ड्रग की आड़ में बालीबुड पर शिकंजा कसने के पीछे कोई बड़ा अजेंडा तो नहीं!

-श्रीप्रकाश दीक्षित-

एम्स दिल्ली की फोरेंसिक टीम को सुशांत के शव में जहर नहीं मिला है. उधर सितारे के पिता द्वारा रिया चक्रवर्ती पर 15 करोड़ हजम करने के आरोप की भी हवा निकल चुकी है.

सुशांत की पूर्व सेक्रेटरी दिशा की ख़ुदकुशी और इसको लेकर प्रचारित की गईं कहानियों में भी लगता है कुछ नहीं मिला. तभी सीबीआई जांच पर कोई, खासतौर पर खबरिया चैनल, ध्यान नहीं दे रहे हैं.

अब पूरा ध्यान नशीली दवाओं के इस्तेमाल को लेकर बालीबुड को घेरने पर दिया जा रहा है और रातोंरात नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के दिन फिर गए लगते हैं! उधर एक अनजानी सी अदाकारा गैंग्स ऑफ़ वासेपुर जैसी फिल्म बनाने वाले अनुराग कश्यप पर साल भर बाद यौन प्रताड़ना का आरोप मढ़ कर चैनलों की सेलेब्रिटी बन गई है.

ऐसे में विख्यात लेखिका शोभा डे द्वारा टाइम्स ऑफ़ इंडिया में लेख के मार्फ़त उठाए गए सवालों पर गौर किया जाना चाहिए.

वो पूछती हैं कि क्या देश में फ़िल्मवालों के ड्रग सेवन के अलावा कोई और भीषण त्रासदी या समस्या नहीं है? यदि नहीं तो फिर बी ग्रेड राजनेताओं, साधुओं, बिजनेसमैन और व्यापारियों के ड्रग सेवन पर ख़ामोशी का आलम क्यों है.

शोभाजी पूछती हैं कि बालीबुड में नशीली दवाओं के लिए केवल अभिनेत्रियों को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? उन्हें आशंका है कि बालीबुड पर ड्रग की आड़ में शिकंजा कसने के पीछे कोई बड़ा अजेंडा तो नहीं है?

प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने इंडियन एक्सप्रेस में बालीवुड को राष्ट्रीय धरोहर बताया है. उनके मुताबिक़ राजनैतिक उद्देश्यों के लिए इसकी विश्वसनीयता कम करने की कोशिशें राष्ट्रहित को नुकसान पहुंचाएंगी.



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