नहीं बचाए जा सके उदय सिन्हा!

उदय सिन्हा

लखनऊ से उदास और दुखी करने वाली सूचना है। इस दौर के कुछ बेहतरीन संपादकों में से एक उदय सिन्हा जी का आज सुबह निधन हो गया।

उदय जी कुछ रोज पहले सांस लेने में तकलीफ के कारण लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। उनकी उम्र 62 साल थी।

वरिष्ठ पत्रकार श्री उदय सिन्हा जी को कुछ साल पहले न्यूरो की शिकायत हो गयी थी। पहले उन्हें चलने में दिक्कत आ रही थी। चलते समय पांव सही जगह नहीं पड़ते थे। एम्स में जांच कराने पर डॉक्टरों ने कहा कि उनके रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में पानी भर गया है।

वे एडमिट हुए और पानी निकाल दिया गया। फिर थोड़ा ठीक रहने लगे। बाद में फिर समस्या हुई तो जांच के बाद न्यूरो प्रॉब्लम बताया गया। उनके मस्तिष्क का ऑपरेशन करने की सलाह चिकित्सकों ने दी।

विगत दिसंबर माह में उनके मस्तिष्क का ऑपरेशन लखनऊ के निजी अस्पताल में हुआ। उसके बाद से उनकी तबियत अक्सर खराब रहने लगी। रविवार की शाम सांस लेने में ज्यादा दिक्कत होने पर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। पहले उन्हें ऑक्सीजन दिया गया, पर बाद में सांस लेने में कठिनाई होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया।

दो दिनों के प्रयास के बाद भी उन्हें सामान्य हालत में नहीं लाया जा सका। उदय जी अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके दो बेटे हैं- अनुपम (हर्ष) और अभिषेक (यश)।

उदय सिन्हा के निधन की जानकारी मिलते ही उनके सभी जानने वाले स्तब्ध हैं। वरिष्ठ पत्रकार ओंकारेश्वर पांडेय कहते हैं- “श्री उदय सिन्हा मेरे बड़े भाई जैसे थे। वे हमारे समय की पत्रकारिता जगत का एक बड़ा नाम रहे हैं। श्री उदय सिन्हा ऐसे पहले हिंदी संपादक रहे हैं, जिनको अमरीकी राष्ट्रपति ने साक्षात्कार देने हेतु व्हाइट हाउस आमंत्रित किया था। वे दैनिक भास्कर, द पायनियर, सहारा समय, हरिभूमि और नॉर्थ ईस्ट टाइम जैसे अनेक हिंदी व अंग्रेजी अखबारों के संपादक तो रहे ही, टेलीविजन चैनल -चैनल वन के संपादक व एडवाइजर भी रहे हैं। उनका जाना एक बड़ा सदमा है। पत्रकारिता की कई पीढ़ियों को उदय जी ने पाला पोसा निखारा। श्रद्दांजलि!”

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Comments on “नहीं बचाए जा सके उदय सिन्हा!

  • Pankaj Verma says:

    He was a grt guy.A seasoned journalist always on move.I was heading Indian Exp/ Jansatta Exp,Lko Edn a decade & half back and he was Editor-Swatantra Bharat,Lko when we became close to each other.He was a regular visitor to our office and socially also we were quite active.We were in touch with each even after he shifted to Delhi in due course.
    Heartfelt condolences.May his soul rest in peace and Almighty give strength and courage to his family members to bear this irreparable loss. _Pankaj Verma,Sr Journslist

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  • सैयद असदर अली says:

    बहुत ही दुखद समाचार। उदय जी, मेरे बड़े भाई समान थे, हालाँकि मेरे साथ उनका व्यवहार हमेशा बिलकुल मित्रतापूर्ण रहा। मुझे सहारा में उनके साथ काम करने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। जब वो चैनल-१ के सम्पादक बने तो मुझे फ़ोन करके उन्होंने बुलाया और चैनल के लिए भी सहयोग करने की बात कही।इसके इलावा भी उदय जी के साथ मेरा लम्बा वास्ता रहा है, जो स्मरणीय है।
    बहुत ही नरम मिज़ाज के महान इंसान थे, उदय जी। हर किसी की बात बहुत हाई ग़ौर से सुनते थे और उस पर अपनी बेबाक़ राय रखते थे।
    निर्भीक पत्रकारीता तो उनके रग रग में बसी थी। unka असामयिक जाना, मेरे लिए निजी नुक़सान जैसा तो है ही, पत्रकारीता जगत के लिए भी बहुत बड़ा नुक़सान है। उनकी आत्मा को शांति मिले

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  • सुरेश चंद रोहरा says:

    नमन् शत शत नमन
    उदय सिन्हा जी, कभी संडे मेल मे भी हुआ करते थे-सुरेशचंद्र रोहरा

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  • विजय सिंह says:

    लगता है जैसे कल की बात हो . उदय जी जमशेदपुर आये थे .फ़ोन पर बात हुई तो बताया कि बेल्डीह क्लब गेस्ट हाउस में रुके हैं .दूसरे दिन 11 बजे सुबह मिलने का कार्यक्रम तय हुआ. नियत समय पर उदय जी के एक पुराने घनिष्ठ मित्र वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एस.आर .रिज़वी छब्बन को साथ लेकर बेल्डीह क्लब पहुंचा. चाय नास्ते के साथ बातें शुरू हुईं तो कब ३ बज गए पता ही नहीं चला .
    न जाने कितनी बातें हुईं. जमशेदपुर से शुरू हुई बातें देश दुनिया प्लास्टिक मनी पत्रकारिता राजनीति नैतिकता जैसे विषयों पर 4 घंटे ऐसे चलीं जैसे मंथन हो रहा हो . जितने शांत भाव से उन्होंने मेरी बातें सुनी उतने ही सौम्यता से मेरे सवालों के जवाब भी दिए .
    उनके निधन के समाचार से मर्माहत हूँ .ईश्वर उनकी आत्मा को सद्गति दें और शोकसंतप्त परिवार को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें .

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