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एचटी समूह से नौकरी की लड़ाई जीतकर जिंदगी की जंग हार गए सीताराम रजक!

एचटी मीडिया के छंटनीग्रस्त कर्मचारी सीताराम रजक लेबर कोर्ट से तो जीत ग‌ए मगर उसका लाभ लिए बगैर जीवन की जंग हार ग‌ए। आज पटना में आयोजित शोक सभा में लोगों ने उन्हें लड़ाकू योद्धा बताते हुए कहा कि एचटी मीडिया के दमनात्मक कार्रवाई के खिलाफ जंग जारी रहेगी…

पटना : एचडी मीडिया लिमिटेड से 15 साल पहले नौकरी से निकाले गए सीताराम रजक की अकाल मृत्यु के बाद एचटी मीडिया लिमिटेड के पत्रकारों और कर्मचारियों ने पटना के नियोजन भवन में एक शोक सभा का आयोजन कर उनके प्रति संवेदना व्यक्त कर श्रद्धांजलि दी।

बता दें कि सीताराम रजक एचटी समूह के उन 9 कर्मचारियों में से एक थे जिन्हें 18 जनवरी 2009 को कंपनी ने बिना किसी सो-काउज और नोटिस के दिए निकाल दिया था। तब से ये कर्मचारी इस अवैध छंटनी के खिलाफ श्रम न्यायालय में लड़ाई लड़ रहे थे।

इन नौ कर्मियों में से आठ के फैसले श्रम न्यायालय ने सुनाए और सभी मामलों में छंटनी को अवैध करार देते हुए रिटायरमेंट तक एक निश्चित राशि बतौर वेतन तथा उसके बाद से लेकर आज तक सूद के साथ भुगतान करने का आदेश दिया है। इस लड़ाई को लगातार बिहार पत्रकार संघ और मजीठिया वेज बोर्ड संघर्ष समिति मिलकर लड़ती रही है और कर्मियों के साथ खड़ी रही है।

श्रम न्यायालय के फैसले आए सात महीने बीत गए मगर कोर्ट के फैसले का अनुपालन नहीं हुआ। दुर्भाग्य यह है कि इन नौ लोगों में से एक रामानुज उर्फ कालीचरण थे जो सदमे को लंबे समय तक नहीं झेल नहीं पाए। पहले दिमागी मरीज़ हुए और बाद में वे मौत के आंगन में सदा के लिए सो गए।

दूसरे सीताराम रजक थे जो न्यायालय के फैसले को लेकर कभी एचटी मीडिया तो कभी न्यायालय तो कभी यूनियन कार्यालय दौड़ते रहे। अब-तब के बीच अंततः दो दिन पहले 25 जुलाई को भूख और बीमारी के चलते इस दुनिया को अलविदा कर गए।

दुर्भाग्य है कि आज छंटनी किए गए कर्मचारियों से लगाकर मजीठिया वेज बोर्ड के बकाए राशि तक राज्य के विभिन्न श्रम न्यायालय में दर्जनों मामले लंबित हैं। कुछ मामलों में फैसले आए हैं और सभी जगह मैनेजमेंट हारी है। फिर भी ये लोग बेशर्मी के साथ लड़े जा रहे हैं। क्योंकि इसकी मालकिन शोभना भरतिया को शायद इस सबसे कोई फर्क नहीं पड़ता।

गांधी के करीबी स्वर्गीय घनश्याम दास विड़ला द्वारा संस्थापित और उनके बड़े बेटे केके बिड़ला द्वारा संचालित इस संस्थान ने कभी यहां के कर्मियों का शोषण और हकमारी नहीं होने दिया मगर शोभना भरतिया के कदम रखते ही यहां सब कुछ पलट गया। न‌ए युग की माडर्न राजनीतिक गलियारों में चक्कर लगाती और कंपनी के पैसे का दुरुपयोग कर जहां-तहां बर्बाद करती जा रही हैं। यह इकलौती कंपनी रही जिसके मूर्ख मैनेजर और अंधा मालिक अपना बिजनेस और सेल्स को बर्बाद कर मुनाफे के आंकड़े और तर्क प्रस्तुत करती है।

एचटी मीडिया में कर्मचारियों और पत्रकारों को बंधुआ मजदूर बनाकर उत्पीड़न करती हैं। एच‌आर में प्रोफेशनल नहीं रखें जाते बल्कि उचक्के और बाहूबली रखे जाते हैं जो कर्मचारियों को दूध में पड़ी मक्खी की तरह बाहर कर सके। जब लेबर कोर्ट में इसके फिनांस हेड से पूछा गया कि वेज बोर्ड के फिटमेंट का फार्मूला क्या है तो बता नहीं सके।

कंपनी, वकीलों और कोर्ट को मैनेज करने के नाम पर जितना पैसा लुटा चुकी है उससे कम पैसों से कर्माचारियों के न्यायसंगत क्लेम को पूरा कर सकती थी। जानकार बताते हैं कि कोर्ट, वकील और एच‌आर की यह चौकड़ी एचटी ग्रुप का नया रैकेट है। इसमें करोड़ों का खेल है और जो इस मामले में मुंह खोलेगा उसका पत्ता साफ है।

बहरहाल, बिहार पत्रकार संघ के महासचिव दिनेश कुमार ने इस मामले में कहा कि बिड़ला संस्थान में कभी कर्मियों और पत्रकारों की हकमारी नहीं होती थी मगर शोभना भरतिया ने विरासत संभालते ही सभी की इज्जत मिट्टी में मिला दी। वहीं, संघ के अध्यक्ष आलोक बिहारी करन ने कहा कि संस्थान के पत्रकार एवं गैर पत्रकार लड़ेंगे और जीतेंगे। मगर श्रमिकों की हाय से शोभना बचेंगी नहीं।

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