
संजय कुमार सिंह
मैंने कल यहां लिखा था कि दिल्ली लगातार सात साल से दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी है पर यह खबर दिल्ली के अखबारो में भी पहले पन्ने पर नहीं छपी। पाकिस्तान में ट्रेन अपहरण को ज्यादा महत्व दिया गया था आज उसके खूनी अंत की खबर है लेकिन उसे छोड़कर सरकारी प्रचार को लीड बनाया गया है। अमर उजाला की लीड है, तीन आईआईटी और दो आईआईएम समेत नौ शैक्षिक संस्थान दुनिया के शीर्ष 50 में। इस रैंकिंग में धनबाद का आईएसएम 20वें पायदान पर है और यह भारतीय शिक्षा संस्थानों में सबसे ऊपर है। हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस और दि एशियन एज की लीड मॉरीशस के साथ करार की खबर है। हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक है, भारत, मॉरीशस ने कई करार किये, रक्षा संबंधों को बेहतर बनाया। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने संबंधों को बेहतर बनाने का फैसला किया इसलिये भारत मॉरीशस ने आठ करार किये। दि एशियन एज का शीर्षक है, “भारत मॉरीशस ने आठ करार किये : प्रधानमंत्री ने ‘महासागर’ योजना की घोषणा की।
हिन्दुस्तान टाइम्स ने बताया है कि एक दशक पहले मोदी ने सागर योजना की घोषणा की थी और अब महासागर योजना है। हिन्दी में दोनों योजनाएं पहले सागर और फिर महासागर की तरह नहीं हैं बल्कि अंग्रेजी में इनका नाम ऐसा है कि पहले अक्षरों को जोड़कर सागर और महासागर बनता है। सागर योजना का मतलब था – सिक्यूरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन जबकि महासागर का मतलब है, म्युचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्यूरिटी एंड ग्रोथ अक्रस रीजन्स। कहने की जरूरत नहीं है कि चुनाव जीतने के लिए घुस कर मारने का दावा करने के बाद देश में लोग भगदड़ से मर रहे हैं। सरकार की हालत ऐसी है कि, मरने वालों की सूची जारी नहीं हुई। परिजन शिकायत नहीं करें इसके लिए पहली बार नकद मुआवजा बांटा गया। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री सुरक्षा के नाम पर सागर को महासागर बना रहे हैं। यह सब तब जब पहले के भाजपा शासन में पाकिस्तानी आंतकी मसूद अजहर को कंधार ले जाकर छोड़ा गया था और कल ही पाकिस्तान में ट्रेन के अपहरण की खबर थी। आज जब 21 बंधकों तथा 33 हमलावरों को मार दिये जाने की खबर है तो प्रधानमंत्री 10 साल बाद अपने तीसरे कार्यकाल में पूरे इलाके में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र उन्नयन की योजना बना रहे हैं।
यहां यह जानना दिलचस्प है कि आकार पटेल ने अपनी पुस्तक, प्राइस ऑफ मोदी ईयर्स में लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक्रोनिम और एलिट्रेशन (अनुप्रास) बनाने तथा उन्हें बेहतर करने में काफी समय लगाते प्रतीत होते हैं। सागर के बाद महासागर बनाना ऐसा ही काम है हालांकि इसमें 10 साल लग गये। आकार पटेल ने अपनी किताब में प्रधानमंत्री के बनाये अनुप्रास (अंग्रेजी में) की सूची दी है और 5टी, 3एस, 4पी जैसे कई अनुप्रास का जिक्र किया। एक्रोनिम की सूची चार पन्नों में है। इनमें पीएम केयर्स से लेकर आरएसवीपी – राहुल, सोनिया, वाड्रा, प्रियंका तक हैं लेकिन सागर और महासागर नहीं है। यह किताब 2021 में आई थी और लगता है तब ‘सागर’ चर्चित नहीं हुआ था। जो भी हो, अखबारों में ऐसी चीजें प्रधानमंत्री के प्रचार में ही होती हैं।
आज के अखबारों की ज्यादातर लीड जब सरकार और प्रधानमंत्री का प्रचार करने वाली है तब द हिन्दू की लीड है, खुदरा मुद्रास्फीति सात महीने में सबसे कम क्योंकि खाद्यपदार्थों की कीमत कम हुई। खबर के मुताबिक इसका कारण यह है कि विकास लगतार चौथे महीने धीमा हुआ है, मुद्रास्फीति आरबीआई के लक्ष्य, चार प्रतिशत से कम नहीं है। इससे रेपो रेट कम किये जाने की संभावना बढ़ गई है। मॉरीशस के साथ आठ करार की खबर यहां सेकेंड लीड भी नहीं है। जो खबर है उसके शीर्षक में करार की बात ही नहीं है जो शीर्षक है वह इस प्रकार है, मॉरीशस में मोदी ने स्वतंत्र और सुरक्षित हिन्द महासागर की अपील की।
