‘तहलका’ की हालत दयनीय, पांच महीने से नहीं मिली सेलरी, मैनेजमेंट चुप

जब से नया निजाम (केडी सिंह) आया है तब से मैनेजमेंट और संपादकीय के बीच संवादहीनता बढ़ी है. तहलका की अंग्रेजी और हिंदी दोनों मैग्जीन के बंद होने संबंधी खबर न्यूज रूम के भीतर तैर रही है. फील्ड रिपोर्टिंग के लिए फंड ठीक से नहीं मिल रहा है. पहले हर महीने की सात तारीख को सेलरी मिलती थी. लेकिन इस महीने की सेलरी अभी तक नहीं मिली है. सेलरी देरी से मिले फिर भी कोई बात नहीं, लेकिन आश्चर्यजनक है मैनेंजमेंट की चुप्पी.

संपादक तक को नहीं पता कि इस महीने की सेलरी कब तक मिलेगी. दोनों पत्रिकाओं के संपादकीय टीम में लोगों की भारी कमी है. लेकिन कोई नई नियुक्ति नहीं हो रही है. पिछले दिनों तीन बड़ी नियुक्तियां हुई थीं. उम्मीद बंधी थी कि शायद अब कोई बदलाव दिखेगा लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा. सब कुछ जस का तस है. पांच महीने का सेलरी प्रबंधन दबाए हुए है. कुल मिलाकर तहलका की हालत दयनीय हो चली है और सबसे ज्यादा खराब हाल में हैं यहां काम कर रहे बचे हुए मीडियाकर्मी.

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