Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

रायटर्स संवाददाता से उबर ड्राइवर बनने को मजबूर एक विदेशी पत्रकार की कहानी

कभी रॉयटर्स के ब्यूरो हेड थे। कई नेशनल हेड का इंटरव्यू किया। शानदार स्टोरी की। फिर मीडिया पर संकट आया। जॉब चली गई। अभी उबर चलाते हैं। हर किसी का प्लान बी होना चाहिए। पढ़ें Steve Scherer के इस आईना दिखाते लेख को! -नरेंद्र नाथ मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार


अमेरिका के Washington, D.C. के पास Fairfax, Virginia में एक सुबह मोबाइल की घंटी बजती है—एक नई राइड का नोटिफिकेशन। कभी दुनिया के बड़े मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वाला एक पत्रकार अब उबर ड्राइवर के रूप में अपनी नई जिंदगी शुरू कर चुका है।

यह कहानी एक ऐसे पूर्व विदेशी संवाददाता की है, जिसने परिस्थितियों के चलते पेशा बदल लिया और अब रोज़ाना आम लोगों को उनकी मंज़िल तक पहुंचा रहा है।

अपनी पहली ही सुबह, वह एक बुजुर्ग महिला को लेने पहुंचता है, जो पेरू में पैदा हुई थी और अब अमेरिका में काम करती है। पति के निधन के बाद वह रोज़ उबर से ही अपने काम पर जाती है। यह सफर महज 7 डॉलर का था—लेकिन इस छोटी-सी यात्रा में एक पूरी जिंदगी की कहानी समाई हुई थी।

आम लोगों की असली दुनिया से सामना

उबर चलाते हुए लेखक को जिन यात्रियों से मुलाकात हुई, वे ज़्यादातर मेहनतकश लोग थे—स्कूल टीचर, अस्पताल कर्मचारी, रेस्टोरेंट वर्कर, मैकेनिक और छोटे दुकानों में काम करने वाले लोग।

सुबह-सुबह हर कोई अपने काम पर जा रहा था—कोई अस्पताल, कोई किराना स्टोर, तो कोई कैफे। ये वो लोग हैं जो शहर को चलाते हैं, लेकिन अक्सर खबरों में नजर नहीं आते।

कमाई और संघर्ष

करीब पांच घंटे में लेखक ने लगभग 130 डॉलर कमाए। लेकिन इस दौरान उसे बार-बार गाड़ी रोककर बाथरूम ढूंढना पड़ा—जो इस काम की एक अलग ही चुनौती है।

एक वक्त पर वह खुद से कहता है— “डोनाल्ड ट्रम्प का अमेरिका—यही है।” यह वाक्य सिर्फ एक टिप्पणी नहीं, बल्कि उस सिस्टम की झलक है जिसमें मेहनतकश लोग रोज़मर्रा की जद्दोजहद में लगे हैं।

पत्रकार से ड्राइवर बनने का सफर

यह बदलाव सिर्फ नौकरी का नहीं, बल्कि पहचान का भी है। कभी अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वाला पत्रकार अब आम लोगों के जीवन को बहुत करीब से देख रहा है—बिना किसी कैमरे या माइक्रोफोन के।

बड़ा सवाल

यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस बदलती दुनिया की है जहां

  • नौकरी की स्थिरता कम हो रही है
  • गिग इकॉनमी (जैसे Uber) बढ़ रही है
  • और पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स भी नई परिस्थितियों में ढलने को मजबूर हैं

यह सफर दिखाता है कि खबरें सिर्फ सत्ता के गलियारों में नहीं, बल्कि सड़कों पर भी बनती हैं—जहां हर राइड एक नई कहानी है।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन