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आज के अखबार : वाराणसी में ‘दावों’ का सच योगी ने बताया, मोदी बंगाल में प्रचार पर, छापों की चर्चा नहीं

संजय कुमार सिंह

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल बंगाल में प्रचार पर थे। अमर उजाला की लीड के अनुसार कहा है कि बंगाल में तृणमूल के संरक्षण में घुसपैठ जनसांख्यिकी बदली, दंगे भड़के। उपशीर्षक, हाईलाइट किए हुए अंश आदि में भी वो नहीं है जो द टेलीग्राफ की खबर का शीर्षक है। द टेलीग्राफ की मुख्य खबर के अनुसार कल ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि न्यायपालिका को लोकतंत्र की रक्षा के लिए काम करना चाहिए। खबर के अनुसार मुख्यमंत्री ने यह बात देश के मुख्य न्यायाधीश की मौजूदगी में कही। प्रधानमंत्री जब पश्चिम बंगाल में थे तभी एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यह भाषण दिया और दिल्ली के मेरे नौ अखबारों से अलग कोलकाता के टेलीग्राफ ने मुख्यमंत्री की खबर को लीड बनाया है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की खबर भी साथ ही है, फोटो भी है लेकिन खबर का शीर्षक है, ईडी पर दीदी के छापे को लेकर मौन रहे मोदी। कहने की जरूरत नहीं है कि ममता बनर्जी को चुनावी चुनौती दे रहे मोदी के लिए ईडी के छापे और उसपर ममता बनर्जी की जवाबी कार्रवाई वैसे तो भाजपा के लिए मुद्दा है लेकिन कोलकाता में मोदी उसपर मौन रहे। दूसरे अखबारों ने यह तो नहीं ही बताया है, दिल्ली के नवोदय टाइम्स ने भी पहले पन्ने पर चार कॉलम में शीर्षक वही बनाया है, जो अमर उजाला में है। उपशीर्षक है, हावड़ा और गुवाहाटी के बीच पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का उद्घाटन।  देशबन्धु ने उद्घाटन की खबर को सिंगल कॉलम में छापा है जबकि घुसपैठ और जनसांख्यकी की खबर पहले पन्ने पर नहीं है। आप जानते हैं कि घुसपैठ रोकना राज्य सरकार का काम नहीं है और जो रह रहा है उसे सामान्य सुविधा मुहैया कराना राज्य सरकार का काम है। इसमें डबल इंजन वाले मध्य प्रदेश में पीने के पानी के मामले में जो हुआ, देश भर में और भी जो हालत हैं उसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि बंगाल की सत्ता भी उसे मिले। इसके लिए वह अपने काम, बताने, विपक्ष की कमजोरी बताने की बजाय घुसपैठ को संरक्षण देने का आरोप लगा रहे हैं। स्थिति यह है कि केंद्र सरकार की मदद या सहयोग के बिना पश्चिम बंगाल सरकार को ऐसा कुछ करने का मौका ही नहीं मिले।

तथ्य यह है कि दिल्ली पुलिस ने बांग्ला बोलने वालों को बांग्लादेशी बता कर खदेड़ दिया। जबरन बांग्लादेश भेजे गए लोगों में से कम से कम एक को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वापस लाना पड़ा है। खबरें रहीं हैं कि दिल्ली (और अन्य कुछ राज्यों) में बांग्ला भाषी मुसलमानों या बांग्लादेशी नस्ल के संदेह में कई लोगों को हिरासत में लिया गया और “अवैध प्रवासी” मानकर बांग्लादेश की ओर भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। यह कार्रवाई राष्ट्रीय राजधानी में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ अभियान के हिस्से के रूप में की जा चुकी है। एक महिला — सोनी (सनाली) खातून को परिवार सहित बिना उचित वेरिफिकेशन के बांग्लादेश भेजा गया था। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद उन्हें बांग्लादेश से भारत वापस लाया गया क्योंकि उनकी नागरिकता का मामला अदालत के समक्ष चल रहा था। जाहिर है कि घुसपैठियों के मामले में केंद्र और भाजपा की सरकारों का काम कैसा है। प्रधानमंत्री ने अपनी एक रैली में कहा और मैंने सुना, मटुआ समुदाय और धार्मिक उत्पीड़न से आए अन्य लोग अपने अधिकार खोएँगे नहीं और उन्हें नागरिकता के अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा। यह सुरक्षा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत मिले अधिकारों से सुनिश्चित होगी।

