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सियासत

सोनम वांगचुक को देशद्रोही कहने वाले एंकर अब उनकी रिहाई के बाद क्या स्टैंड लेंगे?

लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता Sonam Wangchuk को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेने के बाद अब सरकार द्वारा उसे वापस लेने का फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है। अगर उनकी आवाज़ सचमुच देश की सुरक्षा के लिए खतरा थी तो गिरफ्तारी क्यों हुई, और अगर नहीं थी तो इतनी कठोर कार्रवाई की जरूरत क्या थी? लद्दाख के अधिकारों और पर्यावरण की बात करने वाले एक शांतिपूर्ण आंदोलनकारी पर एनएसए लगाने को लेकर Narendra Modi सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

आलोचकों का कहना है कि असहमति की हर आवाज़ को दबाने की यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। नीचे कुछ प्रतिक्रियाएं पढ़ें


शीतल पी सिंह-

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट में सरकारी बहानेबाज़ी से सुनवाई बार बार टल रही थी लेकिन सरकार की नीयत और उनकी कोशिशों का पर्दाफाश भी होता जा रहा था। तीन मिनट के भाषण का आठ मिनट का अनुवाद इसकी मिसाल था। कोर्ट कह भी रहा था कि अब बस! आख़िर सरकार ने ख़ुद NSA वापिस ले लिया। वांगचुक के रिहा होने के लिए अब अड़चन नहीं होनी चाहिए।

देश के सभ्य लोकतांत्रिक और आज़ादी पसंद समाज को अब जेएनयू के शोध छात्र उमर ख़ालिद के मामले में भी न्याय की अपेक्षा रहेगी जिसे खुद सुप्रीम कोर्ट ने लंबित कर रखा है।


रणविजय सिंह-

मोदी सरकार ने जब सोनम वांगचुक को गिरफ्तारी किया तब एंकर चीख रहे थे।

  • देशद्रोही है सोनम
  • देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है सोनम

अब मोदी सरकार ने ही सोनम वांगचुक को छोड़ने का आदेश दे दिया है। अब एंकर क्या कहेंगे?


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