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वरिष्ठ पत्रकार प्रभात डबराल का यूपी चुनाव का आँकलन पढ़िए

प्रभात डबराल-

फ़रवरी के शुरू में मैंने एक पोस्ट लिखी थी जिसमें कहा था कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में बीजेपी का पलड़ा थोड़ा भारी लग रहा है. मेरा मानना था कि जो झाड़ू इस पार्टी ने इन प्रदेशों में २०१७ में फेरा था, वो तो नहीं होगा लेकिन लेकिन इतनी सीट भाजपा पा जाएगी कि तोड़ फोड़ करके सरकार बना ले.

उत्तराखंड में मतदान हो चुका है और उत्तर प्रदेश के तीन वो चरण जहां भाजपा ने २०१७ और २०१९(लोकसभा) में स्वीप किया था, सम्पन्न हो चुके हैं.

क्या आज भी मैं मानता हूँ कि बीजेपी इन प्रदेशों में सरकार बना पाने की स्थिति में आ पाएगी?

उत्तर है शायद नहीं… उत्तर प्रदेश में तो बहुत ज़्यादा मुश्किल लग रहा है.

क्यों?

१) अब तक मतदान के जो आँकड़े सामने आए हैं उनसे ये पता चलता है कि इन क्षेत्रों में जिन भी सीटों पर भाजपा २०१४/२०१७ और २०१९ लगातार बहुत बड़े बहुमत से जीतती आयी है वहाँ मतदान का प्रतिशत बहुत ज़्यादा गिर गया है. और जहां बीजेपी काँटे की टक्कर में जीती थी वहाँ ज़्यादा वोट पड़ा है.

२) उत्तर प्रदेश के पहले तीन चरणों में ऐसी लगभग चालीस सीटें हैं जहां BJP १४/१७ और १९ में ज़बरदस्त मार्जिन से जीती थी- हर बार पहले से ज़्यादा वोटों से. पर इस बार वहाँ वोट ५ से १० प्रतिशत तक कम पड़ा है(डिटेल देने लगा तो पोस्ट लम्बी हो जाएगी).

३) साथ ही आमतौर पर शहरी इलाक़ों में कम वोट पड़ा और ग्रामीण इलाक़ों में ज़्यादा.

इसका अर्थ क्या हुआ?

यही कि नाना प्रकार की लहरों के प्रभाव में आकार भाजपा को उत्साह से वोट देने वाले इस बार उतनी बड़ी तादाद में बाहर नहीं निकले.

अगर ऐसा सही है तो ये बात उन सीटों पर भी लागू होगी जहां भाजपा ठीक ठाक टक्कर के बाद जीतती थी. वहाँ अगर ज़्यादा वोट पड़ा है तो साफ़ है वो भाजपा के लिए अच्छी खबर तो नहीं ही है.

ऐसा क्यों हुआ?

शायद इसलिए क्योंकि पिछड़ी जातियों में माकूल समीकरण बिठाने का जो खेल बीजेपी ने २०१७/२०१९ में किया था वो इसबार समाजवादी पार्टी ने कर लिया. साथ ही किसान आंदोलन, कोविड का क़हर और मंहगाई, बेरोज़गारी के असर ने मोदी लहर को बड़ी हद तक कमजोर कर दिया है.

अब मोदी जी के आज के भाषण को देखिए.

उन्होंने “साइकिल बम” की बात कह कर समाजवादी पार्टी को आतंकियों से जोड़ने की कोशिश की.

योगी की जगह अपने नाम पर वोट माँगा – “बताओ मुझे वोट दोगे कि नहीं”…

“विकास और क़ानून व्यवस्था” की जगह “राष्ट्रवाद और देशभक्ति” का नरेटिव बनाने की कोशिश की.

अब इन बातों का जिसको जो फलित निकलना हो निकाल ले. हमें तो लगता है उत्तर प्रदेश में बीजेपी हिली हुई है.

रहा सवाल उत्तराखंड का तो वहाँ शुरू से ही कड़ी टक्कर थी. अगर हरीश रावत की चकड़ेती ने रामनगर, सल्ट, हरिद्वार ग्रामीण और चौबट्टाखाल में खेल ना किया होता कांग्रेस को कौन रोक सकता था.

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