
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को छल और आपराधिक न्यासभंग के एक मामले में दिल्ली की एक अदालत ने सम्मन भेजा है। उन्हे 7 अगस्त को अदालत में पेश होने का आदेश दिया गया है। इन दोनों के अतिरिक्त मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नाडिस और सैम पित्रोदा को भी समन भेजा गया है। मामला नेशनल हेराल्ड के फंड में हुयी कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है।
मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गोमती मनोचा ने समन जारी करते हुए कहा कि मुझे सभी आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत मिले हैं। अदालत उन्हें सात अगस्त को पेश होने का आदेश देती है। नेशलन हेराल्ड की स्थापना देश के पहले प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने 1938 में की थी। 2008 में यह समाचार पत्र बंद हो गया था। कोर्ट द्वारा यह समन भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत पर जारी किया गया है।
स्वामी का आरोप है कि नेशनल हेराल्ड का मालिकाना हक एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड के पास था। नवंबर 2012 में सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने कम्पनी कानून 1956 की धारा 25 के तहत एक कम्पनी की शुरुआत की जिसे ‘यंग इंडियन’ नाम दिया और इसमें प्रत्येक का शेयर 38 फीसदी था। इस कंपनी ने एसोसिएटेड जर्नल्स का अधिग्रहण किया। यही कम्पनी ‘नेशनल हेराल्ड’ और ‘कौमी आवाज’ का प्रकाशन करती थी।
एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण करने के लिए कांग्रेस के नेताओं ने यंग इंडियन कंपनी को बिना ब्याज के ऋण दिया। स्वामी का कहना है कि राजनीतिक पार्टियां व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए ऋण नहीं दे सकतीं। उनके अनुसार यंग इंडियन की डील फर्जी थी। इसमें कई कानूनों का उल्लंघन हुआ है। दिल्ली में हेराल्ड हाउस की हड़पने के लिए कथित फर्जीवाड़ा किया गया। हेराल्ड हाउस दिल्ली की प्राइम लोकेशन में स्थित है और उसकी कीमत तकरीबन 1,600 करोड़ रूपए है। स्वामी के अनुसार यह विश्वासघात का गंभीर मामला है। अगर सोनिया गांधी दोषी पाई गई तो उन्हें सात साल की जेल हो सकती है। उन्हें ट्रायल का सामना करना होगा। उन्हें बतौर आरोपी समन भेजा गया है। उनके खिलाफ प्रथम दृष्ट्या सबूत हैं।


