उमेश कुमार समेत तीन पत्रकार चुनाव मैदान में, शलभ मणि को देवरिया से बीजेपी ने दिया टिकट

सुजीत सिंह प्रिंस-

यूपी उत्तराखंड समेत कई राज्यों में हो रहे चुनावों में यूपी उत्तराखंड से तीन पत्रकारों के चुनाव लड़ने की खबर आ रही है. समाचार प्लस चैनल के संस्थापक और संपादक रहे उमेश कुमार ने हरिद्वार जिले की खानपुर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरा है.

उमेश कुमार काफी समय से खानपुर के विकास के लिए प्रयास रत हैं. कई गांवों में उन्होंने विविध समस्याओं से ग्रामीणों को निजात दिलाकर जनता का दिल जीता. साथ ही वहां के मौजूदा अलोकप्रिय विधायक की पोलखोल कर व्यापक जनसर्मथन सोशल मीडिया पर हासिल किया. ऐसा प्रतीत होता है कि उमेश कुमार इस बार जीत कर राजनीतिक पारी की शानदार शुरुआत कर देंगे.

उमेश कुमार संघर्ष का दूसरा नाम हैं. पत्रकारिता में बेहद सामान्य रिपोर्टर के तौर पर शुरुआत करने वाले उमेश एक एक कदम बढ़ते गए और खुद का न्यूज चैनल ला दिया. ये अलग बात है कि सत्ता से पंगों, स्टिंग और खुलासों के चलते उनका चैनल शासन प्रशासन के निशाने पर रहा. इन्हीं सब के कारण उन्हें जेल यात्रा भी करनी पड़ी लेकिन उमेश ने हार न मानी. कोर्ट की मदद से उन्होंने खुद को बेदाग साबित किया और नेताओं को नंगा करने का सिलसिला जारी रखा. उमेश के कारण उत्तराखंड में कई सरकारों का पतन हुआ. सियासत के निशाने पर रहने वाले उमेश सिसातदानों की कुटिल चालों से निपटने के लिए अब खुद इसी मैदान में कूद पड़े हैं.

उधर, टीवी पत्रकार रहे शलभ मणि त्रिपाठी काफी समय से बीजेपी की राजनीति कर रहे हैं और उन्हें इसका फल मिलता दिख रहा है. बीजेपी ने देवरिया सीट से शलभ मणि को टिकट दिया है. बताया जा रहा है कि शलभ कई वर्षों से देवरिया में जनता से कनेक्ट रहे और वे काफी लोकप्रिय हैं. उनका जीतना तय माना जा रहा है.

शलभ मणि त्रिपाठी ने पत्रकारीय करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी. वे अमर उजाला समेत कई अखबारों में रहे. बाद में लखनऊ में वे आईबीएन7 चैनल (अब नेटवर्क18) के लंबे समय तक ब्यूरो चीफ रहे. अपनी खबरों के कारण वे एक बार तत्कालीन सीएम मायावती की आंखों के किरकिरी बन गए और कई किस्म का उनका उत्पीड़न हुआ. बाद में वे राजनीति में आ गए. शलभ को अमित शाह का बेहद खास आदमी बताया जाता है. शलभ अपने विनम्र और मिलनसार स्वभाव के नाते अपने जानने वालों में खासे लोकप्रिय हैं.

पत्रकारों ने शलभ को टिकट दिए जाने का स्वागत किया है और उनके जीतने की भविष्यवाणी भी कर दी है. देखें कुछ टिप्पणियां-

Manoj Rajan Tripathi- अब की विधानसभा में MLA शलभ मणि त्रिपाठी को बोलते सुना जायेगा। देवरिया से टिकट मिल गया है।जिसके पिता कोरोना की त्रासदी झेलते रहे लेकिन वो खुद कोरोना काल में हज़ारों की मदद करता रहा। फिर तो ऐसे शख्स को भगवान भी वोट देंगे, जितायेंगे और विधायक भी बनायेंगे।

Rajiv Tiwari Baba- पत्रकारिता अपनी जगह और मित्रता अपनी जगह! देवरिया से भाजपा का टिकट पाए भाई शलभ मणि त्रिपाठी को तन मन धन से समर्थन है। भाजपा के अभी तक के टिकट वितरण में एक यही टिकट सबसे सही मिला है। देवरिया के लोगों को भी ऐसा कर्मठ जुझारू जनप्रतिनिधि नहीं मिलेगा। देवरिया की जनता से अपील है भाई शलभ मणि त्रिपाठी को अधिक से अधिक मतों से जिताकर विधानसभा भेजें।

Vikas mishra- करीब 5 साल पहले मैंने शलभ मणि त्रिपाठी को गोरखपुर से बीजेपी की तरफ से सांसद प्रत्याशी बनाने की बात फेसबुक के मंच पर रखी थी। वो तो नहीं हो पाया, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें अपना सूचना सलाहकार बनाकर उनका मान रखा। 2019 लोकसभा चुनाव में शलभ को देवरिया से टिकट मिलना करीब-करीब तय था, लेकिन खलल खलीलाबाद से आ गया। बहरहाल अब 2022 विधानसभा चुनाव में शलभ मणि त्रिपाठी को देवरिया से बीजेपी ने टिकट दिया है। शलभ पत्रकारिता की यात्रा के दौरान हमारे साथी रहे हैं। एक पत्रकार होने के नाते मैं शलभ की जीत की दुआ करता हूं। साथ ही शलभ ने हमें हमेशा बड़े भाई का सम्मान दिया है, इस नाते जीत का आशीर्वाद भी उनके साथ है।

Utkarsh Sinha- मुस्कराहट भरे चेहरे वाले प्रिय अनुज , बहुत बधाई. शलभ मणि त्रिपाठी यानी 1985 का वो स्कूली बच्चा जिसे हम जुबिली इंटर कालेज में अपने सहपाठी शैलेश के छोटे भाई के रूप में पहचानते थे वो बड़ा हुआ तो फिर होता चला गया , पहले एक क्राईम रिपोर्टर के रूप में अलग पहचान बनायीं फिर टीवी पत्रकारिता का जाना पहचाना नाम हुआ और उसके बाद अचानक राजनीति में उतर गया, वहां भी झंडे गाड़े बतौर भाजपा प्रवक्ता वह स्पष्टवादी बना रहा और फिर यूपी के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार के रूप में सत्ता और पत्रकार के बीच कड़ी बनाने की जिम्मेदारी बखूबी निभाई…. कोरोना त्रासदी के वक्त जब किसी को जरुरत होती उसे बस शलभ याद आते… और हर किसी के लिए हरसंभव मदद भी की शलभ ने …… अब वे देवरिया से भाजपा प्रत्याशी के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ेंगे ……. अब तक का रिकार्ड आगे बढ़ने का ही रहा है , सो आगे बढ़ो अनुज. वैचारिक रूप से हम अलग हैं मगर रिश्ता अपनी जगह मजबूत रहेगा.

उधर, एंकर निदा अहमद ने भी राजनीतिक पारी शुरू कर दी है। निदा अहमद संभल से चुनाव लड़ रही हैं और उन्हें कांग्रेस पार्टी ने अपना टिकट दिया है। निदा कांग्रेस के चुनावी नारे ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ को भी साकार कर रही हैं। न्यूज एंकर निदा अहमद अब नोएडा फिल्म सिटी में हिंदी नेशनल न्यूज़ चैनल ‘न्यूज़ इंडिया’ (NEWS INDIA) में सीनियर एंकर प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रही थी। यहीं से वो राजनीति की ओर चल पड़ी हैं।

न्यूज़ इंडिया से पहले वो ‘ज़ी यूपी-उत्तराखंड’ में एंकर कम प्रोड्यूसर की जिम्मेदारी निभा रही थीं। उससे पहले साल 2020 तक वो इंडिया टुडे ग्रुप के ‘तेज़’ न्यूज चैनल की टीम हिस्सा थीं। ‘तेज़’ में वह सीनियर एसोसिएट प्रड्यूसर के साथ-साथ एंकरिंग की भी जिम्मेदारी संभाल रहीं थीं। यूपी-उत्तराखंड के रीजनल न्यूज चैनल ‘न्यूज़ 1 इंडिया’ से निदा यहां पहुंची थीं। इससे पहले निदा अहमद ने ‘समाचार प्लस’ में बतौर एंकर करीब दो साल काम किया.. निदा अहमद ने अपने करियर की शुरुआत क्राइम रिपोर्टर के रूप में की। ‘इंडिया न्यूज’ ‘ज़ी यूपी उत्तराखंड, ‘ज़ी सलाम’ ‘तेज’, ‘समाचार प्लस’, के अतिरिक्त निदा ‘ईटीवी नेटवर्क’ NETWORK18 और ‘न्यूज वर्ल्ड इंडिया’ में भी काम कर चुकी हैं। निदा ने ‘न्यूज वर्ल्ड इंडिया’ से अपने करियर की शुरुआत बतौर असिसटेंट प्रड्यूसर की थी, जहां से ही उन्होंने एंकरिंग की बारीकियों को सीखा और क्राइम रिपोर्टर की भूमिका निभाई। निदा को ढेरों अवार्ड मिल चुके हैं।

निदा अहमद का जन्म उत्तरप्रदेश के संभल ज़िले में हुआ था। उनके दादा ज़रीफ़ भट्टा चैयरमेन लगातार 25 साल तक संभल के चैयरमैन रहे। उनके पिता टीचर और मां हाउस वाइफ हैं। यहां तक आने का सबसे बड़ा श्रेय अगर वो किसी को देना चाहती हैं, तो वो हैं उनके पति रज़ा अहमद। रजा अहमद उनके लिए हमेशा एक अच्छे दोस्त की तरह खड़े रहे.. क्योंकि निदा आगे पढ़ना चाहती थीं लेकिन बारहवीं के बाद ही शादी हो जाने के कारण पढ़ाई बीच में छूट गई लेकिन निदा अहमद ने हार नहीं मानी.. शादी के बाद वो दिल्ली आ गईं और एक बेटे को जन्म देने के बाद निदा ने अपने पति के सामने आगे पढ़ायी करने और जीवन में कुछ बनने की इच्छा ज़ाहिर की और उस दिन से लेकर आज तक उनके पति का सपोर्ट हमेशा उनके साथ रहता है। शादी के बाद अपनी आगे की पढ़ाई करके और साथ ही अपने घर की भी सारी ज़िम्मेदारियां उठाते हुए निदा आज इस मुक़ाम पर पहुंची हैं। निदा अहमद की गिनती मीडिया की उभरती हुई खूबसूरत और तेज़ तर्रार एंकर में की जाती है। निदा आज अवाम की पसंदीदा आवाज़ बन गयी हैं। सामाजिक सेवा में भी निदा का योगदान हमेशा सराहनीय रहा है। गरीब बच्चों की मदद के लिये निदा को स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। निदा अहमद को मीडिया इंडस्ट्री में भी काफी पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।



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