Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

देश का लोहा, महंगी कारें: टाटा-महिंद्रा की आपत्ति से गरीबों की सुरक्षा में लगी सेंध!

सुभाष सिंह सुमन-

कोई कॉरपोरेट जब राष्ट्रवाद बेचने लगता है, तो मुझे उसके प्रोडक्ट पर संदेह होने लगता है। यदि आप अच्छी गुणवत्ता की चीजें बना रहे हैं, तो वह अपनी गुणवत्ता के दम पर अपना बाजार बना ही लेगी। हजारों उदाहरण भरे पड़े हैं इसके। लेकिन यदि गुणवत्ता में कमी है तो आपको बाजार बनाने के लिए बैसाखियों की जरूरत पड़ेगी। भावना बड़ी कारगर बैसाखी है। अब भावना अगर राष्ट्रवाद की लहर पर सवार होकर आये, फिर तो मारक है। डेडली कॉम्बो।

भारत में कई कंपनियाँ ऐसा करती हैं। खासकर कई कार कंपनियाँ। देश का लोहा, देसी टेस्ला वगैरह-वगैरह। इनमें टाटा जैसे दिग्गज भी हैं और ओला जैसे नये-नवेले भी। इन्होंने अपनी कार-स्कूटर बेचने के लिए भावना में लपेटकर देश बेचा है।

लेकिन अब एक मजेदार बात बताता हूँ। इस बात से टाटा-महिंद्रा फैनबॉयज बड़े आहत होंगे। कुछ तो यहाँ भी आकर अपने संस्कार दिखाने लगेंगे।

यह एक तथ्य है कि भारत सबसे असुरक्षित सड़कों वाला देश है। 2025 का पूरा डेटा अभी मिला नहीं। दिसंबर में नितिन गडकरी ने संसद में 2024 का डेटा रखा था। डेटा है कि 2024 में देश भर में सड़क दुर्घटनाओं में 1.77 लाख से अधिक लोग मरे। मने प्रति दिन का औसत 485 लोगों का निकल रहा है। इस हिसाब से महामारी है यह। दुनिया में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या भारत में सर्वाधिक है।

पीटीआई की एक रिपोर्ट है, 15 जनवरी 2026 की। रिपोर्ट सरकारी आँकड़ों से बताती है कि 2019 से 2023 के दौरान देश में सड़क दुर्घटनाओं के कारण 7.78 लाख से अधिक लोग मरे। इनमें 3.35 लाख लोग दोपहिया सवार थे। यानी देश में सड़क पर जो मौतें हो रही हैं, उनमें आधे से ज्यादा स्कूटर-मोटरसाइकिल वाले हैं।

स्कूटर-मोटरसाइकिल से कौन चल रहे हैं? स्वाभाविक उत्तर है गरीब या निम्न मध्यम वर्ग। लाख-डेढ़ लाख में उन्हें साधन मिल जा रहा है। भारत में अभी कुल जितने पंजीकृत वाहन हैं, उनमें 70-75 फीसदी दोपहिया हैं। संख्या करीब 30 करोड़।

कई एक्सपर्ट बोलते हैं। मैं एक्सपर्ट नहीं, फिर भी बोलता हूँ। कि एक मोटरसाइकिल से कई गुणा सुरक्षित है नैनो और ऑल्टो जैसी कार। ऐसा नहीं है कि कार में चल रहे हैं तो दुर्घटना नहीं हो सकती है या जान नहीं जा सकती है, लेकिन मोटरसाइकिल या स्कूटर की तुलना में मरने की संभाव्यता बहुत कम हो जाती है। ऊपर सरकारी आँकड़े यही बात बता रहे हैं।

अब सरकार एक नया नियम ला रही है। इसका मसौदा तैयार हुआ। मसौदे में सरकार ने प्रस्ताव रखा- 910 किलोग्राम से कम वजन वाली कारों पर रियायत दी जाये। यह छूट छोटी कारों की कीमतें कम कर देती। कम इस तरह से कि नये नियम में ईंधन और उत्सर्जन को लेकर जो प्रावधान हैं, उनसे कीमतें ठीक-ठाक बढ़ेंगी। नियम अगले साल लागू होगा। सरकार की इच्छा थी कि छोटी कारों पर इसका अधिक असर न हो। छोटी कारों की कीमतें अधिक न बढ़ें। उद्देश्य साफ था- दोपहिया से पहली कार की ओर बढ़ रहे गरीबों-निम्न मध्यम वर्गीय लोगों के कदम बढ़ते रहें।

लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। कारण? देश का लोहा बेचने वाली कंपनी को आपत्ति हुई। टाटा को साथ मिला महिंद्रा का। इन दोनों को साथ मिला तमाम विदेशी कंपनियों का। जबरदस्त लॉबी बनी। लॉबी ने बात बना ली। सरकार ने छोटी कारों को कंसेशन देने का प्लान ड्रॉप कर दिया। रॉयटर्स ने इसके बारे में विस्तार से रिपोर्ट तैयार की है।

राष्ट्रवाद का झंडा ढोने में सबसे आगे है गरीब और निम्न मध्यम वर्ग। उच्च मध्यम वर्ग और अमीरों को इन चोंचलों से अधिक फर्क नहीं पड़ता। वाद कोई भी रहे, उसे बढ़ने से मतलब रहता है। छोटी कारें कौन खरीदता है? जवाब है गरीब और निम्न मध्यम वर्ग। सरकार के कंसेशन वाले प्लान के ड्रॉप होने से क्या होगा? छोटी कारों की कीमतें भी ठीक-ठाक बढ़ेंगी। इससे कौन मोटरसाइकिल चलाते रहने के लिए अभिशप्त होगा? निश्चित ही गरीब और निम्न मध्यम वर्ग। अब इस पोस्ट पर टाटा-महिंद्रा फैनबॉयज बनकर स्पैम फैलाने कौन आयेगा? निश्चित ही गरीब और निम्न मध्यम वर्ग। इतना फुर्सतिया और होगा भी कौन!

टाटा और महिंद्रा समेत तमाम विदेशी कंपनियों को आपत्ति थी कि इस छूट से सारा फायदा मारुति ले जायेगी। इसपर पूछा जाना चाहिए था कि भाई तुम्हें किसने रोक दिया छोटी कार बनाने से? तुम लोग भी बनाओ छोटी कार। दो उसमें मारुति की तरह रिफाइन इंजन। बनाओ मारुति जैसा सर्विस नेटवर्क। लेकिन सरकार तो पिरामिड के सबसे ऊपर से संचालित है, जहाँ सबसे कम फुर्सत रहती है।

(मेरे पास छोटी और मंझोली दोनों कारें हैं। उन्हीं की तस्वीर है (सबसे ऊपर)। एक तो महिंद्रा ही है। छोटी वाली इसी दिसंबर में और बड़ी हो गयी होती। बुक करते-करते दिमाग में नयी खुराफात आ गयी। तो यदि किसी को बहुत जोर से मेरी चिंता हो, उसे स्थगित करके खुद पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। बाकी, आँकड़ों के सारे स्रोत नीचे मिल जायेंगे।)

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन