
संजय कुमार सिंह
आप जानते हैं, कल अखबारों में ट्रम्प का यह दावा छपा था कि भारत टैरिफ कम करने के लिए तैयार हो गया है। इसपर भारत की प्रतिक्रिया कल ही होनी चाहिये थी। पर कल नहीं थी तो कल दिन भर में सरकार को इसपर अपना पक्ष रखना चाहिये था और बताना चाहिये था कि ट्रम्प ने जो कहा वह सही है या गलत और अगर सही तो है तो कटौती किसमें, कितनी हुई है, कब किन वस्तुओं पर हुई आदि। और नहीं हुई है तो यह कि ट्रम्प झूठ बोल रहे हैं या जो कहा वह किस आधार पर कहा। कोई गलतफहमी हुई है तो क्यों? कल कांग्रेस ने यह मुद्दा उठाया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति कमजोर कर रहे हैं। भारत सरकार को इस मामले में भी चुप नहीं रहना चाहिये था। सरकार का पक्ष आता तो वह और नहीं आया तो यही खबर थी कि भारत सरकार से अभी तक इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपना पक्ष नही रखा है। पर अखबारों का जो हाल है उसमें सरकार को पता था कि वहां मामला भुला दिया जायेगा और ज्यादातर अखबारों के पहले पन्ने से यह आज ऐसे गायब है जैसे गधे सिर सिंग। इस पर कुछ नहीं है। द टेलीग्राफ ने कांग्रेस के हमले की खबर छापी है जबकि इंडियन एक्सप्रेस ने अनाम सरकारी अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि यह एक अमेरिकी चाल है और भारत इसमें फंसने वाला नहीं है। अमर उजाला ने पहले पन्ने पर स्पष्ट शीर्षक के साथ खबर है, भारत टैरिफ में कटौती के लिए राजी नहीं, ट्रम्प का दावा गलत। शीर्षक के लिहाज से यह खबर भले स्प्ष्ट है लेकिन यह भी अनाम अधिकारियों के हवाले से और छपवाई गई लगती है। दूसरे अखाबरों में अंदर के पन्ने पर हो सकती है।
अगर कोई खबर नहीं होती तो हम ‘मौनं स्वीकार लक्षणम्’ में यकीन करने वाले लोग हैं। इंडियन एक्सप्रेस और अमर उजाला ने सरकार की ओर से चुप नहीं रहने के संकेत दे दिये है पर यह ‘खबर’ नहीं है। सूत्रों के हवाले से छपी खबर में इंडियन एक्सप्रेस में कुछ खास नहीं है जबकि अमर उजाला में पीयूष गोयल के अमेरिका से लौट आने और वहां वे किससे मिले, यह सब भी बताया है। कुल मिलाकर यह खबर देने की औपचारिकता है जो अखबार की अपनी कोशिश भी हो सकती है पर अभी वह मुद्दा नहीं है। मुद्दा यह है कि राहुल गांधी कल गुजरात में थे और वे गुजरात चुनाव की तैयारी करते लग रहे हैं। इस लिहाज से गंभीर भाषण दिया। इसमें यहां तक कहा कि कांग्रेस के लोग भाजपा के लिए काम करते हैं और जरूरत पड़ी तो 20-30 लोगों को पार्टी से निकालना भी पड़ सकता है। निश्चित रूप से यह गंभीर बयान है पर आज के अखबारों में यह खबर पहले पन्ने पर प्रमुखता से सिर्फ अमर उजाला में है। दिलचस्प यह कि इसपर भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी की प्रतिक्रिया है, “आत्मनिरीक्षण करें राहुल :भाजपा”। मुझे लगता है कि भाजपा अभी भी राहुल गांधी की पप्पू समझ रही है और यह बयान वैसा ही है। मीडिया अगर सरकार के समर्थन में नहीं लगा होता तो यह पहले पन्ने लायक प्रतिक्रिया नहीं है। राहुल आत्मनिरीक्षण करते रहे हैं और इसी कारण अभी तक प्रधानमंत्री नहीं बने और ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा में जाने से नहीं रोका और अब खुलेआम स्वीकार कर रहे हैं कांग्रेस के लोग भाजपा के लिए काम करते हैं।
