित पत्रकारिता किसे कहते हैं। महिला विरोधी, महिलाओं को सेक्स ऑब्जेक्ट कैसे बनाया जाता है वह सब देखना हो तो आज तक की वेब टीम से संपर्क साधा जा सकता है। मेरे लिए आज तक वाले हैशटैग चला रहे हैं ‘मुँह में ले लो।’ जी सर, दे दीजिए। जो दे रहे हैं।

xxx

कुछ साथी मोहम्मद शमी की फ़र्ज़ी गिरफ़्तारी वाली अफ़वाह आजतक वेबसाइट के माध्यम से उड़ाने वाली वेब टीम के साथ खड़े हैं। उनका कहना है कि मैंने अफ़वाह उड़ाने वाली मोनिका शर्मा को ‘छिछोरी’ कहा। यदि इस भाषा से किसी को आपत्ति है तो होती रहे। दूसरी, कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि मैंने मोनिका शर्मा की न्यूड फ़ोटो वॉयरल करने की धमकी दी। जबकि मैंने लिखा था जिस तरह से मोनिका शर्मा और वेब के ग़ैर ज़िम्मेदार पत्रकार ख़बर लिख कर हिट्स की लालच करते हैं वैसे में किसी रोज़ ख़ुद की न्यूड फ़ोटो लगा कर कहीं कोई ख़बर न वॉयरल कर दें ख़ुद से। शमी को लेकर लिखी गई अफ़वाह यदि ग़लती होती तो तुरंत हटा दी जाती लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैंने पोस्ट लिखी उसके दस मिनट बाद ख़बर बदली गई। जबकि आजतक के फ़ेसबुक पेज पर लोग फ़र्ज़ी ख़बर को लेकर विरोध जता रहे थे पर उनका लोड नहीं लिया गया। जो लोग मेरी भाषा को लेकर पोस्ट से नाइत्तेफाकी ज़ाहिर कर रहे हैं वे इस बात का ख़्याल रखे की ऐसा करने से वे वेब के ग़ैरज़िम्मेदार और मीडिया के कारपोरेट गुंडों को शह दे रहे हैं। मुझे बेहद अफ़सोस है कि कुछ बेहद प्रिय साथी आजतक की ग़लती पर माफ़ीनामा लेने के बजाए मेरी भाषा की कथित ग़लती पर पूरे मुद्दे को दबा देना चाहते हैं। लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि भाषा का स्तर यदि मेरा गिरा हुआ था तो मुझे लेकर लिखी जा रही हर किसी की पोस्ट में भाषागत गुंडई और हरामीपना दिख रहा है। चूँकि यह लड़ाई मेरी अकेली की नहीं है। न तो मैं इसे अपनी व्यक्तिगत लड़ाई बनने दूँगा इसलिए जिन दोस्तों में मुझे लेकर पोस्ट लिखा है या लिखेंगे उन्हें जवाब भर नहीं दूँगा। मैं चाहता हूँ की आपमें से कोई भी मुझे लेकर कहीं गाली गलौज करे तो मेरे पक्ष में कुछ न लिखें क्योंकि मैं लोड नहीं लेता। बाकि तो लड़ाई जारी रहेगी। उन दोस्तों से भी जो आजतक के वेब डेस्क को बचा रहे हैं। क्योंकि मैं अकेला बहुत हूँ सैकड़ों के लिए।

xxx

आजतक वेब डेस्क द्वारा मोहम्मद शमी को लेकर फैलाई गई अफ़वाह पर मेरे द्वारा लिखीं गई अधिकतर पोस्ट को हमारे समय के सबसे बड़े मीडिया आलोचक, चिंतक, इंडिया टुडे मैगज़ीन के पूर्व संपादक, दिलीप मंडल ने लाइक किया है। इस मुद्दे पर उनकी सहमति है मेरे साथ तो आजतक वेब टीम वालों और उनके समर्थकों से बस इतना कहना है कि आप लोग रांग साइड ड्राइविंग कर रहे हैं। एक बैलेंसवादी ब्राह्मण ने लिखा है कि वो लड़की बेचारी जूनियर है। ग़रीब है। शिफ़्ट के घंटों से परेशान थी। मतलब आप मीडिया के एक बड़े प्लेटफ़ॉर्म पर हैं या फिर घर के किचेन में। जहाँ दाल में नमक ही तो ज़्यादा हुई है टाइप के कुतर्क रख रहे हैं। दिलीप मंडल की मेरी इस पोस्ट पर उपस्थिति यह बताती है कि मीडिया में बैठे ब्राह्मणवादी और बाहर से उनको सपोर्ट कर रहे घोर जातिवादी ब्राह्मणों ने किस क़दर उत्पात मचा रखा है। आजतक वेब टीम में अस्सी फ़ीसदी ब्राह्मण कार्यरत हैं। मज़े की बात ये कि मुझे लेकर लिखे गए पाँच छह पोस्ट भी ब्राह्मणों ने लिखे। कुछ भोले और मासूम लोग फ़ोन करके कह रहे हैं कि वे लोग बच्चे हैं, उनकी कोई पॉलिटिक्ल ऑइडियोलॉजी नहीं है। मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं लगता। मेरे ख़िलाफ़ जिस बेहुदगी से कुछ बैलेंसवादी ब्राह्मणों ने स्टैंड लिया वह बहुत कुछ साफ़ कर देता है। इस मामले में कुछ ब्राह्मण दोस्तों ने साथ भी दिया। उनका शुक्रगुज़ार हूँ कि उन्होंने शोषित, पीड़ित और दमित का पक्ष समझा और साथ खड़े हुए। गंभीर सवाल यहाँ उभरता है कि मीडिया हमेशा अल्पसंख्यक,दलित और स्त्रियों को लेकर ही ग़लती क्यों करता है किसी ब्राह्मण को लेकर उससे हेडिंग में भूलचूक क्यों नहीं होती? मोहम्मद शमी की गिरफ़्तारी की फ़र्ज़ी अफ़वाह फ़ेसबुक ने वॉयरल करने के लिए अपने फ़ेसबुक पेज पर पोस्ट किया था। जो कि पूरे दो घंटे तक वहाँ रही। सैकड़ों लोगों ने हटाने को निवेदन किया लेकिन नहीं हटाया गया। यह सब जानबूझ कर किया जा रहा था और डेस्क को इसकी पूरी जानकारी थी। ग़लती होती तो एक बार पीछे हट भी जाता मैं लेकिन जानबूझ कर बदनाम करने वालों को कैसी छूट?

