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उत्तर प्रदेश

UPSDM मुख्यालय पर निदेशक पुलकित खरे द्वारा स्विच ऑन की ये घटना तिल का ताड़ बन गई!

अनिल कुमार-

स्विच ऑन की ये घटना पीढि़यों को प्रोत्‍साहित करती रहेगी!

उत्‍तर प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारी विकास की ऐसी लहर ला रहे हैं, जिसने सुनामी का रूप धर लिया है. विकास की इसी कड़ी में UPSDM मुख्यालय पर मिशन निदेशक पुलकित खरे ने मुख्यालय के प्रमुख द्वारों पर नव स्थापित साइन बोर्ड का सोमवार को स्विच ऑन कर शुभारंभ किया. इस शुभारंभ से उत्‍तर प्रदेश में रोशनी फैली है तथा इस महान विकास से संस्‍थान की पहचान मजबूत हुई है. साइन बोर्ड के स्विच के ऑन होने से गरीबों को रोशनी मिलेगी, कमजोरों को उजाला मिलेगा वो लोग इस रोशनी और उजाले का लाभ उठाते हुए वे आगे बढ़ सकेंगे तथा देश को मजबूत करेंगे.

वैसे, निदेशक महोदय इस स्विच ऑन कार्यक्रम में विभागीय मंत्री को भी बुला लिये होते तो ज्‍यादा बेहतर होता. साइन बोर्ड का स्विच ऑन होना कोई सामान्‍य या हल्‍की घटना नहीं है, यह एक ऐतिहासिक घटना है. अगर आप इतिहास उठाकर देखेंगे तो अतीत के पन्‍नों में आपको कहीं भी स्विच ऑन करने की कोई भौगोलिक जानकारी उपलब्‍ध नहीं मिलेगी. यह स्विच ऑन होने की पहली घटना है, जो मनुष्‍य के धरती पर आने से लेकर बीते रविवार तक पहले कभी नहीं हुई थी. यह उत्‍तर प्रदेश और स्किल डेवलपमेंट के लिये बड़ी उपलब्धि है जो आने वाली पीढि़यों को प्रोत्‍साहित करती रहेगी.

साइन बोर्ड का स्विच ऑन करना भी स्किल का काम है. कोई ऐरा गैरा या साधारण व्‍यक्ति साइन बोर्ड का स्विच ऑन नहीं कर सकता है, इसके लिये आपको डाइरेक्‍ट आईएएस वाली परीक्षा पास करनी होती है. न्‍यूटन, गैलेलियो, एडिसन, मैडम क्‍यूरी, यहां तक कि अर्थशास्‍त्र वाले मार्शल और कीन्‍स भी कभी कोई स्विच ऑन नहीं कर पाये थे, क्‍योंकि विज्ञान और अर्थशास्‍त्र के किसी किताब में ऐसी कोई जानकारी उपलब्‍ध नहीं है कि किसी ने स्विच ऑन किया हो. ऐसा काम केवल डाइरेक्‍ट यूपीएससी पास करने वाले अधिकारी ही कर पाते हैं. किसी साइन बोर्ड का स्विच ऑन करना सामान्‍य लोगों के वश की बात नहीं है.

मेरे पिता जी बौल का स्विच तो ऑन कर लेते हैं, लेकिन किसी साइन बोर्ड का स्विच आज तक ऑन नहीं कर पाये, क्‍योंकि उन्‍होंने यूपीएससी पास नहीं की है. चूंकि मेरे पिताजी यूपीएससी पास नहीं हैं इसलिये वह साइन बोर्ड का स्विच ऑन करने का स्किल नहीं रखते हैं, और मैंने भी यूपीएससी पास नहीं की है तो एक नालायक पुत्र होने के नाते मेरा फर्ज बनता है कि उनसे कुछ तो ऑन करा के उद्घाटन करवाऊं. इस लिहाज से मैंने तय किया है कि घर पर जब भी टुल्‍लू पंम्‍प लगेगा, मैं उसका स्विच अपने पिताजी से ही ऑन करवाऊंगा, क्‍योंकि बौल का स्विच तो पिताजी रोज ही ऑन करते रहते हैं.


इसी को अफ़सरशाही कहते हैं!
चाहें तो तिल का ताड़ बना दें!
सिर्फ साइन बोर्ड का स्विच ऑन किया गया लेकिन उसे ऐसे पेश किया जा रहा है जैसे कोई बहुत बड़ी उपलब्धि, कोई ऐतिहासिक काम कर दिया गया हो! छोटे से काम को बड़ा सरकारी इवेंट बना दिया गया! ग़ज़ब होते हैं अफसर लोग! -यशवंत सिंह, संपादक, भड़ास4मीडिया

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