संतोष यादव-
उधर अडानी ने यूएस कोर्ट का समन स्वीकार किया और मोदी का नाम एपस्टीन फ़ाइल में आया, इधर अमेरिका के साथ ट्रेड डील फाइनल हो गई।
क्या अब भारत अमेरिका के दबाव में रूस से तेल नहीं खरीदेगा ये ट्रेड डील का पार्ट है?
भारत का इस साल का कुल बजट 630 बिलियन डॉलर का है। ट्रम्प कह रहे हैं कि मोदी ने वादा किया है कि भारत अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर का सामान ख़रीदेगा।
अशोक कुमार पांडेय-
जिन भारतीय चीज़ों पर 2-3% टैरिफ लगता था उन पर 18% टैरिफ लगना जीत कैसे है? बदले में जिन अमेरिकन चीज़ों पर 50-70% टैरिफ़ लगता था, उनको घटाकर ज़ीरो कर देना जीत कैसे है?
कृषि क्षेत्र अगर खुल गया है तो भारतीय किसानों और डेरी उत्पादकों की बर्बादी तय है।
साथ ही अमरीका से महंगा तेल ख़रीदना होगा। यह जीत कैसे है? टूल किट ऐक्टिव है लेकिन अपना भी तो दिमाग़ लगाइए।
मोदी भारत देश को इतना झुका देंगे , ये तो भाजपाई भी नहीं सोच रहे होंगे। अमरीका के दबाव में मोदी ने शर्त मान ली कि रूस से तेल नहीं लेंगे। मोदी ने शर्त मान ली कि वेनेजुएला से तेल ख़रीदेंगे। अमरीकी सामान पर टैरिफ़ “जीरो” किया
PM Modi’s shameless U turn – From “Buy Indian” to “Buy American” -सौरभ भारद्वाज, विधायक आप
आवेश तिवारी-
फुल दलाली चल रही है। जागरण लिख रहा है कि एक फोन कॉल और झुक गया अमेरिका। अन्य का भी यही हाल। हद है! यह सब जनता को बेवकूफ समझते हैं।


सच क्या है? अमेरिका ने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। जिसमें से 25 फीसदी रेसोप्रोकल और 25 फीसदी रूस से तेल खरीदने पर है। इनमें से केवल 7 फीसदी टैरिफ घटा है यानि 43 फीसदी अब भी लगा हुआ है। लेकिन जय जयकारा लगना शुरू हो गया। इस 7 फीसदी की कमी की कीमत क्या है? सरकार को बताना चाहिए। कुछ सवाल जरूरी हैं
- क्या अब हमने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है?
- कहा जा रहा है यह कमी रेसिप्रोकल टैरिफ पर है फिर रूसी तेल पर प्रतिबंध का क्या मतलब है?
- क्या पीएम मोदी ने यह मान लिया है कि ट्रंप ने जो 60 से ज्यादा बार युद्ध रुकवाने की बात कही वो सही थी?
- अगर रूस से तेल लेना बंद कर दिया गया तो यह क्यों नहीं कहा जा रहा कि अब टैरिफ 50 से 18 फीसदी हो गया?
- क्या अब हम अमेरिका के तयशुदा गुलाम हो चुके हैं?


