परसों शाम 7 बजे के आसपास एक शराबी डॉक्टर ने स्काईटेक मट्रॉट सोसाइटी, सेक्टर 76, नोएडा के गेट पर अपनी गाड़ी से एक गरीब महिला का भयानक एक्सीडेंट कर दिया। मौके पर महिला की दर्दनाक मृत्यु हो गयी औऱ उसका बच्चा हॉस्पिटल मे है। सीसीटीवी वीडियो गायब कर दिया गया है। नॉएडा पुलिस मामले की लीपापोती करती दिख रही है।
नोएडा के सेक्टर 76 स्थित स्काईटेक मट्रॉट सोसाइटी के बाहर कल शाम लगभग सात बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। तेज गति से गुजरती एक कार ने सड़क किनारे पैदल चल रही एक गरीब महिला को जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गाड़ी चलाने वाला व्यक्ति इसी सोसाइटी में रहने वाला एक डॉक्टर है, जो कथित तौर पर शराब के नशे में था। टक्कर इतनी भीषण थी कि महिला ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि उसका छोटा बच्चा गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है।
इस हादसे के बाद स्थानीय लोग गुस्से में हैं। लेकिन मामले ने तब नया मोड़ लिया जब घटना का कोई भी वीडियो या सीसीटीवी फुटेज सामने नहीं आया। लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं के बाद आम तौर पर फुटेज या मोबाइल वीडियो सामने आ जाते हैं, पर इस बार कुछ भी उपलब्ध नहीं है। रेजिडेंट्स का आरोप है कि या तो वीडियो तुरंत मिटा दिया गया है या जानबूझकर छिपाया जा रहा है। एक स्थानीय निवासी का कहना है—“स्काईटेक से वीडियो भी नहीं मिल पा रहा है! शायद वीडियो डिलीट होना ही साजिश का हिस्सा है।” यह बयान इस पूरी घटना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
पीड़िता के परिजनों और क्षेत्रवासियों का कहना है कि नोएडा पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। आरोपी की पहचान, वाहन की जानकारी और रिकॉर्डिंग की स्थिति को लेकर पुलिस का रवैया सुस्त बताया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि प्रभावशाली व्यक्ति होने के कारण मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस पर पैसे खाकर शराबी डॉक्टर को बचाने का आरोप लग रहा है। डॉक्टर का न तो अल्कोहल टेस्ट किया गया और न ही हत्या के आरोप में जेल भेजा गया।
यह मामला अब केवल सड़क हादसे तक सीमित नहीं दिखता। इसमें एक ओर शिक्षित और संपन्न वर्ग से जुड़ा व्यक्ति है, वहीं दूसरी ओर समाज का कमजोर तबका — एक गरीब महिला जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए संघर्ष कर रही थी। घटना ऐसे समय में हुई जब बच्चा भी साथ था, जिससे सामाजिक असमानता और न्याय की पहुँच को लेकर फिर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि घटना-स्थल का सीसीटीवी और मोबाइल फुटेज तुरंत सार्वजनिक किया जाए। आरोपी चालक की मेडिकल जांच और पेशे से जुड़े सभी दस्तावेज़ों की भी जांच हो। मृतका के परिवार को मुआवज़ा और कानूनी सहायता दी जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अगर पुलिस या प्रशासन की तरफ से कोई देरी या छुपाने की कोशिश हुई हो तो स्वतंत्र जांच कराई जाए।
फिलहाल यह मामला सवालों से घिरा है — क्या एक गरीब महिला की मौत को सोसाइटी की दीवारों के भीतर दबा दिया जाएगा? क्या वीडियो फुटेज वास्तव में मिटा दिया गया है या सच्चाई सामने आने से रोकी जा रही है? जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, यह घटना केवल सड़क हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता का प्रतीक बनकर सामने खड़ी है। साथ ही पुलिस की कार्यशैली सवालिया निशानों के घेरे में रहेगी।


