गाज़ा। गाज़ा में इज़राइली हमलों के बीच पत्रकारों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को मध्य गाज़ा में हुए एक हवाई हमले में तीन पत्रकारों की मौत हो गई, जो ज़मीनी हालात की रिपोर्टिंग कर रहे थे। तीन पत्रकारों के अलावा मृतकों में दो बच्चे और 11 नागरिक शामिल हैं।
मृत पत्रकारों की पहचान अनस घुनैम, अब्दुल रऊफ शाथ और मोहम्मद क़ेश्ता के रूप में हुई है। बताया गया कि ये तीनों एक राहत संगठन से जुड़े होकर मध्य गाज़ा के नेतज़ारिम कॉरिडोर के पास घटनास्थल की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे, तभी उनके वाहन पर हवाई हमला किया गया। इस हमले में उनके साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति की भी मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों और मेडिकल सूत्रों के मुताबिक, हमला उस समय हुआ जब पत्रकार एक नव स्थापित विस्थापन शिविर की कवरेज कर रहे थे। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में उनका वाहन पूरी तरह जला हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे यह साफ है कि हमला बेहद घातक था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जिस वाहन में पत्रकार सवार थे, उसकी पहचान पहले से राहत कार्य से जुड़े वाहन के रूप में थी। इसके बावजूद उसे निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, इज़राइली सेना की ओर से दावा किया गया है कि जिस वाहन पर हमला किया गया, उसमें सवार लोग कथित तौर पर ड्रोन के जरिए सैन्य गतिविधियों की जानकारी जुटा रहे थे।
पत्रकार संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि संघर्ष क्षेत्रों में रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों पर इस तरह के हमले स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा हमला हैं। गाज़ा में अब तक कई मीडिया कर्मियों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद जमीनी सच्चाई सामने लाने का काम जारी है।
तीन पत्रकारों की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि युद्ध के बीच सच दिखाने की कीमत आखिर पत्रकारों को अपनी जान देकर क्यों चुकानी पड़ रही है।
गौरतलब है कि युद्ध शुरू होने के बाद लेकर 11 अगस्त 2025 तक लगभग 274 पत्रकार और मीडिया कर्मी मारे गए, जिनमें से लगभग 269 फ़िलिस्तीनी थे, कई स्थानीय मीडिया कार्यालयों और पत्रकार संगठनों का विवरण है।
अन्य अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार: Reporters Without Borders (RSF) के डेटा के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद कुल मिलाकर लगभग 220 पत्रकारों की मौत हो चुकी है, और उनमें से कई स्थानीय पत्रकार हैं जो गाज़ा में संघर्ष की कवरेज कर रहे थे।