सोशल और मीडिया एक्टिविस्ट मोहम्मद अनस के फेसबुक वॉल से.

Ankur Tiwary : आजतक की एक गलत स्टोरी पर Mohammad Anas जी ने एक पोस्ट लिखकर माफ़ी नामा छापने की बात कही। पोस्ट में चूंकि यह हैडलाइन दी गयी थी कि क्रिकेटर मोहम्मद शमी गिरफ्तार लेकिन वास्तविकता यह है कि मोहम्मद शमी नहीं उसका भाई गिरफ्तार हुआ है। आज तक के इस पोस्ट का स्क्रीन शॉट अनस जी ने फेसबुक पर अपलोड किया तो तमाम आज तक के कर्मचारी शिफ्ट, ज्यादा घंटे केकाम की वजह से होने वाली गलती को कारण बता उल्टा मोहम्मद अनस जी पर ही निशाना साधने लगे हैं। वो भी इतनी खूबसूरत भाषा शैली के साथ कि उसे पढ़ा नहीं जा सकता है। आजतक के तमाम कर्मचारियों को समझना चाहिए कि गलती किससे नहीं होती है। सभी से होती है लेकिन उसपर माफ़ी मांग लेनी चाहिए, एक माफ़ी मांगने से आपकी क्रेडिबिल्टी पूरी तरह से समाप्त तो होगी नहीं जनाब। चलिए मान लिया कि मोनिका जूनियर साथी होगी या काम के ज्यादा दबाव के चलते गलती हो गयी होगी। लेकिन आप दूसरा पक्ष भी तो सोचिये आज तक के साथियों।

यह सोचिए कि आपके फेसबुक पर एक करोड़ से ज्यादा लाइक्स हैं, ट्विटर पर भी लाखों हैं। टीआरपी में नम्बर एक पायदान पर हैं ही और दर्शक भी दस करोड़ हैं। इतनी बड़ी संख्या में आपकी पोस्ट पहुँचती है तो हो सकता है कि मोहम्मद शमी के घरवालों तक या उनके चाहने वालों तक भी पहुंची ही होगी। क्या कभी सोचा है कि एक दम से यह पोस्ट देखकर क्या बीती होगी उनपर? आपने तो एक गलती कर दी लेकिन उसकी वजह से दूसरे को दिक्कत हुई उसका क्या? उसकी भरपाई कौन करेगा साहेब? इसलिए कह रहा हूँ फेसबुक पर मोहम्मद अनस जी के खिलाफ पोस्ट लिखने में समय न खर्च कीजिये, सभी जानते हैं कि गलती होती है ठीक है लेकिन माफ़ी भी तो मांगिये न। मैंने तो आपके कई कार्यक्रमों में यह उपदेश देते हुए सुना है कि माफ़ी मांगने में कोई दिक्कत और देरी नहीं की जानी चाहिए। किसी एक व्यक्ति से लड़ाई करने के बजाये खुद सोचिये कि मोहम्मद शमी के बजाये आपके बड़े भाई, पिता, बहन आदि में किसी का नाम होता तो क्या करते? आपका लाख विरोध अनस जी के साथ हो सकता है लेकिन सवाल तो जायज है न? उम्मीद है कि जिम्मेदार चैनल होने के नाते माफ़ी मानेंगे।

