तिहाड़ में सुव्रत रॉय ने संपादकों को फटकारा, सहारा के चैनल बंद करने और अखबार कर्मियों की छंटनी का अल्टीमेटम

दिल्ली : राष्ट्रीय सहारा ग्रुप के मालिक सुव्रत रॉय ने तिहाड़ जेल के गेस्ट हाउस में अपने मीडिया स्टॉफ को लगातार हो रहे घाटे के कारण चैनल बंद कर देने की धमकी दी। अखबार में स्टॉफ ज्यादा होने की बात करते हुए उन्होंने एडिटर्स और यूनिट मैनेजर्स को छंटनी की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगले महीने मैं जेल से बाहर आ रहा हूं। सब ठीक कर दूंगा। 

रॉय द्वारा बुलाई गई इस इमेरजेंसी मीटिंग में उनके चैनलों और अखबारों के कुल 30 संपादक और प्रबंधक शामिल हुए। मीटिंग में देहरादून, पटना, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर यूनिटों से संपादकों एवं मैनेजरों ने भाग लिया लेकिन बनारस से केवल संपादक ही उपस्थित रहे। इनके अलावा दिल्ली यूनिट से छह में से पांच संपादक और मीडिया संयोजक राजेश सिंह ने शिरकत की। इनके अलावा चैनलों का स्टॉफ रहा।   

सूत्रों के मुताबिक मीटिंग में सुव्रत रॉय ने पूरे उपस्थित अपने पूरे स्टॉफ को संस्थान के मौजूदा हालात से निपटने के लिए समझाया कम, फटकारा ज्यादा, इससे सभी संपादक और मैनेजर अपनी अथवा मीडियाकर्मियों की वैतनिक दिक्कतें बताने की बजाय सुव्रत राय की सारी प्रिय-अप्रिय बातें प्रवचन की तरह सुनते और जीहुजूरी करते रहे। 

जेल के गेस्टहाउस में सहारा के सारे एडिटर्स और यूनिट मैनेजर्स की मीटिंग में सुव्रत रॉय ने सबसे कड़ी फटकार चैनल प्रबंधन को लगाई। कहा कि लंबे समय आप लोग चैनल घाटे में चला रहे हैं। ऐसा कब तक चलेगा। नहीं संभाल पा रहे हैं तो चैनल बंद कर दिए जाएंगे। अब और अधिक घाटा नहीं उठाया जा सकता है। उनके एकतरफा प्रवचन से उपस्थित संपादक, मैनेजर इतने दबाव में रहे कि जैसे घिग्घी बंध गई हो। वे अपनी तरफ से सहारा कर्मियों की मुश्किलें बताने की बजाए पूरे समय अपनी नौकरी बचाने की खातिर भांति-भांति से चापलूसी करते रहे। इसलिए मीटिंग में न तो पांच माह से सैलरी न मिलने की बात उठी, न कर्मचारियों के अन्य किसी प्रकार के लेन-देन की। मैनेजर, एडिटर बस एक ही रट लगाए रहे कि सर आप जल्दी से बाहर आ जाइए। हम जी जान से लगे हुए हैं। 

सुव्रत रॉय ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। सब ठीक हो जाएगा। मैं मई में बाहर आ रहा हूं। काम ठीक से करो। स्टाफ ज्यादा है, उसे कम करो। शांति पूर्ण ढंग से सब संतुलित किए रहो ताकि अंदर कोई असंतोष न बढ़े। 

बताया जाता है कि सुव्रत रॉय ने ये इमेरजेंसी मीटिंग पिछले दिनो दिल्ली में वेतन के लिए चैनल के स्टॉफ द्वारा मैनेजमेंट से गाली-गलौज, हंगामा, घेराव के कारण बुलाई थी। रॉय को लगा था कि मैनेजमेंट स्टॉफ को ठीक से संभाल नहीं पा रहा है। मीटिंग में चैनल वाले अपना दुखड़ा क्या सुनाते, कुर्सी बचाने के चक्कर में मालिक के प्रवचन से अभिभूत ‘गुड सहारा गुड सहारा’ करते हुए मुंह लटकाए वापस हो लिए। और इस तरह मीडिया कर्मियों के पांच माह के वेतन बकाए का असली मुद्दा धरा-का-धरा रह गया। 

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Comments on “तिहाड़ में सुव्रत रॉय ने संपादकों को फटकारा, सहारा के चैनल बंद करने और अखबार कर्मियों की छंटनी का अल्टीमेटम

  • saharasri ke samne sampadak bol nahi paye aur jab office ayenge toh apne ko tismarkhan batayeng. sharm karo bade ke sampadkon. Aise sampadkon ki najar me uske khas chatukar reorter sabse mehnati hai. Tum sabhi sampadkon ka itihas ban raha hai.

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  • sahara shri ne bahut achi baat kahi he
    par jo chatni ki baat ki he wo bhi sahi he
    sahara shri ko un logo ko nikalna chahiye jo fokat me baith ke salary le rahe he
    aise logo ki ek list bnani chahiye
    ke aise kitne log hai jo sahara ka kuch nahi karte aur un ki salary bahut zyada he
    un logo ki wajah se bechare kam salary wale jin ki salary 7 thousand se 14 thousand he wo log maare jaa rahe he
    faltu logo ki chatni karke kam salary walo ki salary badhani chahiye

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  • sahara shri ne jo bhi kadam uthaya hai wo sahi he. sahara me aise bahut se staff he jin ki salaray lakh rupees he par un ke paas karne ko koi kaam nahi hai. un logo ki pehli chatni karni chahiye ta ki jin ki salary 14 se 15 hazar he un ko thoda fayda mil sake .
    meri bhi sahara shri se request he ke un logo ko nikal kar sahara ki buniyaad majboot kare. aur jald se jald
    sahara parnam

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  • media reportar says:

    Mere aadarsh Sahara sri bhadas media se malum huaa ki aapne apne media ke adhikariyon ke klaas ler sach maaniye mera jee juraay gaya. Ye isee ke kaakabil hai . Aapne kaha ki akhbaar aur chainal kayde se chalaavo ab ghaataa bardaast nahee kar dakte band kar denge .. apnee gaand ka guh doosre ke gaand me kyo lagaa rahe hain ? Media ki nakel to aapke haanth me thee . Koee aapkee marjee ke khilaf ja sakta thaa kya . Rahe ghate ki baat to kisko ullu bana rahe hain . March me 5.71 karond ka munafa nahee huaa . Aapne kaha karmchari jyada hain . Aapko nahe malum jabse jel me ho aadhe se jyada log sansthan ko Sahara pranam ka chale gaye. Agar chatne ki soch rahe ho to ek maheen me pej lagana seekh lo kaam aayega. Logon ko nikalne ki dhamki mat do log tumhare yahan aakar khud ko
    Thaga mahsoos kar rahe hain. Majeetheeya ke hisaab se ful & faainal pement ki ghoshna kar do chamche hi bache rah jaayenge..

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