कोरोना काल में पत्रकारों की हुई छंटनी को बयां करती है ‘द लिस्ट’

नीलकंठ पारटकर, मुंबई

कोविड काल में माध्यमों खासकर अखबारों को अपने आप को बचाने कई तरह के पापड़ बेलने पड़ रहे हैं. लेकिन सबसे ज्यादा मार पत्रकारों को ही झेलनी पड़ रही है. एक तरफ जान जोखिम में डालकर कवरेज करो दूसरी ओर वर्क फ्राम होम के चक्कर में ज्यादा काम और कम दाम मिल रहा है.

पिछले कोरोना काल और इस बार भी कई अखबारों में बड़े पैमाने पर पत्रकारों की छंटनी हुई है. लेकिन दुनिया के रंजों गम को बतानेवाली पत्रकार बिरादरी अपने घर में मचे घमासान पर चुप्पी साधे हुए है.

चंडीगढ के पत्रकार साथियों ने खामोशी तोड़कर पत्रकारिता को आईना दिखाने की कोशिश की है, एक बेहतरीन फिल्म के जरिये. फिल्म का नाम “द लिस्ट: मीडिया ब्लड बाथ इन कोविद टाइम्स ” है. इसे एबीसी टाकीज के ओटीटी प्लेट फार्म पर देखा जा सकता है.

फिल्म एक अखबार से शुरू होती है जिसका स्टाफ करोना काल में वर्क फ्राम होम कर रहा है. अचानक प्रबंधन कास्ट कटिंग के बहाने कुछ लोगों को निशाना बनाता है. कुछ रिपोर्टर सत्रह अठारह साल से अखबार से जुड़े हैं, कुछ महिला रिपोर्टरों की अपनी निजी समस्यायें हैं लेकिन कसाई की तरह प्रबंधन के पास एक ही हथियार है, छंटनी.

तो क्या दो नाव पर सवार संपादक, एच आर प्रबंधन के लोग कोरोना लहर से बच जायेंगे?

यह जानने के लिये आपको यह फिल्म देखनी पड़ेगी. फिल्म का लेखन निर्देशन महेश राजपूत ने किया है. मनोज शर्मा, रश्मी भारद्वाज, संजीव कौशिक, आकांक्षा शांडिल्य, साहिर बंटवाल, गुरविंदर सिंह, जसप्रीत कौर ने अपने अभिनय में जान डाल दी है. गोपाल राघानी का संपादन चुस्त है.

भड़ास की खबरें व्हाट्सअप पर पाएं
  • भड़ास तक कोई भी खबर पहुंचाने के लिए इस मेल का इस्तेमाल करें- bhadas4media@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *