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दिल्ली

सुधीर चौधरी और प्रसार भारती का ये क्या लफड़ा है जो पहुंच गया दिल्ली हाईकोर्ट?

नई दिल्ली | दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में तगड़े करार के साथ डीडी न्यूज़ में पहुंचे वरिष्ठ पत्रकार और एंकर सुधीर चौधरी के हक में बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने कहा है कि सोशल मीडिया पर सुधीर चौधरी से जुड़ी कोई भी फेक या AI से बनाई गई (deepfake) वीडियो या पोस्ट अगर चल रही है, तो उसे 48 घंटे के अंदर हटा दिया जाए।

जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने साफ कहा है कि सुधीर चौधरी का नाम, आवाज़, चेहरा या पहचान बिना उनकी इजाजत के कहीं इस्तेमाल नहीं की जा सकती। अगर किसी ने उनके खिलाफ कोई भ्रामक कंटेंट डाला है और वो खुद नहीं हटाता, तो गूगल या मेटा जैसे प्लेटफॉर्म उसे अपने आप हटा देंगे।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि जिन लोगों ने ऐसा कंटेंट अपलोड किया है, उनकी जानकारी तीन हफ्ते में सुधीर चौधरी को दी जाए ताकि आगे उन पर कार्रवाई हो सके।


प्रसार भारती वाला मामला क्या है

दिल्ली हाई कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें यह कहा गया था कि दूरदर्शन और आकाशवाणी (प्रसार भारती) को BCCI की टीम को “टीम इंडिया” या “भारतीय राष्ट्रीय टीम” कहने से रोका जाए।

याचिकाकर्ता वकील रीपक कंसल का कहना था कि BCCI एक निजी संस्था है, जो तमिलनाडु सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है, इसलिए इसे “राष्ट्रीय टीम” के रूप में पेश करना गलत और भ्रामक है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा करने से BCCI को अनुचित फायदा मिलता है।

लेकिन मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की बेंच ने इस याचिका को अदालत के समय की बर्बादी बताते हुए खारिज कर दिया।

कोर्ट ने साफ कहा कि BCCI जब अपने मैचों में भारतीय झंडा या प्रतीक इस्तेमाल करती है, और दूरदर्शन या आकाशवाणी उसे प्रसारित करते हैं, तो इसमें किसी कानून का उल्लंघन नहीं होता।

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