दूसरी ओर, भाजपा तो छोड़िये, सरकार क्या कर रही है और क्या नहीं कर रही है उससे मीडिया या जनता को भी मतलब नहीं है। गुजरात में जो कुछ हुआ उसके बाद मोदी और भाजपा को तरक्की मिली तो अब मणिपुर देश में एक बड़ा सवाल है। दो साल होने को आये, स्थिति नियंत्रण में नहीं है लेकिन उसकी भी खबर दिल्ली के अखबारों में नहीं छपती है। सरकार क्या कर रही है या उसकी योजना क्या है ना बताती है ना कोई पूछता है। महीनों बाद मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया तो उसे स्वीकार कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके तहत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने समीक्षा बैठक के बाद निर्णय किया था कि 8 मार्च से मणिपुर के सभी रास्ते खोल दिए जाएंगे। इसमें किसी के भी दखलअंदाजी करने पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था। फिर भी आज खबर है कि हिंसा और पत्थरबाजी में एक व्यक्ति की मौत हो गई तथा 43 घायल है। अमर उजाला में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है जबकि पहले पन्ने पर टॉप की खबर है, “महिला नेतृत्व वाले विकास के मार्ग पर चल रहा है भारत”। इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, “महिलाओं ने संभाला पीएम का सोशल मीडिया अकाउंट : मोदी बोले मेरे खातों में करोड़ों माताओं बहनों का आशीर्वाद”।
कहने की जरूरत नहीं है कि मणिपुर की खबर आज हिन्दुस्तान टाइम्स, द हिन्दू और द टेलीग्राफ में लीड है। नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर है। इसके अलावा अंग्रेजी अखबारों में इंडियन एक्सप्रेस, दि एशियन एज, टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने पर दो कॉलम की खबर है। प्रधानमंत्री का सोशल मीडिया अकाउंट महिलाएं संभालेंगी – खबर कम, ईवेंट ज्यादा है तथा करोड़ों माताओं बहनों का आशीर्वद – मोदी का अपना प्रचार और दावा है। इसके लिए ना मणिपुर की खबर छोड़ी जानी चाहिये ना कर्नाटक के हम्पी में इजराइली महिला से बलात्कार, छेड़छाड़ तथा उनके एक साथी की मौत की खबर इससे कम महत्वपूर्ण है। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर सेकेंड लीड है। टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ दि एशियन एज ने दिल्ली सरकार द्वारा महिला समृद्धि योजना को मंजूर किये जाने की खबर को लीड बनाया है जबकि भाजपा को हो सकने वाले राजनीतिक लाभ को छोड़ दिया जाये तो यह दिल्ली की स्थानीय खबर से ज्यादा नहीं है और इसके तहत दिल्ली की सभी महिलाओं को 2500 रुपये नहीं मिलने हैं। इसलिए यह स्थानीय खबर ही है। हालांकि, भाजपा की राजनीति देश के लिए इतनी महत्वपूर्ण हो गई है कि यह ज्यादातर अखबारों में पहले पन्ने पर है। हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर लीड है लेकिन नवोदय टाइम्स में छह कॉलम की लीड है। खास बात यह है कि इसे दिल्ली सरकार की पहली मंत्रिमंडल बैठक में पास होना था और कल पैसे मिल जाने चाहिये था। ऐसा नहीं हो पाया। इसके लिए दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष की नेता अतिशी ने मोदी की गारंटी को एक जुमला कहा है। लेकिन इसे प्रमुखता नहीं मिली है।
दूसरी ओर, योजना की घोषणा प्रधानमंत्री ने की थी और इसमें देरी हुई यही खबर है। मंत्रिमंडल से मंजूरी तो मिलनी ही थी फिर भी इस खबर को इतना महत्व दिया गया है जबकि शीर्षक में या प्रमुखता से यह नहीं बताया गया है कि पैसे कब से मिलेंगे। यह खबर आज मेरे आठ अखबारों के अलावा हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर और नवभारत टाइम्स, देशबंधु के साथ जनसत्ता में भी लीड है। हालांकि, जनसत्ता ने ट्रम्प के बयान पर भारत सरकार की खामोशी को सेकेंड लीड बनाया है। मेरी राय में यह एक बढ़िया संपादकीय निर्मय है। मेरे हिसाब से यह खबर आज लीड भी हो सकती थी।


