भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यूएस की यात्रा पर हैं। इस बीच एक ऐसा फैसला आया है जिसे लेकर उद्योगपति गौतम अदाणी समेत भारत की मीडिया के मन में भी लड्डू फूट रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि मोदी की यात्रा से पहले ट्रंप ने अदाणी के गुनाह माफ कर दिए हैं। इसके बाद अदाणी खेमे में खुशी की लहर है।
लेकिन यह पूरा मसला आखिर है क्या? पढ़ें… नीचे इसी मामले पर दो प्रतिक्रियाएं भी हैं।
मोदी इस वक्त फ्रांस के दौरे पर हैं, जहां वे एआई समिट में शामिल हो रहे हैं। इसके बाद वे अपने विशेष विमान से अमेरिका के लिए रवाना होंगे। लेकिन उनके वहां पहुंचने से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी को बड़ी राहत मिल सकती है।
एफसीपीए कानून पर ट्रंप ने लगाया ब्रेक
राष्ट्रपति ट्रंप ने 50 साल पुराने फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट (FCPA) को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। यह वही कानून है जिसके तहत गौतम अडानी और उनकी कंपनियों पर अमेरिकी जांच एजेंसियों की नजर थी। इस कानून के तहत अमेरिकी कंपनियों और व्यक्तियों को विदेशी अधिकारियों को रिश्वत देने से रोकने का प्रावधान है। ट्रंप ने इस कानून को ‘व्यावहारिक रूप से असफल’ करार देते हुए कहा कि यह अमेरिकी कंपनियों को वैश्विक व्यापार में नुकसान पहुंचा रहा था।
उन्होंने अपने नए आदेश के तहत नवनियुक्त अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को निर्देश दिया कि वे एफसीपीए के तहत चल रहे सभी मामलों को तत्काल प्रभाव से रोक दें। ट्रंप का मानना है कि यह कानून अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बाधा बन चुका है और इससे अमेरिकी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है।
अडानी ग्रुप को कैसे मिलेगी राहत?
ट्रंप के इस फैसले से अडानी ग्रुप को राहत मिलने की संभावना है। दरअसल, यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) और डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DOJ) ने अडानी ग्रुप के खिलाफ एफसीपीए के उल्लंघन के आरोप लगाए थे।
आरोपों के मुताबिक, 2021 में अडानी ग्रीन एनर्जी द्वारा अमेरिकी निवेशकों से 750 मिलियन डॉलर जुटाने के दौरान कथित रूप से 250 मिलियन डॉलर की रिश्वत योजना चलाई गई थी। इसमें गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी, एज़्योर पावर ग्लोबल लिमिटेड के व्यापार सहयोगी सिरिल कैबेन्स और अन्य अधिकारियों के नाम शामिल थे। आरोप थे कि उन्होंने रिश्वतखोरी के जरिए अनुचित लाभ लिया और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह किया।
पहले भी खत्म करने की कोशिश कर चुके हैं ट्रंप
ट्रंप पहले भी अपने कार्यकाल के दौरान इस कानून को खत्म करने की कोशिश कर चुके हैं। उनका मानना है कि यह कानून अमेरिकी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नुकसान पहुंचाता है। अब एक बार फिर उन्होंने इसे निलंबित कर दिया है और जब तक नए दिशा-निर्देश लागू नहीं होते, तब तक इस कानून के तहत किसी भी कंपनी या व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं होगी।
ट्रंप के इस कदम से न सिर्फ अमेरिकी कॉरपोरेट जगत बल्कि भारत के कुछ बड़े उद्योगपतियों को भी राहत मिलने की संभावना है। खासकर अडानी ग्रुप के लिए यह फैसला किसी बड़ी जीत से कम नहीं माना जा रहा। अब देखना होगा कि इस फैसले का आगे क्या असर पड़ता है और अमेरिकी कांग्रेस इसे लेकर क्या रुख अपनाती है।
प्रकरण पर कुछ प्रतिक्रियाएं भी देखिए…
प्रशांत टंडन-

ऐसा है तो चले जाते अडानी अमेरिका मोदी के साथ जैसे हमेशा जाते थे. अडानी पर मुकदमा SEC (सिक्युरिटी एक्सचेंज कमीशन) ने किया है और डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने मुकदमा चलाने की इजाज़त दी है.
इनका फ़ॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट से कोई लेना देना नहीं हैं. इस एक्ट के सस्पेंड होने से सिर्फ अमेरिकी नागरिकों को छूट मिलेगी.
दीपक शर्मा-
गरीब और मजदूर भले ही हथकड़ी और बेड़ियों में बंधे स्वदेश लौटाये गये पर ट्रम्प ने मोदी के अमेरिका पहुंचने से पहले मित्र अडानी को बड़ी राहत दी है।
जिस FCPA कानून में अडानी पर मुकदमा हुआ उस कानून को ही ट्रम्प ने सस्पेंड कर दिया।
दिल्ली की सत्ता जो चाहती थी वो ट्रम्प ने कर दिया।
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