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सुख-दुख

हिन्दी पत्रकारिता दिवस में भाषण से पहले अपना आत्म परिचय क्यों भूल गए ये वरिष्ठ पत्रकार?

शंभुनाथ शुक्ला-

मुझे हिन्दी पत्रकारिता दिवस, 3० मई को बरेली में भाषण देने जाना है। व्यवस्थापकों ने अनिल माहेश्वरी के मार्फ़त मेरे लिए भी न्योता भेजा है। अनिल जी ने कहा, अपना एक लेख, आत्म परिचय और फ़ोटो भेज दें।

हज़ार शब्दों का लेख तो इसी मोबाइल में टाइप कर मैंने भेज दिया और एक फ़ोटो भी। परंतु आत्म परिचय नहीं लिख सका। मैं भूल चुका हूँ, मैं हूँ कौन! अक्सर लोग मुझे मिल जाते हैं, पैर छूते हैं और बताते हैं कि मैं आपका पाठक हूँ या आपने मुझे रखा था। मैं उन्हें याद तो नहीं कर पाता लेकिन उनको इसका अहसास नहीं होने देता।

एक बार तो हद हो गई, पुस्तक मेले में दो युवतियाँ मिलीं और नमस्ते किया। मैंने भी खूब गर्मजोशी दिखाई और पूरी बातचीत में उनका नाम नहीं लिया। चलते समय बोलीं, आपने पहचाना नहीं सर। हमने आपके साथ काम किया हुआ है।

तब मुझे अपने ऊपर ग्लानि हुई कि ये लोग मुझे घमंडी समझ रही होंगी जो इतनी सुंदर व नामी युवतियों को नहीं पहचान पा रहा। अंत में अनिल जी से कहा, आप ही मेरा आत्म परिचय लिख दो।

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