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सुख-दुख

अमर उजाला संपादक उपमिता बाजपेयी ने पत्रकार से कुलपति बने विजय मनोहर तिवारी के बारे में क्या लिखा है? पढ़ें

उपमिता बाजपेयी-

बचपन में जब जर्नलिज़्म का संक्रमण मुझे लगा, तो उसकी एक बड़ी वजह विजय मनोहर तिवारी जी भी थे। नईदुनिया और सहारा समय में उन्हें पढ़ना, सुनना और देखना अद्भुत अनुभव होता था। फिर वह वक्त भी आया जब दो-स्तंभ वाली टीम का एक हिस्सा मैं थी और एक वो। एक ओर वे शब्दों के जादूगर थे और मैं नौसिखिया। तब मैं उनकी खूबसूरत कॉपी से घनघोर हसद किया करती थी।

मेरे लिए लार्जर-देन-लाइफ जर्नलिज़्म की सबसे करीबी मिसाल वही रहे हैं। वे जब इतिहास की बयानी करते हैं, तो लगता है कि अल्फ़ाज़ कहीं दर्ज कर लूं।

उनकी ग्राउंड रिपोर्ट्स को बांचना, फिर प्रिय पाकिस्तान, हरसूद, साध्वी की कथा जैसी किताबों को जिल्द समेत समझना — मेरे लिए लगभग जर्नलिज़्म का एक क्रैश कोर्स ही था।

एक रिपोर्टर से इंफॉर्मेशन कमिश्नर और फिर देश के पहले और सबसे बड़े पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति बनने तक की उनकी क्रोनोलॉजी सचमुच अलौकिक है।

आज वे बनारस में हमारे दफ़्तर आए और हमारी टीम के साथ वह सब समझ साझा की, जो शायद किसी जर्नलिज़्म स्कूल के कोर्स से भी परे है।

उपमिता अमर उजाला बनारस की एडिटर हैं. उनका यह लिखा एफबी से लिया गया है.

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