युवा पत्रकार अंकुर तिवारी के फेसबुक वॉल से

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

10 करोड़ दर्शकों वाला पहला न्यूज चैनल बना आजतक

लगातार चार हफ्तों की रेटिंग में ‘आज तक’ ने सभी न्यूज चैनलों को पीछे छोड़ते हुए 10 करोड़ से ज्यादा दर्शकों का रिकॉर्ड कायम किया है. BARC और HSM समेत दूसरे रेटिंग सिस्टम में भी ‘आज तक’ की बादशाहत कायम है. कवरेज के मामले में ‘आज तक’ जहां अंग्रेजी न्यूज चैनलों से पांच गुना आगे है तो वहीं, दर्शकों के मामले में यह आंकड़ा 24 गुना ज्यादा है. इसकी पुष्टि BARC रेटिंग सिस्टम के आंकड़े भी करते हैं.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मध्य प्रदेश के एक मंत्री से लात खाए गरीब बच्चे को एक पव्वा दारू का पैसा देकर मनमाफिक न्यूज गढ़ने में जुटा ‘आजतक’ (देखें वीडियो)

‘आजतक’ वाले ऐसे करते हैं न्यूज मैनेज … मध्य प्रदेश में मंत्री से लात खाए गरीब बच्चे को मन मुताबिक बयान दिलाने के लिए शराब के पव्वे का पैसा दिया रिपोर्टर ने.. पूरा माजरा इस वीडियो में कैद है… धन्य हैं भाजपा के नेता और धन्य हैं आजतक के रिपोर्टर… गरीबी के कारण नशे और बदहाली की चपेट में जी रहे इस बच्चे से भला किसको लगाव हो सकता है..

ये वीडियो भड़ास के सर्वर पर अपलोड किया गया है ताकि इसे चैनल वाले डिलीट न करा पाएं… इसलिए संभव है ये फ्लैश फाइल वीडियो आपके मोबाइल पर न चल पाए. सो, आपको वीडियो देखने के लिए लैपटाप या डेस्कटाप का सहारा लेना पड़ेगा….

वीडियो लिंक नीचे दिया जा रहा है, क्लिक करें:

http://goo.gl/7fCTYW

मध्य प्रदेश में एक गरीब और भटके हुए बच्चे को मंत्री कुसुम मेहदेले ने लात मार दी. यह घटना बेहद निंदनीय है. लात मारने वाली घटना से समझा जा सकता है कि नेता लोग किस कदर संवेदनहीन हैं, वह भी भाजपा के नेता, जिन्हें ये तक तमीज नहीं कि किसी गरीब व भटके बच्चे से कैसे सलूक करते हैं. इस घटना के बाद न्यूज चैनलों में गरीब बच्चे से बाइट लेने की होड़ मच गई. यह लड़का गलत संगत में पड़कर नशा वगैरह भी करने लगा है.

ऐसे में आजतक का एक रिपोर्टर इस गरीब बच्चे को शराब के पव्वा के लिए पैसा देने की बात कहते हुए बयान देने के लिए सिखा पढ़ा रहा है. ध्यान से पूरा वीडियो देखिए. खबर बनाने के लिए इस तैयारी को क्या समझा जाये जो बाद में बच्चे को शराब का क्वाटर देकर करायी गई. बहुत कुछ बोल रहा है यह वीडियो. देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें:

http://goo.gl/7fCTYW

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

टीआरपी में फिसड्डी ‘आजतक’ अब फेसबुक लाइक्स में नंबर वन होने का दावा करने लगा

आजतक न्यूज चैनल को खुद को नंबर वन चैनल बताने का रोग लग चुका है. कंटेंट के स्तर पर दिनों दिन गर्त में जा रहा यह न्यूज चैनल टीआरपी में तीसरे नंबर पर पहुंच चुका है लेकिन खुद को नंबर वन बताने का जुमला छोड़ने का नाम नहीं ले रहा. अब वह फेसबुक लाइक्स के मामले में एक करोड़ का दावा करके खुद को नंबर वन बताने लगा है. इस बाबत आजतक न्यूज चैनल ने खुद की वेबसाइट पर लंबा चौड़ा स्व-प्रचार प्रकाशित किया है.

इसमें कहा गया है- ”आज तक देश का पहला न्यूज चैनल बन गया है, जिसके फेसबुक पेज पर 1 करोड़ से ज्यादा लाइक्स हो गए हैं. यह सब आज तक के दर्शकों और aajtak.in के पाठकों की बदौलत संभव हो सका. यह सोशल मीडिया में आज तक की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है. आज तक अपने दर्शकों और पाठकों को ब्रेकिंग न्यूज के जरिए सबसे पहले अपडेट रखता है.”