द टेलीग्राफ में पाकिस्तान की खबर लीड है। मॉरीशस की खबर पहले पन्ने पर नहीं है और सिंगल कॉलम में जियो के साथ स्पेसएक्स करार की खबर है जो टाइम्स ऑफ इंडिया में लीड है। द टेलीग्राफ की सेकेंड लीड संसद में अदाणी पर पूछे गये सवाल की खबर है जिसका जवाब नहीं दिया गया या जो दिया गया वह लीपने-पोतने जैसा था। शीर्षक है, “अदाणी के लिए सीमा (से संबंधित) नियमों में ढील दी गई : विपक्ष”। यह खबर दि एशियन एज में भी पहले पन्ने पर है। उपशीर्षक है, अदाणी के लिए सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया: कांग्रेस, द्रमुक सांसदों ने विरोध किया। आप जानते हैं कि विपक्ष मतदाता सूची पर चर्चा कराने की मांग कर रहा है सुनवाई नहीं हो रही है। संसद में जो सवाल पूछे जा रहे हैं उनका जवाब तो नहीं है, खबर भी नहीं है। हालांकि, अदाणी पर पूछे गये विपक्ष से संबंधित द टेलीग्राफ की खबर नई दिल्ली डेटलाइन से जेपी यादव की बाईलाइन के साथ है। खबर इस प्रकार है, विपक्ष ने बुधवार को लोकसभा में गुजरात में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास अदाणी समूह की अक्षय ऊर्जा परियोजना को नियमों के उल्लंघन के तहत दी गई मंजूरी पर विरोध जताया और सरकार पर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने प्रश्नकाल में इस मुद्दे को उठाया। पार्टी अब तक इसे संसद के बाहर उठाती रही है। तिवारी ने परियोजना के प्रमोटर का नाम नहीं बताया, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने सदन के बाहर अदाणी समूह का नाम लिया। मनीष तिवारी ने कहा कि खावड़ा में आगामी अक्षय ऊर्जा परियोजना भारत-पाकिस्तान सीमा के एक किमी तक फैली होगी और उन्होंने कहा कि सुरक्षा प्रोटोकॉल अंतरराष्ट्रीय सीमा के 10 किमी के भीतर किसी भी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना को प्रतिबंधित करता है। उन्होंने संबंधित मंत्री से सदन को यह बताने के लिए कहा कि क्या परियोजना को मंजूरी देने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल में ढील दी गई थी। नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने सवाल को टाल दिया। इसके बाद विपक्ष ने विरोध जताया। तिवारी ने प्रश्नकाल के दौरान कहा, “अध्यक्ष महोदय, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि सामरिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा साथ-साथ चलें। खावड़ा में एक बहुत बड़ी अक्षय ऊर्जा सुविधा स्थापित की जा रही है। यह सुविधा भारत-पाकिस्तान सीमा पर एक किलोमीटर तक जाएगी। राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार सीमा से 10 किलोमीटर के भीतर कोई भी बड़ी अवसंरचना परियोजना स्थापित नहीं की जा सकती है।” आज इस खबर को भी अखबारों में प्रमुखता नहीं मिली है।
आज के अखबारों की लीड के क्रम में बताना है कि आज द टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है – मस्क, मित्तल अब मुकेश : जियो ने भी स्टारलिंक करार का खुलासा किया। इंट्रो है, दोनों सौदे भारत, अमेरिकी सरकारों के इशारे (उकसावे) पर हुए? इसके साथ कुछ बुलेट प्वाइंट्स का शीर्षक है, चुनौती देने वाले से सहयोगी। इसमें कहा गया है, दोनों सौदे (एलन) मस्क के स्टार लिंक को भारतीय दूरसंचार क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को चुनौती देने वाले से सहयोगी में बदल दिया है। जियो और एयरटेल पहले स्टारलिंक को सस्ते में एयरवेव्ज दिये जाने के खिलाफ थे अब दोनों बदल गये हैं। दोनों सौदे इस शर्त के अधीन हैं कि स्पेस एक्स को भारत में स्टारलिंक की सेवा बेचने का लाइसेंस मिले। स्टारलिंक भारत में व्यावसायिक तौर पर का करने के लिए 2022 से लाइसेंस इंतजार कर रहा है। अन्य चीजों के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा की चिन्ता के कारण देर हुई।
