
सचिन गुप्ता-
उत्तराखंड STF के IG ने X को 35 हैंडल की लिस्ट भेजी है, जिन्होंने केदारनाथ यात्रा में अव्यवस्थाओं/हंगामों से जुड़े ट्वीट किए थे। IG ने X को बताया है कि यह पोस्ट भारत के कानून का उल्लंघन करते हैं।
इसमें एक पोस्ट वह भी है, जिसमें एक व्यक्ति की हार्टअटैक से मौत हो गई और लाश हेलीकॉप्टर से नीचे भिजवाने में देरी हुई। यह पोस्ट वरिष्ठ पत्रकार अजीत सिंह राठी जी ने किया था
बाकी X पोस्ट केदारनाथ धाम में हंगामा, लाठीचार्ज, धक्का–मुक्की, मुस्लिम खच्चर वाले से अभद्रता, मोदी–मोदी पुकारते बच्चे से विवाद से संबंधित हैं। उत्तराखंड पुलिस चाहती है कि सोशल मीडिया पर सब अच्छा–अच्छा दिखे, बुरा दिखे भी तो आंख–नाक–कान बंद कर लिए जाएं।
उत्तराखंड STF ने कल रात मुझे एक नोटिस दिया है, नोटिस को ‘X’ के माध्यम से भिजवाया है। नोटिस मेरी उस पोस्ट पर है जिसमें मैंने केदारनाथ में गुजरात के श्रद्धालु की मौत के बाद डेडबॉडी नीचे लाने के लिए समय से हेली नहीं मिलने का उल्लेख किया है।
मैं STF को भरोसा दिलाता हूँ कि मैं पोस्ट डिलीट नहीं करूँगा क्योंकि मेरी पोस्ट पूर्णत: तथ्यों पर आधारित है, और यह भी भरोसा दिलाता हूँ कि पुलिस जाँच में पूरा सहयोग करूँगा। IG STF नीलेश आनंद भरणे, जिन्होंने ये नोटिस जारी किया है, जब भी कहेंगे मैं सबूतों के साथ उपस्थित हो जाऊँगा।
यहाँ पर यह उल्लेख करना ज़रूरी है कि मेरी पोस्ट आयातित नहीं है, वो मेरी अपनी संपत्ति है। मैं मौक़े पर मौजूद था, मैंने अपने फ़ोन में मृतक श्रद्धालु के पुत्र हेमंत माली की बातचीत रिकॉर्ड की, जो अभी भी मेरे पास है। मेरे पास इस पोस्ट के अलावा भी बहुत कुछ है, STF क्या चाहती है पहले यह स्पष्ट हो जाय।
STF के नोटिस में इस जानकारी का घोर अभाव है कि मेरी पोस्ट अवैधानिक, तथ्यों से परे या पत्रकारिता के मापदंडों का उल्लंघन कैसे करती है और कैसे चार धाम यात्रा के संचालन में बाधा उत्पन्न करती है। मुझे खुशी होगी यदि STF मेरे सवालों का भी जवाब देती है तो! -अजीत सिंह राठी, वरिष्ठ पत्रकार
एक मसला यह भी देखिए…
सुशांत सिंह-
सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि जिस प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है और सोशल मीडिया पर जिस तरह के कंटेंट हटाए जा रहे हैं, वह आधिकारिक आपातकाल के दौरान अखबारों पर लागू सेंसरशिप से भी कहीं ज्यादा खराब और मनमाने प्रतीत होते हैं।