जानकारों का कहना है कि आजतक पर अब ऐसा कोई प्रोग्राम या खबर नहीं है जो दूसरे चैनलों के पास न हो. आजतक भारत के दूर-दराज के इलाकों के घटनाओं को प्रमुखता से दिखाया करता था लेकिन इसने अपने सारे स्ट्रिंगर्स को हटाकर खुद को एएनआई वीडियो न्यूज एजेंसी के भरोसे करके अपनी यूएसपी खत्म कर ली. रही सही कसर दीपक शर्मा के चैनल के जाने से पूरी हो गई जो कायदे के स्टिंग कर के बीच बीच में चैनल को देखने लायक बना दिया करते थे. चैनल के तेवर और सरोकार में भी बहुत कमी आई है. चैनल की हिम्मत अब मोदी, मुलायम जैसे नेताओं को एक्सपोज करने की नहीं रही क्योंकि इन नेताओं से अरुण पुरी के निजी संबंध हैं इसलिए निजी संबंधों को देखते हुए तेवरदार खबरों को इनकी भेंट चढ़ा दिया जाता है. अपने पत्रकार अक्षय सिंह की हत्या को लेकर भी आजतक कायदे का स्टैंड नहीं ले सका. इसने वो फुटेज भी नहीं दिखाए जिसे अक्षय शूट कराते हुए आखिरी सांसें ली. यह सब कुछ आजतक को रहस्यमय बनाता है और बताता है कि पुराने दिन यहां खत्म हो चुके हैं. नया दौर धंधा पानी और पीआर का शेष है. 

ऐसे में आजतक के पास बस चीखने चिल्लाने वाले कुछ एंकर बचे हैं और बची हैं वही खबरें जिसे बाकी सारे चैनल दुहराते चलाते हैं. पुण्य प्रसून बाजपेयी जैसे पत्रकार को आजतक जमीनी रिपोर्टिंग के लिए देश भर में भेजकर कुछ नया कर सकता था लेकिन इन्हें एंकर के बतौर बनाए रखकर इनकी उर्जा-प्रतिभा को नष्ट कर रहा है. आजतक से कहीं ज्यादा बेहतर एबीपी न्यूज हो गया है जो नित नए तरीके से नए संवेदनशील खबरों मुद्दों को उठाता उछालता रहता है. साथ ही एक तेवर बनाकर चलने की कोशिश करता है. आजतक से बहुत बेहतर एनडीटीवी है जो अपने एंकर्स के दम पर दिल को छू लेने वाले जमीनी व पत्रकारीय सरोकार वाले खबरें बनाता दिखाता है. ऐसे में अब आजतक के पास खुद को फर्जी तरीके से नंबर वन बताने और हमेशा पिटते रहने के अलावा कुछ बचा नहीं है.

इसे भी पढ़ सकते हैं…

इंडिया टीवी और जी न्यूज के अच्छे दिन आ गए, टीआरपी में एक हुआ नंबर वन, दूसरा दो नंबर पर

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

‘आजतक’ का पत्रकार मनोज सट्टेबाज की रिहाई और मेले में सट्टा चलाने के लिए थानेदार से सिफारिश कर रहा (सुनें टेप)

गाजियाबाद से एक बड़ी खबर आ रही है. एक आडियो टेप वायरल हुआ है जिसमें दावा किया गया है कि थाना विजय नगर प्रभारी सुरेन्द्र यादव एवं चैनल ‘आज तक’ के पत्रकार मनोज के बीच हुई फोन वार्ता है. इस वायरल हुए ऑडियो में आजतक का पत्रकार मनोज हिरासत में लिये गये एक सट्टेबाज को छोड़ देने के लिए अपील कर रहा है. साथ ही वह सट्टेबाज को मेले में सट्टा चलाने देने की सिफारिश कर रहा है.

थाना प्रभारी सुरेंद्र यादव पूरी कड़ाई से मनोज की सिफारिश को नकार रहा है और कह रहा है कि उसके इलाके में जो गलत करेगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा. टेप सुनने के लिए इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें: https://www.youtube.com/watch?v=zP2GlcK9w40

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

क्या ‘प्याज’ घोटाला छिपाने के लिए दिया गया फुल पेज का विज्ञापन?

नई दिल्ली: प्याज को लेकर घोटाले के आरोपों से घिरी दिल्ली सरकार ने घोटाले के आरोपों को नकार दिया है. लेकिन आज केजरीवाल सरकार ने अखबारों में पूरे पेज का विज्ञापन छापकर आजतक चैनल पर निशाना साधते हुए बदनाम करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है. बीजेपी ने कहा है कि करोड़ों का विज्ञापन देकर सरकार ने प्याज घोटाला छुपाने की कोशिश की है. केजरीवाल सरकार पर सस्ते में प्याज खरीदकर जनता को महंगा बेचने का आरोप लगा है. बड़ा सवाल ये है कि प्याज में घोटाला हुआ या नहीं.

प्याज की बिक्री पर कथित घोटाले के आरोपों के बीच केजरीवाल सरकार ने हर बड़े अखबारों में पूरे पेज का विज्ञापन छापकर न्यूज चैनल आज तक पर बदनाम करने के लिए झूठी खबरें चलाने का आरोप लगाया. विज्ञापन में लिखा है कि केंद्र सरकार ने नासिक से प्याज 18 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदी. केंद्र सरकार ने ही दिल्ली सरकार को प्याज 33 रुपये किलो की दर से बेची. दिल्ली सरकार ने 33 रुपये प्रति कोल के ऊपर ट्रांसपोर्टेशन, लोडिंग-अन लोडिंग और दुकनदारों के मार्जन मनी पर 7 रुपये अतिरिक्त खर्च करके भी जनता को तीस रूपये किलो की दर से प्याज उपलब्ध कराई. केंद्र सरकार ने अपनी दो एजेंसियों डीएमएस और सफल के माध्यम से प्याज 35 से 40 रुपये किलो तक बेची.