उल्लेखनीय है कि कल यहां मैंने लिखा था, आज मेरे अखबारों में टाइम्स ऑफ इंडिया और द टेलीग्राफ ने एयरटेल और अमेरिकी एलन मस्क के स्टारलिंक के बीच करार की खबर को लीड बनाया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर का शीर्षक सूचना भर है जबकि टेलीग्राफ ने लिखा है कि ट्रम्प के साथ काम करके उनके करीबी दिख रहे मस्क ने एक कारोबारी करार कर लिया है … वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन के हवाले से मैंने लिखा था, मुकेश अंबानी के जिओ ने भी मस्क के साथ स्टारलिंक के ज़रिये इंटरनेट सर्विस की डील कर ली थी। एयरटेल की डील हो ही चुकी है। अब तीन व्यापारी मिलकर भारतीय उपभोक्ता को लूटेंगे, सरकार की देखरेख में। इसके लिए भारत सरकार ने एलन मस्क को स्टारलिंक के लिये बिना नीलामी के स्पेक्ट्रम दिया है। प्रशांत टंडन ने यह भी लिखा था कि, गर्मियां आ रही हैं कॉम्पीटीशन कमीशन को प्याऊ खोलने चाहिये – अपना काम तो है नहीं इनके पास। आप समझ सकते हैं कि सरकार ये सब करार कैसे कर रही है (या होने दे रही है) और इस बारे में जानकारी का खुलासा कैसे हो रहा है। अगर सब ठीक और सामान्य होता तो पारदर्शिता रखने में क्या दिक्कत थी पर नहीं है तो कोई कारण होगा और आज यह लग रहा है कि अखबारों के पास उतनी खबर भी नहीं है जितनी पत्रकार अपने स्तर पर सोशल मीडिया पर लिख दे रहे हैं।
आज दि एशियन एज में पांच कॉलम की एक चौंकाने वाली खबर है। चौंकाने वाली इसलिए कि वायुसेना प्रमुख जो बोल रहे हैं उसका मतलब है कि सरकार समय पर काम नहीं कर रही है या कर पाई है। इसका यह भी मतलब है कि देश की वायु सुरक्षा क्षमता कम है। यह बात बहुत कम अंतराल पर दोबारा कही जा रही है और छपी है। इन सभी कारणों से और इनमें से किसी एक कारण से भी खबर नहीं छपनी चाहिये थी पर इतनी प्रमुखता से छपी है तो कोई कारण होगा। पहले मीडिया से यह उम्मीद रहती थी कि ऐसी खबर का कारण खबर पढ़ने से समझ में आ जायेगा। या दो एक दिन में सार्वजनिक हो ही जायेगा। इस मामले में खबर दोबारा छपी है जबकि दो पूर्व सेना प्रमुखों की किताबें फंसी हुई हैं। इसलिए मुझे वायु सेना प्रमुख का सार्वजनिक रूप से यह कहना चौंकाता है कि, भारतीय वायु सेना को शीघ्रता से क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है। खबर के अनुसार, बहुभूमिका वाले 114 जेट विमानों के लिए जल्दी ही ग्लोबल टेंडर होने वाला है। वायुसेना प्रमुख ने कहा है कि सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए और भी लड़ाकू विमानों की आवश्यकता है। 20 जुलाई 2024 को मैंने अपने इसी कॉलम में लिखा था, दो सेना प्रमुखों की दो किताबों का लोकार्पण टला, इमरजेंसी में ऐसा कुछ सुना था? इमरजेंसी पर कितनी किताबें हैं, जानते हैं? कुछ तो अब भी आई हैं। इंडियन एक्सप्रेस में आज एक और महत्वपूर्ण खबर है। इसके अनुसार पूर्व सेना प्रमुखों की दो किताबें जो लोकार्पण के लिए तैयार हैं उनका लोकार्पण रुक गया है। प्रकाशकों का कहना है कि रक्षा मंत्रालय / सेना के अधिकारियों ने क्लियरेंस के लिए पुस्तकों को वापस मंगा लिया है। मुझे याद नहीं है कि इमरजेंसी में और उसके बाद किसी किताब के प्रकाशन में कोई व्यवधान हुआ हो। फिल्म किस्सा कुर्सी का मामला जरूर विवाद में आया था लेकिन उसे सरकारी स्तर पर नहीं रोका गया था। जहां तक मुझे याद है उसे नष्ट करने का आरोप संजय गांधी पर था और सीबीआई ने उसकी जांच की थी। एनके सिंह की किताब द प्लेन ट्रुथ में एक अध्याय इसपर भी है और इसकी जांच मारुति के तबके कारखाने में भी की गई थी जो उस समय बन रही थी या शुरुआती अवस्था में थी। अघोषित इमरजेंसी में एक पूर्व सेना प्रमुख की किताब छह महीने से ज्यादा समय से लटकी हुई है। दूसरी का लोकार्पण दो अगस्त को होना निर्धारित हुआ था पर अब फिर टाल दिया गया है क्योंकि दोनों के प्रकाशकों को रक्षा मंत्रालय के संदेश का इंतजार है। इन दो पुस्तकों में एक 2002 से 2005 तक सेना प्रमुख रहे एनजी विज की किताब, अलोन इन द रिंग है जबकि 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे जनरल एमएम नरवने की किताब, फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी पहले से लंबित है और छह महीने में उसे भी क्लियरेंस नहीं मिली है।” अब इसमें सात-आठ महीने और जोड़ दीजिये क्योंकि किताबों के लोकार्पण की खबर तो भी तक नहीं आई है।
मैं रोज दो हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल आठ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद पेश करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। पूरा पढ़ना चाहें तो भड़ास4मीडिया पर जाकर पढ़ सकते हैं।