मोदी ने दोहराया कि घुसपैठ और अवैध प्रवास पश्चिम बंगाल के लिए एक बड़ी सुरक्षा और सामाजिक समस्या है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की जनसंख्या और संस्कृति पर असर पड़ा है, और इसे रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की ज़रूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की नीतियाँ इस समस्या को बढ़ावा दे रही हैं। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री खुलकर हिन्दू-मुसलमान तो कर ही रहे हैं, पश्चिम बंगाल सरकार या टीएमसी पर घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप फिजूल है और इसीलिए दूसरे अखबारों में इस खबर को प्रमुखता नहीं मिली है। लेकिन जो प्रधानमंत्री के इस तरह के प्रचार और भाजपा की इस राजनीति का समर्थन कर रहे हैं उन्हें सोचना चाहिए कि क्या यह ठीक है। जहां तक भाजपा की राजनीति और सत्ता का सवाल है, कल मैं यहां लिख चुका हूं कि महाराष्ट्र में उसकी सरकार कैसे बनी और राज्यपाल के गलत आदेश के कारण उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा दे दिया, सुप्रीम कोर्ट ने बाद में जो कहा वह फेट एकम्पली रहा और भले तब के राज्यपाल ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा दे दिया लेकिन भाजपा के लिए यह सब सामान्य है। महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव में और उसके बाद जो हुआ उससे देश की राजनीतिक स्थिति का भी अंदाजा लगता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, शिन्दे के कॉरपोरेटर होटल में फडणविस से दल बदल कराने से इनकार किया। हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस की लीड इंडिगो की सेवा ठीक न होने से देश भर में मची अफरातफरी के लिए सरकार ने उसपर 22 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। दिसंबर में देश भर में विमान यात्रियों को जो परेशानी हुई, देश की विमान सेवा की जो बदनामी हुई उसके लिए मुझे यह जुर्माना बहुत कम लगता है लेकिन ज्यादा लगाने से भी क्या होता और कितना ज्यादा होता। मुद्दा यह है कि सरकार उस स्थिति को टाल नहीं पाई। जुर्माना नियमों को लागू नहीं करने के कारण है और इसका कारण खर्च या बचत करना ही रहा होगा। जो हुआ उससे कंपनी आर्थिक संकट में फंस सकती है और यह सब वो सरकार कर रही है जो ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का ढिंढोरा पीटती रही है। दिखाई यह दे रहा है कि हर क्षेत्र में व्यवसायी परेशान है और मनमानी करने के लिए आजाद।

द हिन्दू में पहले पन्ने पर आधा विज्ञापन है। लीड का शीर्षक है, ईरान के नेता अयातुल्ला खोमैनी ने प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए ट्रम्प को अपराधी करार दिया। दूसरी बड़ी खबर द हिन्दू समूह के अपने आयोजन की है। दो सिंगल कॉलम की खबरों में एक प्रधानमंत्री द्वारा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के उद्घाटन की है और दूसरी, इंदौर की त्रासदी पर राहुल गांधी के इंदौर दौरे की है। कहने की जरूरत नहीं है कि यह एक महत्वपूर्ण खबर है और जनहित में इसे प्रमुखता मिलनी चाहिए थी। विपक्षी तृणमूल सरकार पर प्रधानमंत्री के हमले और भाजपा की राजनीति के बारे में ऊपर लिख चुका हूं। ऐसे में विपक्ष के प्रमुख नेता ने सरकार की लापरवाही के लिए उसपर हमला किया तो खबर को जनता की जानकारी में लाया जाना चाहिए। खबर बताती है कि विपक्ष के नेता ने अपना काम किया लेकिन खबरें प्रधानमंत्री और सरकार का प्रचार करने वाली हैं। कारण बताने की जरूरत नहीं है। दिलचस्प यह है कि भाजपा ही कांग्रेस की सरकार को भ्रष्ट कहती थी अब जो हो रहा है वह न सिर्फ भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप देना है, मिल-बांट कर खाना भी दिखाई दे रहा है। दि एशियन एज की लीड वही है जो अमर उजाला की है। दिलचस्प यह है कि मटुआ समुदाय के लिए जो कहा उसके साथ यह लीड है। चार बुलेट प्वाइंट फ्लैग शीर्षक है। इनमें एक है – मटुआ को सुरक्षा का आश्वासन।  

इन और ऐसी खबरों के बीच प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र वाराणसी में जो हो रहा है वह कम नहीं है और स्थिति ऐसी है कि मुख्यमंत्री को जाना पड़ा। पेश है, “खबर के कुछ चुनिन्दा अंश जिससे आपको वाराणसी की स्थिति, विरोध, विकास और प्रशासन, सरकार या भाजपा के दावों का अनुमान लग जाएगा। इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर आठ कॉलम के एंकर का शीर्षक है, वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर पुनरुद्धार विवाद से जीवन या मृत्यु ठहर नहीं जाते हैं। फ्लैग शीर्षक का अर्थ यही है कि मुख्यमंत्री को मौके पर पहुंच कर ‘दावों’ का सच बताना पड़ा – विपक्षी पार्टियों ने वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर सुंदरीकरण अभियान के तहत रानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को कथित तौर पर तोड़े जाने को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर हमला किया है, और इसे बीजेपी सरकार द्वारा प्राचीन शहर की विरासत पर एक और हमला बताया है….. काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित मणिकर्णिका घाट, जिसका केंद्र और राज्य में बीजेपी सरकार की एक परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर नवीनीकरण किया गया था, अब बदलाव का इंतजार कर रहा है….. शनिवार को, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद विपक्ष पर हमला बोलते हुए दावा किया कि उनकी सरकार द्वारा शुरू की गई विकास परियोजनाओं में बाधा डालने के लिए ‘साजिशें रची जा रही हैं’। आज मेरा यहां आना इसलिए जरूरी था ताकि सही तथ्य जनता के सामने रखे जा सकें। … वाराणसी के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, आलोक कुमार ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि नवीनीकरण के दौरान एक मूर्ति टूट गई थी। इसका पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए गए हैं। जिला मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार ने कहा कि असल में दीवारों पर बनी मूर्तियां क्षतिग्रस्त हुई थीं, और अन्य कलाकृतियों को संस्कृति विभाग द्वारा ‘सुरक्षित’ कर लिया गया है और बाद में उन्हें उनके मूल रूप में फिर से स्थापित किया जाएगा।”

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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