संजय सिंह ने बताया कि कोई घोटाला नहीं हुआ. घोटाले की फर्जी खबर दिखाई जा रही है. अगर ऐसी खबरें दिखाई जाएंगी तो जवाब देना होगा.. चाहे विज्ञापन देना पड़े. विज्ञापन में आंकडों के हवाले से वही दावा किया गया है जो घोटाले के आरोप में सफाई में दिल्ली सरकार कह चुकी है. अब बीजेपी कह रही है कि प्याज घोटाला छिपाने के लिए अखबारों में करोड़ों का विज्ञापन छपवाया गया. एबीपी न्यूज ने दिल्ली सरकार का विज्ञापन देने वाली संस्था डीएवीपी के रेट के आधार पर जब विज्ञापनों के खर्च का हिसाब लगाया तो ये 23 लाख 65 हजार रुपये तक पहुंचा. अगर ये अनुमान सही है कि विज्ञापन के खर्च के पैसे से 72 हजार 2 किलो प्याज आ जाता जो केजरीवाल सरकार एक दिन में 72 हजार लोगों को एक-एक किलो फ्री में बांट सकती थी. एबीपी न्यूज ने ईमेल भेजकर आप सरकार से विज्ञापन पर खर्च का हिसाब मांगा है जिसका जवाब अभी तक नहीं मिला है. दिल्ली सरकार के सूत्रों के मुताबिक प्रत्येक सरकारी काम नियमों के तहत होता है. तय DAVP रेट पर पारदर्शी तरीके से विज्ञापन जारी किया जाता है. विधिवत तरीके से सारी जानकारी सरकार से ली जा सकती है. इधर आरटीआई के जरिये खुलासा करके घोटाले का दावा करने वाले विवेक गर्ग ने एंटी करप्शन ब्रांच और उपराज्यपाल के पास घोटाले की शिकायत दर्ज कराई है. केजरीवाल सरकार पर 24.45 रुपये की दर से प्याज खरीदकर तीस रुपये किलो बेचने का आरोप लगा था जिसके बाद दिल्ली सरकार ने दस्तावेज जारी करके दावा किया था कि केंद्र सरकार से खरीदकर प्याज बाजार में चालीस रुपये के भाव का पड़ा था जिसे तीस रुपये किलो बेचा गया. बड़ा सवाल ये है क्या विज्ञापन देकर जनता के पैसे की बर्बाद की? (साभार- एबीपी न्यूज)

मूल खबर…

प्‍याज घोटाले का आरोप लगने पर केजरीवाल सरकार ने आजतक न्‍यूज चैनल पर निशाना साधते हुए अखबारों में निकाला पूरे पेज का विज्ञापन

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

प्‍याज घोटाले का आरोप लगने पर केजरीवाल सरकार ने आजतक न्‍यूज चैनल पर निशाना साधते हुए अखबारों में निकाला पूरे पेज का विज्ञापन

नई दिल्‍ली। दिल्‍ली में केजरीवाल सरकार पर कम दामों में प्‍याज खरीदकर ज्‍यादा दामों में बेचने के आरोप लगने के बाद आप की सफाई आई है। उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस करते हुए कहा कि हमने प्‍याज 32.86 रुपए में खरीदे और बाजार में अपनी जेब से पैसे भरते हुए कम कीमत पर बेचे। जबकि केंद्र सरकार 33 रुपए में खरीदा प्‍याज ज्‍यादा दामों में बेच रही थी। उन्‍होंने आरोप लगाया कि यह सब लोगों का ध्‍यान हटाने के लिए किया जा रहा है। मीडिया को कागज दिखाते हुए उन्‍होंने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि हमने केंद्र की एजेंसी एसफएसी से प्‍याज खरीदे थे।

उन्‍होंने केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि, ‘यह पूरी तरह गलत है कि हमने नासिक से प्‍याज खरीदे। इसकी बजाय नाफेड और एसएफएसी ने केंद्र की तरफ से महाराष्‍ट्र से 18 रुपए प्रति किलो की दर से प्‍याज खरीदे और हमें यही प्‍याज 32.86 रुपए प्रति किलो की दर से बेचे। इसमें जो 14 रुपए अतिरिक्‍त हैं वो एडमिनिस्‍ट्रेटिव एक्‍सपेंस के रूप में बीजेपी सरकार ने चार्ज किए हैं। अगर कोई गड़बड़ है तो वो नफेड और एसएफएसी की तरफ से है।’

