दीपांकर-
खेल पत्रकारिता करने के लिए इस देश में कोई स्पेशल डिग्री होती है क्या?

क्या खेल पत्रकारिता में PhD करने वाले ही खेल पत्रकारिता कर रहे हैं? इंडिया में कहां होता डिप्लोमा इन स्पोर्ट्स जर्नलिज्म? कुछ जगह होता होगा, लेकिन कितने खेल विशेषज्ञ पैदा हुए ये कोर्स करके. एक दो का नाम बताइए.
विशेषज्ञता क्या है? चूरन है? जो चार साल में चाटकर आती है? क्या जो स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट है वही विशेषज्ञ है?
अगर वो विशेषज्ञ है तो खेल-संसार से जुड़ा व्यक्ति, जो स्टेडियम में खेल देखने के लिए हजारों किलोमीटर सफर करता है, पैसा खर्च करता है, खेल पर लिखी पुस्तकें पढ़ता है, पैसा बटोर कर मैच देखने के लिए बड़ी स्क्रीन का टीवी खरीदा है, खेलों से भावनात्मक रूप से जुड़ाव रखता है, खेलों पर चर्चा करता है, वो विशेषज्ञ नहीं है?
सिर्फ इसलिए कि वो पत्रकार नहीं है, कॉपी पेस्ट करके कंटेंट नहीं लिखता क्या वो सोशल मीडिया पर खेलों पर कुछ लिख नहीं सकता? लिख देगा तो उसका मजाक उड़ाया जाएगा? कि ये आए खेल विशेषज्ञ!
सोशल मीडिया पर हर किसी को सलीके से अपनी बात रखने का अधिकार है. इंडस्ट्री में जो फिल्म क्रिटिक्स हैं वो फिल्म निर्माण में PhD करके बैठे हैं क्या?
जिनके पास पत्रकारिता की डिग्री/डिप्लोमा तक नहीं है वो पत्रकार बनकर बैठे हैं और गूगल करके हर विषय में कंटेंट लिख डाल रहे हैं, वो तो हर विषय के विशेषज्ञ बन गए हैं. और ऐसे कोई अपनी समझ से कुछ लिख देगा तो उसका मज़ाक बनाया जाएगा, हद है भाई.
और पत्रकारिता के कोर्स में कौन सी विशेषज्ञता पढ़ाई जाती है, किस विषय की विशेषज्ञता हासिल होती है? बताइए? बताइए, बताइए? मेरे पास भी है डिग्री/डिप्लोमा सब.
जहां रुचि होती है, व्यक्ति वक्त देता है विशेषज्ञता बनती चली जाती है. चाहे साहित्यकार हो, चाहे पनवाड़ी,चाहे प्रोफेसर हो,चाहे साइबर कैफे चलाने वाला चाहे किसान, चाहे बेरोजगार.
कोई भी अगर खेलों की समझ रखता है अपना टाइम खपा रहा है तो सीखेगा ही. और सीख रहा है तो सोशल मीडिया पर साझा भी कर सकता है, विशेषज्ञता किसी के बाप की बपौती नहीं. लेकिन यहां तो लोग फर्जी इन्टलेक्चुअल बनने लगते हैं, कोई ओलंपिक पर पोस्ट लिख रहा है तो खुद को विशेषज्ञ घोषित करके तो लिख नहीं रहा, उसकी भी भावनाएं हैं, उसमें लिख रहा. आप उसे विशेषज्ञ समझ क्यों रहे हैं, उसने डिक्लेयर किया क्या?
जो अयोध्या विशेषज्ञ है वो लखनऊ विशेषज्ञ भी है क्या? फिर तो उसे लखनऊ पर कुछ लिखना ही नहीं चाहिए.


