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भगवान से ठगी : वैष्णो देवी के चढ़ावे में चढ़ रहे ‘चांदी’ के मिलावटी सिक्के, ठगों ने 500 करोड़ से ज्यादा का काला धन बनाया!

जम्मू-कश्मीर के Vaishno Devi Shrine में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जा रहे चांदी के चढ़ावे को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया कि बड़ी मात्रा में जमा ‘चांदी’ में महज 5-6% ही असली सिल्वर है, जबकि बाकी हिस्सा कैडमियम जैसे जहरीले और सस्ते धातुओं से बना है, जिससे न सिर्फ श्रद्धा बल्कि स्वास्थ्य और नियमों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।


प्रकरण पर वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार लिखते हैं-

चुनावों में कितना भी अर्ध सैनिक बल लगाकर मनोवैज्ञानिक दबाव बना लीजिए, पुलिस लगा कर दिखावा कर लीजिए, उनके परेड करते वीडियो से माहौल बना लीजिए लेकिन सच यह है कि ख़रीदने पर इस देश में पनीर शुद्ध ही होगा, इसकी गारंटी कोई नहीं दे सकता।

हेराफेरी, मिलावट, ठगी मूल प्रवृत्ति का अंश बनता जा रहा है। माता वैष्णव देवी ट्रस्ट ने 550 करोड़ की चाँदी का चढ़ावा भारत के राष्ट्रीय टकसाल को सौंपा है ताकि इन सबको गलाया जा सके और रखाने लायक बनाया जा सके।

गलाने पर पता चला कि असली चाँदी नहीं है। इसमें मिलावट है। ट्रस्ट को अनुमान था कि 550 करोड़ की चाँदी हो सकती है मगर 20 करोड़ से ज़्यादा की नहीं लगती। लोहा और कैडमियम मिला हुआ है। चाँदी बहुत कम है। मतलब चाँदी का सिक्का बेच कर 500 करोड़ से अधिक का काला धन बन गया।

देश भर से लोग चाँदी का गहना और सिक्का ख़रीद कर माता वैष्णव देवी के दर्शन करने जाते हैं। मतलब जगह-जगह में यह ठगी चल रही है। इस तरह की ठगी को कोई नहीं रोक सकता है। कारण सबको पता है। आस्था के नाम पर कहीं भी कूद जाने वाली राजनीति भी इसे ठीक नहीं कर सकती है।

कोई देवी देवताओं को क्या ठगेगा लेकिन उनके नाम पर ठगा जा रहा है, ठगने का तंत्र बेहद व्यापक है। पनीर और चाँदी शुद्ध बिकने की गारंटी कोई नहीं दे सकता है। प्रशांत मुखर्जी की रिपोर्ट है। इकोनोमिक टाइम्स में छपी है।

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