सि‍सोदिया ने आजतक न्यूज चैनल पर भी निशाना साधा और कहा कि वो लगातार झूठी खबर दिखा रहा है। सिसोदिया ने कहा कि भाजपा विपक्ष में है और उसका हक है सवाल करना जिसका हम जवाब देंगे लेकिन एक न्‍यूज चैनल इस तरह की झूठी खबरें कैसे दिखा सकता है। नफेड के दावे को लेकर उन्‍होंने कहा कि नफेड ने 19 रुपए किलो की कीमत पर प्‍याज देने के लिए कहा था तो हमने पत्र लिखा की आप दिल्‍ली में हमें यह उपलब्‍ध करा सकते हो जिसका अब तक कोई जवाब नहीं आया। सिसोदिया ने कहा कि ये जानबूझकर उस वक्‍त किया जा रहा है जब दिल्‍ली सरकार लगातार मेहनत करते हुए डेंगू पर नियंत्रण पाने लगी है।

इस मामले को लेकर फेसबुक पर आईं कुछ टिप्पणियां इस प्रकार है…

Sandeep Verma : कजरी सरकार तो विज्ञापन देने में माहिर सरकार है. मुझे लगता है यह इस मद में भाजपा को बखूबी पछाड़ सकते हैं. मोदी सरकार की बनियों के साथ मिलकर की जा रही मुनाफाखोरी का पर्दाफ़ाश जिस मीडिया को करना था, उसने उलटे कजरी को फंसाया.. डबल फायदा… मोदी सरकार की चमचागिरी और कजरी से विज्ञापन…

Sanjay Kumar Singh : ‘जंग लगी’ सरकार के राज में जनता का पैसा ऐसे ही बर्बाद होता है। मीडिया को टीआरपी की मलाई के साथ-साथ विज्ञापन की सौगात भी।

Mohammad Anas : आज पूरे देश के अख़बारों में अरविंद केजरीवाल ने प्याज़ मुद्दे पर फुल पेज विज्ञापन दिया है। केजरीवाल सरकार ने आजतक न्यूज़ चैनल पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और केंद्र सरकार द्वारा प्याज़ की खरीद बिक्री पर विस्तार से बात की है। अरविंद केजरीवाल जब से दिल्ली पर काबिज़ हैं तब से वे कुछ न कुछ प्रपंच कर रहे हैं। जनता का पैसा बेहिसाब विज्ञापनों पर खर्च कर रहे हैं। राज्यपाल से दिखावे की लड़ाई और मोदी से मिलाई। आज निकाले गए विज्ञापनों का हिसाब लगाया जाए तो करोड़ों रूपए बनते हैं। यदि इन पैसों से प्याज़ खरीद कर दिल्ली वालों को दिया जाता तो कम से कम जनता को फायदा होता लेकिन मीडिया में झूठमूठ के मुद्दों पर बने रहने के लिए केजरीवाल ने जन हित को किनारे रख दिया। केंद्र कैसा है वह पता है, केजरीवाल कैसे हैं वह भी मालूम है। जिस लोकपाल के मुद्दे पर वे जंतर मंतर पर बैठे थे, उसे भूल चुके हैं। केजरीवाल की लड़ाईयों से केंद्र की निरंकुशता पर रत्ती भर फर्क़ नहीं पड़ा। अब धरने प्रदर्शन सिर्फ अपने आप को सही सिद्ध करने के लिए होते हैं। इन सबके बीच किसान/गरीब/आम जनता के मुद्दे पोस्टर बैनर तक सिमट जा रहे हैं। केजरीवाल- मोदी- मीडिया के चकल्लस से किसे फायदा हो रहा? सरकार को। सरकार में शामिल लोगों को। करोड़ों का विज्ञापन निकाल कर आरोप प्रत्यारोप करने से फुर्सत मिल जाए तो प्याज़ सस्ता करवा दीजिएगा।


इसे भी पढ़ें…

क्या ‘प्याज’ घोटाला छिपाने के लिए दिया गया फुल पेज का विज्ञापन?

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अखिलेश ने रोका न होता तो आजम खान ने ‘आजतक’ के कई वर्तमान-पूर्व पत्रकारों को जेल भेजने की व्यवस्था कर दी थी

राहुल कंवल, पुण्य प्रसून, गौरव सावंत, दीपक शर्मा सहित कई पत्रकारों पर दंगा भड़काने की धाराएं लगाने की सिफारिश

यूपी सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री आजम खान बुधवार को इतिहास बनाते बनाते रह गये. अगर उनका बस चला होता तो देश के 10 से ज्यादा पत्रकार दंगे कराने के जुर्म में आज जेल में होते. इनमें राहुल कंवल, गौरव सावंत, पुण्य प्रसून बाजपेई, मनीष, दीपक शर्मा, हरीश शर्मा और अरुण सिंह प्रमुख हैं. आज़म खान नगर विकास के साथ साथ संसदीय कार्य मंत्री भी हैं. मुज़फ्फरनगर दंगों पर दिखाय गये एक स्टिंग ऑपरेशन में जब उनका नाम उछला था तो संसदीय कार्य मंत्री ने बीएसपी नेता स्वामी प्रसाद मौर्या से मिलकर एक जांच समिति बना दी थी.

