
पिछले दिनों भारत पर खालिस्तानी चरमपंथी गुरपतवंत सिंह पन्नू को मारने की साजिश रचने का आरोप लगा था. मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि इस साजिश को अमेरिकी एजेंसियों ने नाकाम कर दिया था. लेकिन अब अमेरिका ने निखिल गुप्ता नाम के एक भारतीय नागरिक पर इस कथित साज़िश में शामिल होने का आरोप भी मढ़ा है.
इस सिलसिले में भारत की तरफ से 29 नवंबर को कहा गया कि, 18 नवंबर को ही इस मामले में हाईलेवल जांच बैठा दी गई थी. भारत सरकार की तरफ से ये बयान आने के कुछ घंटे बाद ही अमेरिका में न्यूयॉर्क साउथ ज़िले के अटॉर्नी ऑफिस ने एक प्रेस रिलीज जारी की. इस प्रेस रिलीज में कहा गया है कि खालिस्तानी चरमपंथी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की ‘नाकाम कोशिश’ में एक भारतीय ‘निखिल गुप्ता’ और CC-1 का हाथ था.
इसके अलावा अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की जारी प्रेस रिलीज में ‘भारत सरकार के एक कर्मचारी’ का भी ज़िक्र है. जिसके लिए लिखा गया, ‘साल 2023 की शुरुआत में भारत सरकार के एक कर्मचारी ने भारत और अन्य जगहों पर निखिल गुप्ता के साथ मिलकर अमेरिकी धरती पर एक वकील और एक राजनैतिक कार्यकर्ता (पन्नू) की हत्या की साजिश रची थी.
द न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अभियोजक पक्ष ने आरोप लगाया है कि, हमले की योजना भारत सरकार के एक अधिकारी ने बनाई थी, जिसने इसे अंजाम देने के लिए टैप किए गए व्यक्ति निखिल गुप्ता को बताया था कि एक लक्ष्य न्यूयॉर्क में और दूसरा कैलिफोर्निया में था।
इस पूरी प्रेस रिलीज में भारतीय अधिकारी का नाम नहीं लिया गया है. भारतीय अधिकारी को प्रेस रिलीज में ‘CC-1’ कहके संबोधित किया गया है. निखिल गुप्ता को इसी ‘CC-1’ का सहायक बताया गया है. अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के अनुसार, ‘CC-1 ने कई जगह खुद को ‘सीनियर फील्ड ऑफिसर’ बताया है. उसपर ‘सेक्योरिटी मैनेजमेंट’ और ‘इंटेलीजेंस’ की जिम्मेदारी थी. CC-1 ने अपने आप को CRPF का पूर्व कर्मचारी बताया था.’
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक निखिल गुप्ता के बारे में ज़्यादा कोई जानकारी नहीं है. इतना ज़रूर पता है कि वो अमेरिका निवासी एक भारतीय नागरिक है. अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के अनुसार चेक रिपब्लिक ने 30 जून 2023 को निखिल गुप्ता को गिरफ्तार कर हिरासत में ले लिया था. लेकिन अभी तक उस ‘CC1’ के बारे में जानकारी नहीं हुई है जिसका जिक्र अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की प्रेस रिलीज में किया गया है.
जाहिर सी बात है कि इस बड़े मसले पर विपक्ष भारत सरकार को घेरेगा. तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोईत्रा ने ट्वीट का एक पूरा थ्रेड पोस्ट कर अमेरिकी एजेंसी की प्रेस रिलीज शेयर की है. साथ ही लिखा है, ‘ये जानलेवा है. अमेरिकी अधिकारियों ने भारतीय व्यक्ति पर अभियोग लगाया और भारतीय सरकारी कर्मचारी सीसी-1 पर अमेरिकी धरती पर अमेरिकी नागरिक को मारने के लिए उसे काम पर रखने का आरोप लगाया. संघी सोचते हैं कि भाजपा सरकार के लिए “दुश्मनों” की तलाश करना और उन्हें मारना ठीक है, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सकते। गड़बड़ी के बिना नहीं. शर्म करो- यह गांधी का भारत था.’
वरिष्ठ पत्रकार दीपक शर्मा ने एक्स पर लिखा है, ‘जो काम अंडरवर्ल्ड के शूटरों से कराये जाने चाहिये थे वो काम अगर देश के सरकारी अफसरों से सीधे कराये जायेंगे तो नतीजे शर्मसार करेंगे। उधर अमेरिका ने भी आज हमारा साथ नहीं दिया और बेहद नाजुक मामले को दुनिया के सामने खोल दिया।
गुरपतवंत सिंह पन्नू जैसे आतंकी सरगना तो अमेरिका एक डिफेंस डील के बदले सौंप देता. पर हमारी कूटनीति में ही खामियां हैं. जो आदमी हमारे देश को तोड़ना चाहता है उस खलनायक का चेहरा और साजिशें हमें दुनिया के सामने रखनी चाहिये थीं. इसमें कैसा पर्दा ? G20 को पन्नू की साजिशें खुलकर बयान करनी चाहियें थी.
सवाल ये भी है कि ये कैसा भारतीय अफसर था जो अमेरिकी अंडर कवर एजेंट को शूटर मान बैठा था. आप खुद ट्रैप हो गये और अमेरिकी जासूसों से डील करने लगे ? इससे बेहतर योजना तो जेल से बबलू श्रीवास्तव और छोटा राजन जैसे डॉन बनाते हैं.
कहीं न कहीं देश का खुफिया नेटवर्क एक्सपोज हुआ है. बेहद नौसिखया तरीके से ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा था. आज रॉ के संस्थापक आर एन काओ साहब की आत्मा को ठेस लगी होगी. मुझे कहना नहीं चाहिये पर बताना जरूरी है कि रिबेरो और गिल जैसे पुलिस अफसरों ने सात समंदर पार बहुत से आपरेशन देश के लिये किये पर कभी विवाद नहीं हुआ. सच ये है कि हम आज पहली बार बहुत देसी और हल्के किस्म के ऑपरेशन देख रहे हैं।Anyway feeling sad and sorry for Nikhil !’
यहां पढ़ें – अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की जारी प्रेस रिलीज


