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अमेरिका का बड़ा झटका: भारत के सोलर उत्पादों पर 123% एंटी-डंपिंग ड्यूटी, कुल टैक्स 200% पार

भारत-अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील वार्ता के बीच अमेरिका ने बड़ा झटका देते हुए भारतीय सोलर सेल और मॉड्यूल पर 123.04% की एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा दी है। पहले से लागू शुल्कों को जोड़ने पर कुल टैरिफ 200% से भी ज्यादा हो गया है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में टिक पाना बेहद मुश्किल माना जा रहा है।

अमेरिकी वाणिज्य विभाग के इस फैसले में कहा गया है कि भारत से निर्यात हो रहे सोलर उत्पाद अमेरिकी बाजार में कथित तौर पर कम कीमत पर बेचे जा रहे थे, जिससे वहां के घरेलू उद्योग को नुकसान हो रहा था। इसी आधार पर यह कड़ा कदम उठाया गया है।

इस आदेश में भारत की चार प्रमुख कंपनियों का नाम सामने आया है, जिन पर यह ड्यूटी लागू होगी। इनमें शामिल हैं:

  • Adani Group की दो सोलर कंपनियां
  • एक जापानी कंपनी की भारतीय इकाई
  • सलूजा परिवार की कंपनी

सूत्रों के मुताबिक, पहले से लागू काउंटरवेलिंग ड्यूटी और अन्य शुल्कों के साथ यह नया एंटी-डंपिंग टैक्स जुड़ने पर कुल प्रभावी टैरिफ 200% से ऊपर पहुंच गया है। ऐसे में भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना लगभग असंभव हो सकता है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। ऐसे में इसे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों के लिहाज से संवेदनशील कदम माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, इस मामले में केवल भारत ही नहीं बल्कि लाओस और इंडोनेशिया की कुछ कंपनियों पर भी जांच चल रही है। हालांकि फिलहाल यह प्रारंभिक निर्णय है और अंतिम फैसला करीब 75 दिनों के भीतर आने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतिम फैसला भी इसी तरह बरकरार रहता है, तो भारत का सोलर निर्यात अमेरिकी बाजार में गंभीर रूप से प्रभावित होगा और इसका असर देश के तेजी से बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर भी पड़ सकता है।


अमेरिका ने भारत से आयातित सोलर सेल और मॉड्यूल पर 123.04% का एंटी-डम्पिंग टैरिफ़ लगा दिया है. इन उत्पादों पर पहले के टैरिफ़ को जोड़ लें, तो कुल टैरिफ़ 200% से ज़्यादा है. इस आदेश में चार कंपनियों का नाम है, जिनमें दो अदानी ग्रुप की हैं, एक जापानी कंपनी की भारतीय इकाई है और एक सलूजा परिवार की है.
यह टैरिफ़ ऐसे समय में लगाया गया है, जब दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर चर्चा चल रही है. इतने भारी शुल्क से इन कंपनियों के लिए अमेरिकी बाज़ार में टिकना लगभग असंभव हो जायेगा. भारत की इन कंपनियों के अलावा लाओस और इंडोनेशिया की कुछ कंपनियों पर भी जाँच चल रही है. अंतिम निर्णय 75 दिन के भीतर आ जायेगा. -प्रकाश के रे, वरिष्ठ पत्रकार

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