इस जांच समिति ने आजतक और इंडिया टुडे के 10-12 पत्रकारों पर दंगा कराने का मामला दर्ज करवाने की संस्तुति कर दी. परसों सदन में जांच समिति की रिपोर्ट पटल पर रखी जानी थी. इसकी कुछ प्रतियाँ लखनऊ के कुछ पत्रकारों को मिली हैं. इस जांच रिपोर्ट में ऊपर दिए गये पत्रकारों पर आईपीसी की धारा 153A, 195A, 295A, 200 (दंगा कराने से जुडी) के तहत मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश की गयी है. यही नहीं 463, 464, 465, 471 के तहत भी मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की गयी. ये धाराएं स्टिंग ऑपरेशन में तथ्यों को सरकार के खिलाफ तोड़ मरोड़ कर पेश करने की हैं जबकि गांधीनगर फॉरेंसिक लैब के वैज्ञानिक विधान सभा में बयान दे चुके थे कि स्टिंग ऑपरेशन में कोई छेड़छाड़ या किसी दूसरे की आवाज़ नहीं डाली गयी. गांधीनगर के इस रिपोर्ट के अहम तथ्यों को नज़र अंदाज़ करके शुरू में कराई गयी हैदराबाद लैब की आधी अधूरी रिपोर्ट को उलेखित किया गया है.

आजतक के एक पूर्व अधिकारी को भी जांच समिति ने बुलाया. इस पूर्व अधिकारी (पत्रकार) ने आजतक के बारे में खूब उलटे सीधे बयां दिए और बाद में आज़म खान से कहा कि बेहतर होगा वो आज के दौर में खुद अपना चैनल लें जो अप्ल्संख्यक पक्ष को रखे. इस पत्रकार ने आज़म खान के चेलों को न्यूज़ चैनल का बजट तक दिया. इसका विरोध समिति के एक विधायक ने किया. समिति के कुछ और सदस्य ने भी आज़म खान के दबाव का भीतर ही भीतर विरोध किया और कहा कि जब दंगा खत्म होने पर दंगे का कारण जानने के लिए स्टिंग किया गया है तो पत्रकारों पर दंगे के आरोप लगाना गलत होगा. और अगर इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया तो सरकार की थू थू होगी. वैसे भी पत्रकारों के उत्पीडन के कई मामले यूपी में सुर्ख़ियों पर रहे हैं.

चौकाने वाली बात ये है कि जांच रिपोर्ट में स्टिंग करने वाले पत्रकार और जिन अफसरों का स्टिंग किया गया, दोनों पर ही कारवाई करने की संस्तुति की गयी है. सूत्रों ने बताया कि आज़म को एक वरिष्ठ नेता ने समझाया कि अगर स्टिंग से अलग हटकर प्रोग्राम में उनका नाम ये कहकर उछाला गया कि उन्होंने कुछ अफसरों पर दबाव डाला है और इस बात के सबूत नहीं है तो इसके लिए दोनों चैनलों पर खंडन चलाने के निर्देश समिति को देने चाहिए. लेकिन आज़म खान ने इस सलाह को खारिज करके कहा कि वो सभी पत्रकारों पर दंगा कराने का केस चलाएँगे और विधान सभा के भीतर मानहानि का मामला बना कर सजा भी देंगे. विधान सभा के विधि सलाहकारों ने आज़म खान को फिर सलाह दी कि जो धाराएं वो पत्रकारों पर लगा रहे हैं वो अदालत खारिज करके सरकार पर उल्टा टिप्प्णी करेगी और कहीं पूरे मामले की जांच सीबीआई को चली गयी तो लेने के देने पड़ेंगे क्यूंकि सीबीआई अब मोदी की हाथ में है और आज़म खान और अखिलेश सरकार पर सुप्रीम कोर्ट मुज़फ्फरनगर दंगो को लेकर पहले से विपरीत टिप्पणी कर चुकी है.

सूत्रों के मुताबिक इस सत्र में जिद पर अड़े आज़म खान ने हफ्ते भर में जांच रिपोर्ट तैयार करवाई और स्पीकर से कह कर उसे 26 अगस्त को कार्य सूची में डलवा दिया. रात में जब मुख्य मंत्री अखिलेश यादव को पत्रकारों पर लगी दंगे की धाराएं बताई गयीं तो चौंक गए. मुख्यमंत्री ने स्पीकर से बात करके रिपोर्ट को अगले सेशन के लिए टलवा दिया. फिलहाल आज़म खान अभी अपनी बात पर अड़े हैं और पत्रकारों को जेल भेजने के लिए वो विधानसभा समिति को पत्र भी लिख चुके हैं. उधर चर्चा है कि समिति में फूट पड़ गयी है. भाजपा के विधायक ने पहले ही समिति का बहिष्कार कर दिया था. अब दो सदस्यों का कहना है कि सारे फैसले सिर्फ तीन विधायकों दिलनवाज़ खान, इरफ़ान और सुदेश शर्मा ने लिए हैं, इसलिए वे पत्रकारों को गलत फंसाने की जिम्मेदारी खुद नहीं लेना चाहते.

