अमेरिका-भारत ट्रेड वॉर ने भारतीय उद्योग-व्यापार की नींद उड़ा दी है। ट्रंप सरकार की बढ़ी टैरिफ दरों ने कई सेक्टरों को सीधे झटका दिया है और करोड़ों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। हालत यह है कि एक्सपोर्टर सरकार से तुरंत ब्याज पर राहत, सब्सिडी और MSME सेक्टर को तगड़ा सपोर्ट मांग रहे हैं। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भारतीय निर्यातकों का कारोबार ठप पड़ सकता है और लाखों लोगों का भविष्य दांव पर लग सकता है…
मो. असगर-
जो बेख़बर हैं वो जान लें टैरिफ का ये असर तुम तक कैसे पहुंचेगा?
- कारोबार पर चोट – अमेरिका ने भारतीय सामान पर 50% तक टैरिफ़ थोप दिया है। टेक्सटाइल, ज्वैलरी, ऑटो पार्ट्स और केमिकल्स जैसे सेक्टर महंगे होकर अमेरिकी मार्केट में कम प्रतिस्पर्धी हो गए हैं। इसका मतलब है, निर्यात (export) घटेगा और कारोबारियों की कमाई सिकुड़ेगी।
2. नौकरियों पर संकट – जब निर्यात घटेगा तो कारखानों में उत्पादन (production) भी कम होगा। MSME और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे, जिन पर करोड़ों लोगों की नौकरियां टिकी हैं। इससे नए रोजगार रुकेंगे और पुरानी नौकरियां भी खतरे में पड़ सकती हैं।यानी लोग जॉब्स से निकाले जा सकते हैं। जल्दी कुछ नहीं हुआ तो छंटनी का दौर शुरू होगा।
3. अर्थव्यवस्था की चिंता – भारत की जीडीपी में निर्यात का अहम रोल है। अगर लगातार टैरिफ़ बाधाएं खड़ी होती रहीं, तो चालू खाता घाटा बढ़ेगा और रुपया कमज़ोर होगा।
4. विदेश नीति की ज़िम्मेदारी – सवाल यह है कि क्या भारत की विदेश नीति ने इस मोर्चे पर पर्याप्त तैयारी की? राजनीतिक रिश्ते मज़बूत दिखे, लेकिन व्यापारिक वार्ताओं में भारत पिछड़ गया। हमारी सरकार बातचीत और कूटनीति के हवाले देती रही, मगर उसी में ख़ुद पिछड़ गई।

नतीजा साफ़ है, टैरिफ़ वार सिर्फ़ आंकड़ा नहीं, बल्कि रोज़गार और अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला है। सरकार को व्यापारिक कूटनीति को मज़बूत करना ही होगा। नोटबंदी, जीएसटी और कोरोना के बाद ये चौथा बड़ा वायरस है जिससे कारोबार लड़खड़ा कर वेंटिलेटर पर आ जाएगा।


