सोलो ट्रिप के सुख-दुःख

श्याम मीरा सिंह-

सोलो ट्रिप ऐसा इंवेंट है जिसका चरम सुख (ऑर्गैज़म) सिर्फ़ वर्चुअल वर्ल्ड में आता है. मेरे कई दोस्त, लड़कियाँ सोलो ट्रिप पर गए/गईं. उनसे फ़ोन पर बात करो कि कैसे लग रहा है तो बोलेंगे- मज़ा आ रहा है. जबकि उनकी शक्ल पर लिखा होता है कि मज़ा नहीं आ रहा है। अब चूँकि अकेले गए हैं तो ट्रिप पर हुए खर्चे को जस्टिफ़ाई भी करना है तो कहना पड़ता है कि बहुत मज़ा आ रहा है।

सोलो ट्रिप पे भीड़ में रहने वाले लोग कभी नहीं जाते, जिनके आसपास दो चार दोस्त हैं वे ट्रिप पर भी दोस्तों के साथ ही जाते हैं। जो कहते हैं ना कि भीड़ से निकलकर सोलो ट्रिप पर आया हूँ वो घर पर भी अकेले बिस्तर में कंबल ओढ़कर इंस्टाग्राम ही चलाता है। अपना अकेलापन दूर करने के लिए बंदा सोलो ट्रिप पर गया है और वहाँ भी अकेला ही है। फिर मज़ा कहाँ ही आएगा. बालकनी व्यू देखके कुछ देर मज़ा आता है लेकिन वो ख़ुशी नहीं है. ख़ुशी लोगों से आती है. सोलो पर गए हैं तो ख़ुशी तो आप घर से ही लेकर नहीं गए.

और ज़्यादातर सोलो ट्रिप तो कपल ट्रिप होती हैं। पर चूँकि मामला घर वालों से छुपकर incognito mode पर चल रहा होता है इसलिए सोलो ट्रिप का कहकर निकल जाते हैं। मेरी एक दोस्त अपने boyfriend के साथ मनाली और कसोल गई थी, मुझे अपने Boyfriend के साथ फ़ोटो भेज रही थी और इंस्टाग्राम पर लिख रही थी हैशटैग सोलो ट्रिप। सच ये है कि सोलो ट्रिप कभी सोलो होती ही नहीं है। सोलो के साथ बाबू-बेबी भी होता है.

इन लोगों के चक्कर में हम जैसे कुछ लोग बदनाम हैं. हम सच में सोलो पर जाते हैं और लोग मानते नहीं। सोलो ट्रिप का अनुभव यही रहा कि ऐसा कुछ ख़ास मज़ा नहीं आता। जो घर के अपने कमरे में ना आता हो. अगर आप थोड़े से ऐसे आदमी हो कि साथ में एक दो लोग चाहिए ही तब सोलो ट्रिप पर भूलकर भी ना निकलें. नहीं तो दो दिन में पहाड़ खाने लगते हैं, तब लगता है कि कैसे भी मैदानी एरिया दिख जाए। दो दिन में घर लौटने का जी कर आएगा।

सोलो ट्रिप के बारे में सारी गप्पें फ़र्ज़ी हैं. बिल्कुल भी भरोसा ना करें। अतीत में किसी लोनली लौंडे ने सोलो ट्रिप की होगी। जिसे जस्टिफ़ाई करने के लिए उसने अतिरंजित करते हुए तारीफ़ की होगी कि ओहो मज़ा ही आ गया एकदम. जिसकी सुनके कुछ और लौंडे निकल गए होंगे अकेले. और ऐसे करके सिलसिला चलता गया होगा। सब अपना अपना जस्टिफ़ाई करने के लिए कपोल ख़ुशी मनाते हैं, अंदर से वे भी जानते हैं कि उनका कट चुका है। पर क्या करें तारीफ़ करनी पड़ती है। नहीं तो लोग कहेंगे पहाड़ों में भी इसे दुःख ही है.

सोलो ट्रिप से बचें… सोलो ट्रिप और घर में बिस्तर पर पैरों के नीचे कंबल दबाकर सोने का सुख एक जैसा ही है. इंस्टाग्राम पर हैशटैग सोलो ट्रिप देखके जोश में ना आएँ।



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