भड़ास के संपादक यशवंत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क: yashwant@bhadas4media.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

बेलगाम एंकर अंजना ओम कश्यप

अभी-अभी आजतक बंद किया है। देख रहा था, इंडिया 360 डिग्री। होस्ट कर रही थीं बेलगाम एंकर अंजना ओम कश्यप। एक खबर आई। ब्रेकिंग न्यूज में। खबर थी, नीतीश का स्टेटमेंट। नीतीश कुमार ने कहीं स्टेटमेंट दिया था कि मैं अहंकारी हूं परंतु शिष्टाचार नहीं भूलता। जाहिर तौर पर नीतीश के तीर पर मोदी ही थे। यह सब चल ही रहा है। कई दिनों से। लेकिन एक पत्रकार होने के नाते अंजना ओम कश्यप से जो उम्मीदें थी, उसे उन्होंने न सिर्फ तोड़ दिया बल्कि मेरे मन में अपने लिए और ज्यादा नफरत भी पैदा कर दिया। अंजना ने पंच मारा-कितनी बेमानी हैं ये बातें। बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, सड़कें नहीं हैं और इस किस्म की बातें…लड़ाई, झगड़ा, चोरी और डकैती वहां पर हो रही है….यह सब कहते-कहते उनके चेहरे पर बेहद घटिया किस्म के भाव आए थे। आप लोग इसकी रिकार्डिंग मंगवा सकते हैं। आज तक से।

देश का कौन सा शहर है ऐसा जहां इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा हो? दिल्ली में है? गुजरात में है? गोवा में है? महाराष्ट्रा में है? भाजपा शासित किस प्रदेश में है? मैं अपना जीवन उन सज्जन की चाकरी में बीता दूंगा जो साबित कर दें कि देश के किसी भी सूबे में पूरा का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर हो। भाजपा ही नहीं, कांग्रेस नीत सरकार वाले भी किसी सूबे में पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। तो, बिहार को बदनाम क्यों कर रही हैं अंजना? नीतीश का नाम लेते हुए उनका मुंह कसैला क्यों हो जाता है? ये पत्रकारिता नहीं कर रही हैं। ये हम पत्रकारों को बदनाम करने का दुष्कर्म कर रही हैं। इन्हें कितने विषयों की जानकारी है, भगवान जानें। एक बार सामना हो जाए तो मजा आ जाएगा।

अंजना ने कहा कि बिहार में चोरी होती है, मार-धाड़ होता है, डकैती होती है। मेरा प्रतिप्रश्न हैः दिल्ली, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड….किस राज्य में अपराध नहीं होते? यूपी में नहीं होता? महाराष्ट्र में नहीं होता? कहां नहीं होता?? हर जगह होता है। उसके लिए पुलिस है। पुलिस वाले ड्यूटी ईमानदारी से करते हैं या नहीं, यह अलग विषय है पर चुनाव के इस मौसम में इस तरह प्रधानमंत्री की तरफदारी करने वाली रिपोर्टिंग क्यों और वह भी आजतक जैसे मंच से???

मैं 24 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं। बिहार, झारखंड, असम, महाराष्ट्रा, यूपी, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में पत्रकारिता कर चुका हूं। कहीं रामराज्य नहीं है। 100 फीसदी इंफ्रास्ट्रक्चर भी कहीं डेवलेप नहीं है। गांधीनगर की गलियों में भी घूम चुका हूं। कहीं रामराज्य नहीं है। फिर अंजना बिहार पर तंज क्यों कस रही हैं? आप जानती ही कितना हैं बिहार को? बीते 10 साल में बिहार जिस तेजी से बदला है उसे महसूस करने के लिए आपको बिहार की यात्रा करनी चाहिए। आप जाइए गांवों में, शहरों में। देखिए तो कि बिहार कहां से कहां पहुंच गया है? बिना केंद्र सरकार के समर्थन के 10 फीसदी का विकास दर हासिल करना हंसी ठट्ठा नहीं है। आप इसे मजाक न बनाएं अंजना जी। कोई हक नहीं है आपको। आप पत्रकारिता कीजिए न। किसने रोका है आपको। सत्ता की दलाली मत कीजिए। हम लोगों की विश्वसनीयता पर संकट मत खड़ा कीजिए। यही आपसे निवेदन है। अगर आप ऐसी ही उल-जुलूल टिप्पणियां करेंगी तो हम जैसे समर्थ पत्रकार आपके खिलाफ ही मोर्चा खोल देंगे। इसे बढ़िया से समझ लीजिए।

लेखक आनंद सिंह कई बड़े अखबारों में काम कर चुके हैं और इन दिनों अपने गृह जनपद गोरखपुर में रहते हुए पत्रकारिता के कुछ नए प्रयोगों में जुटे हुए हैं. आनंद से संपर्क 08400536116 या 08004678523 के जरिए किया जा सकता है.


इस पुरानी पोस्ट को भी पढ़ सकते हैं:

परम अहंकारी अंजना ओम कश्यप को अनिश्चित काल के लिए फोर्स लीव पर भेज देना चाहिए

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: