लखनऊ : उत्तर प्रदेश में जहाँ एक ओर माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर दृढ़ता से कार्य कर रहे हैं और केंद्र सरकार माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में लोकल फॉर वोकल एवं मेक इन इंडिया को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य शासन के कुछ वरिष्ठ अधिकारी इन नीतियों के विपरीत कार्य कर रहे हैं—ऐसी गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं।
शिकायतों के अनुसार, उत्तर प्रदेश शासन में प्रमुख सचिव स्तर के कुछ अधिकारीविभिन्न विभागों के प्रोजेक्ट्स में अनावश्यक हस्तक्षेप कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं कि न तो परियोजनाएँ समय पर पूरी हों और न ही मेक इन इंडियाके अंतर्गत आने वाली स्थानीय कंपनियों को अवसर मिल सके। आरोप है कि इन अधिकारियों की कार्यशैली से बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) को अप्रत्यक्ष लाभ पहुँचाया जा रहा है।
यह भी आरोप लगाया गया है कि लगभग हर विभाग के टेंडरों में कुछ चुनिंदा कंपनियाँ—जैसे , HP ACER, AUR DELL ke sath CELKON, EDIQUE, HELLO MOBILE, UNBOX, HAPPI MOBILE और MIRC—ही बार-बार योग्य ठहराई जाती हैं, जबकि स्थानीय एवं भारतीय OEM कंपनियों को विभिन्न तकनीकी अथवा प्रक्रियात्मक कारणों से बाहर कर दिया जाता है।
शिकायत के अनुसार, पहले OEM कंपनियों को ब्लॉककिया जाता है, फिर सीमित कंपनियों के बीच कार्टेलबनाकर प्रतिस्पर्धा समाप्त कर दी जाती है। इसके बाद टेंडर राशि बजट से अधिक कोट की जाती है और विभागों पर दबाव बनाकर बजट बढ़वाया जाता है, जिससे राज्य सरकार को राजस्व की हानि होती है।
यह भी गंभीर आरोप हैं कि:
• अधिकांश परियोजनाएँ समय पर पूरी नहीं होतीं
• देरी के बावजूद संबंधित कंपनियों पर कोई प्रभावी पेनाल्टी नहीं लगाई जाती
• इन गतिविधियों में एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा संरक्षण दिया जाता है
• संबंधित अधिकारी पर पूर्व में भी सरकार की नीतियों के विरुद्ध कार्य करने के आरोप लग चुके हैं
इन सभी तथ्यों और आरोपों के मद्देनज़र यह अपेक्षा की जाती है कि माननीय मुख्यमंत्री जी स्वयं इस पूरे मामले का संज्ञान लेंगे, निष्पक्ष जाँच कराएंगे और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो ऐसे अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाकर मेक इन इंडिया और स्थानीय उद्योगों के हितों की रक्षा करेंगे।
उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रगति, पारदर्शिता और ईमानदार प्रशासन के लिए यह अत्यंत आवश्यक है।
जहाँ जहाँ बीजेपी राज है, वहाँ वहाँ यही हाल है, यही कंपनियाँ यूपी से लेकर राजस्थान तक में काम कर रही हैं, पढ़ें राजस्थान का हाल-


