मीडिया में दिलचस्पी रखने वाले हर शख्स, पत्रकार, स्टूडेंट को ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए

“द बोस्टन ग्लोब”। कई पुलित्जर पुरस्कारों से सम्मानित। पुलित्ज़र जो पत्रकारिता के क्षेत्र का शीर्ष पुरस्कार है। ”द बोस्टन ग्लोब” में 1970 में ”स्पॉटलाइट” नाम की एक इनवेस्टिगेटिव टीम की रचना की गई। ये नया प्रयोग था। इसमें चार-पांच लोगों की टीम एक विषय पर महीनों काम करती थी। कभी-कभी साल भर एक ही खबर में लगा देते। 45 साल में स्पॉटलाइट ने 102 खोजी रिपोर्ट कीं।

1999 से 2006 तक स्पॉटलाइट के एडिटर रहे वॉल्टर रॉबी कहते हैं, “हम ऐसे लोग खोजते हैं जिन्हें समाज या वो संस्थान पीड़ा दे रहे हैं जिन पर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी है। हम उन लोगों को आवाज देते हैं जिनके पास आवाज नहीं।’ जुलाई 2001 में अखबार के नए एडिटर बने मार्टी बैरन (लीव श्रैबर)। काम के पहले ही दिन मीटिंग में उन्होंने एक कॉलम का जिक्र किया जिसमें जॉन गेगन नाम के एक पादरी के खिलाफ 87 कानूनी मामले थे।

इन मामलों के कागज़ सीलबंद और सार्वजनिक पहुंच से दूर थे। फिर स्पॉटलाइट टीम रॉबी के नेतृत्व में इस खबर में जुट गई। ये फिल्म इसी केस पर केंद्रित है जिसे बाद में पुलित्जर मिला। माइकल रिज़ेनडीज़ इस टीम के प्रमुख रिपोर्टर थे और फिल्म के प्रमुख पात्र भी वही हैं जो मार्क रफैलो ने अदा किया है। बहुत जोरदार अदा किया है। वे रिज़ेनडीज़ जैसे तो नहीं लगते लेकिन अपनी अलग ही विवेचना इस पात्र की उन्होंने की है। तत्पर से, जेबों में हाथ डाले, जुनूनी, जिद्दी, अलग उच्चारण वाले। बेस्ट एक्टर की श्रेणी में वे भी प्रभावी मौजूदगी हैं।”

पत्रकर Priyabhanshu Ranjan के फेसबुक वॉल से.

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