Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

महाराष्ट्र

सुशांत, शिवसेना, सुप्रीमकोर्ट, सीबीआई और सरकार पर संकट !

सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में जांच भले ही सीबीआई को सौंप दी हो लेकिन अभी भी राजनीति रुकने का नाम नहीं ले रही। दिल्ली और बिहार से लेकर मुंबई तक इस मामले में राजनीति देखने व सुनने को मिल रही है। पूरे मामले में साफल लगता रहा कि राजनीतिक दबाव के कारण महाराष्ट्र पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया है। अब लगने लगा है कि महाराष्ट्र सरकार संकट में है।

-निरंजन परिहार

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार विपक्ष के साथ अपनों के भी निशाने पर है। सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले को सीबीआई को सौंप दिया है। इस मामले में बीजेपी तो शुरू से ही शिवसेना पर हमलावर रही, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद कांग्रेस और एनसीपी के नेता भी शिवसेना के रुख पर खुलकर बोल रहे हैं। इस केस की जांच के मामले में शिवसेना पर शुरू से ही उंगली उठती रही है। कांग्रेस और एनसीपी महाराष्ट्र सरकार में शिवसेना की सहयोगी पार्टियां है और इनके नेताओं व मंत्रियों द्वारा इस मामले में बयानों की वजह से सरकार की एकता में फूट साफ दिखाई दे रही है। कांग्रेस के तेजतर्रार नेता संजय निरूपम, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री असलम शेख और एनसीपी के शरद पवार, पार्थ पवार सहित गृह मंत्री अनिल देशमुख के बयानों सहित बिहार कांग्रेस के नेताओं के बयान इस मामले में शिवसेना पर हमले के रूप में देखे जा रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर सीबीआई जांच से शिवसेना परेशान क्यों हैं। सरकार में शामिल अपनों के ही हमलावर रुख को देखकर माना जा रहा है कि सरकार हिल रही है।

शिवसेना शुरू से ही सुशांत सिह मामले में शक के दायरे में दिखती रही। उसके नेताओं के बयान भी जैसे किसी के बचाव की मुद्रा वाले ही हमेशा लगे और यह भी साफ लगता रहा कि किसी न किसी को तो इस मामले में बचाने की कोशिश हो रही है। हालांकि शुरू से ही महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्री का नाम सुना जाता रहा, लेकिन मुख्यमंत्री के बेटे आदित्य ठाकरे ने जब एक बयान में कहा था कि वे सड़क छाप राजनीति नहीं करते, उनका नाम यूं ही घसीटा जा रहा है, तो सभी को लोगों को लगा कि जिस मंत्री का नाम लिया जा रहा है, वह आदित्य ठाकरे ही हो सकते हैं। लेकिन 14 जून को हुई वारदात को दो महीने से भी ज्यादा वक्त बीत जाने के बावजूद एफआईआऱ दर्ज नहीं होना, मुंबई पुलिस की भूमिका स्पष्ट न होने और शिवसेना के नेताओं की अनाप शनाप बयानबाजी ने इस मामले की जांच पर शक पैदा कर दिया। इसके अलावा बिहार पुलिस की टीम को जांच न करने देना और एक पटना पुलिस के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को जांच के लिए मुंबई आने पर कोरोंटाइन कर दिए जाने से शिवसेना और सरकार की इस मामले में सपष्ट संदेहास्पद भूमिका सामने आई।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 16 अगस्त की सुबह सीबीआई को जांच सौंपे जाने के बाद अब महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार पर अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले चौतरफा हमले शुरू हो गए हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता संजय निरुपम ने कहा कि मुंबई पुलिस इस मामले को नाहक प्रतिष्ठा का प्रश्न न बनाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करे और सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु की जांच सीबीआई को सौंप दे। निरुपम ने यह भी कहा कि मुंबई पुलिस की क्षमता पर किसी को शक नहीं है। लेकिन इस मामले की जांच में ढिलाई बरती जा रही थी, यह दिख भी रहा था। मगर इस ढिलाई का कारण तो सरकार ही जानती है। महाराष्ट्र सरकार में कांग्रेस के कोटे से मंत्री असलम शेख ने भी एएनआई से बातचीत में सीबीई जांच का स्वागत करते हुए कहा कि अगर इस मामले में केंद्र चाहता है कि जांच सीबीआई करे, तो होने देना चाहिए। महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे एनसीपी के नेता पार्थ पवार ने भी ट्वीट करके कहा – सत्यमेव जयते। इस मामले में महाराष्ट्र पुलिस पर लेकर उठ रहे सवालों पर 13 अगस्त को ही शरद पवार ने भी कहा था कि सीबीआई जांच कराए जाने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने भी कहा है कि वे सुशांत सिंह राजपूत मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हैं। देशमुख ने यह भी कहा कि सीबीआई को जो भी सहयोग की आवश्यकता होगी, वो दी जाएगी।

अभिनेता सुशांत सिंह केस की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है, लेकिन इस केस में शिवसेना अपनी भूमिका पर अड़ी हुई है। यह उसके नेताओं के बयानों से साफ है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि सीबीआई को जांच सौंपने की कोई जरूरत नहीं थी। राऊत ने कहा कि मुंबई पुलिस जांच के लिए पूरी तरह सक्षम है। मगर बिहार चुनाव की वजह से मामले में राजनीति हो रही है। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले को सीबीआई को सौंप दिया है, तो शिवसेना सन्न है क्योंकि सरकार गिरने की बातें भी सुनने को मिल रही है। सरकार में शामिल तीनों दलों में मतभेद भी लगातार बढ़ रहे हैं। ताजा बयानबाजी के संकेत भी साफ हैं। उधर, बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसके स्पष्ट संकेत देते हुए कहा है कि दोस्तों जल्दी ही सुनेंगे महाराष्ट्र सरकार जा ‘रिया’ है। शिवसेना का रक्षात्मक रुख, उसके साथ सरकार में शामिल कांग्रेस व एनसीपी के सीधे हमले और संबित पात्रा के बयानों के अलावा महाराष्ट्र भाजपा के दो बड़े नेताओं प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल और हर मामले में बहुत आक्रामक तेवर दिखानेवाले विपक्ष के नेता देवेंद्र पडणवीस की रहस्यमयी चुप्पी किसी बड़ी राजनीतिक उथल पुथल के साफ सकेत दे रही है। शिवसेना शायद इसीलिए सुशांत सिंह की मौत का केस सीबीआई को सौंपे जाने से ज्यादा परेशान हैं।

(लेखक निरंजन परिहार राजनीतिक विश्लेषक हैं)

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन