सत्येंद्र पीएस-
आईएएस अधिकारियों के बारे में मेरी स्पस्ट राय है कि ये एक आज्ञाकारी नौकर हो सकते हैं, उन्हें राजा बना दिया जाए तो नाश करने के अलावा कुछ नहीं कर सकते.
एक आरके सिंह हुआ करते थे आईएएस अधिकारी. Narendra Modi सरकार ने उन्हें बिजली मन्त्री बनाया. तमाम योजनाएं लेकर आये कि इससे ट्रांसमिशन ठीक होगा, राज्यों का घाटा कम होगा. लेकिन हालत यह हो गई कि बिजली विभाग की उन्होंने बैंड बजा दी, घाटा कम होना तो दूर की कौड़ी है.
यूपी के अरविंद कुमार शर्मा बिजली मन्त्री हैं. यह गुजरात कैडर के आईएएस हैं. इन्हें मोदी जी का खास कहा जाता है तो यूपी में बिजली मन्त्री बन गए.
यूपी का बिजली विभाग लूट का अड्डा बन चुका है. अभी कुछ रोज पहले हम लोगों का मीटर फुंक गया. रात 10 बजे बिजली कर्मी ने बिजली काट दी.
सुबह जब मीटर चेंज करने के लिए बिजली विभाग गए तो जेई साहब ने ऑर्डर कर दिया. बिजली विभाग के दो कर्मचारी लड़ गए. एक ने मीटर चेंज करने के आठ हजार रुपये मांगे तो एक ने छह हजार. हम लोग चक्कर में थे कि किसी तरीके से रिश्वत तय करके बिजली चालू करायें क्योंकि भीषण गर्मी पड़ रही है.
दोनों गुट ऐसे लड़े कि उनमें आपस में मार कुटाई की नौबत आ गई कि देखते हैं कि तुम कैसे लगाते हो.
एक ने कहा कि स्मार्ट मीटर फ्री में लग जाएगा, sdo से ऑर्डर करा लीजिए. हम लोगों ने sdo से ऑर्डर करा लिया और सामने ही एसडीओ जी.के. शर्मा ने फोन करके कह भी दिया कि बिजली कटी हुई है अभी मीटर लगा दो.
खैर दिन भर यह किचाइन चलती रही. शाम को जब मीटर लगाने आया तो उसने चार हजार रुपये मांगे. मतलब sdo के 4 बार फोन करने पर भी रिश्वत की राशि उतनी ही रही, जितनी पहले थी. मैंने उनको कहा कि कोई और तरीका बताओ, भाई तुम तो साहब के पर्सनल कहने पर भी उतना ही रुपया मांग रहे हो. हमने वह दौर भी देखा है जब एसडीओ से बिजली विभाग के कर्मचारी कांपते थे.. अब मुझे भरोसा है कि बिजली मन्त्री भी फोन कर देते तब भी काम नहीं हो पाता.
मीटर लगाने आये बन्दे ने कहा कि चार हजार तो देना ही पड़ेगा, वरना देख लीजिए… और रात में मीटर नहीं लग पाया.
सुबह फिर आया. मीटर लगाने के बाद हम लोगों ने सोचा कि 2000 दे देते हैं. वह चार हजार पर खूंटा गाड़े था. मैंने कहा कि तुम मीटर उखाड़ ले जाओ… हम अब चार हजार किसी हाल में नहीं देंगे.
जब 2000 रुपये में सौदा हो गया तो उसने बताया कि इस जले हुए मीटर का दाम आपके बिल में जुड़कर आयेगा… अगर एक हजार रुपये दे दीजिए तो हम इसको भी चेंज मे दिखा देंगे. बदले गए 4 मीटरों में वह जला हुआ मीटर मेरा ही था.
मैंने कहा कि एक पैसा मैं नहीं दूंगा. आप बिल में मीटर का पैसा ले लीजिएगा. मुझे धमका कर गया है कि साढ़े आठ हजार रुपये का स्मार्ट मीटर है, वह दाम आपके बिल में जुड़कर आयेगा.
मजे की बात है कि अरविंद कुमार शर्मा हमारे मधुबन, मऊ के रहने वाले हैं. वह मधुबन से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. वह मेरे ही जन सेवक बनने की फिराक में हैं!
हे मधुबन की जनता… एके शर्मा को विधायक बना देना. इससे वह अच्छे से आप लोगों के पिछवाडे में बांस कर सकेंगे, आपका कांस्टिपेशन ठीक हो जाएगा.
शर्मा जी ने प्री पेड मीटर लगवाए हैं. बिजली दफ्तर में बैठे थे तो एक गरीब महिला का दर्द सुना, जो बेचारी महीने में 500 रुपये बिल देने में भी सक्षम नहीं थी. विस्तार से उसकी कहानी दूसरी किस्त में लिखेंगे.


