“पत्रकार और लेखक विमल कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर दिनकर पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि सत्ता से दूरी और पत्रकारिता की नैतिकता बनाए रखने के लिए यह ज़रूरी है कि लेखक-पत्रकार किसी भी सरकारी सम्मान को स्वीकार न करें।”
नीचे पढ़िए विमल कुमार जी ने जो कुछ लिखा है-
मित्रों अगर कोई लखटकिया पुरस्कार न लिया जाए तो आपको बुरा तो नहीं लगेगा। मुझे ट्रोल तो नहीं करेंगे।गालियां तो नहीं देंगे।
माननीय नीतीश कुमार जी, मुख्यमंत्री, बिहार द्वारा
परवेज आलम, निदेशक, राजभाषा विभाग… पटना
विषय राजभाषा विभाग द्वारा दिनकर पुरस्कार के सम्बंध में।
महोदय ,
मुझे बेहद प्रसन्नता है कि आपके राजभाषा विभाग ने दिनकर पुरस्कार के लिए मेरे नाम का चयन किया है और इससे भी अधिक प्रसन्नता की बात है कि हिंदी के स्वनामधन्य आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी को शिखर सम्मान के लिए चुना गया है।
- मैं वर्षों तक एक पत्रकार के रूप में एक समाचार एजेंसी की ओर से दिल्ली से बिहार सरकार और पार्टी को कवर करता रहा हूँ, इस नाते नैतिक रूप से यह उचित नहीं होगा कि मैं यह पुरस्कार ग्रहण करूँ।
- दिनकर जी ने अपनी साहित्य सेवा से हिंदी साहित्य एवम् भाषा को बड़ा अवदान दिया है और बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। उनके प्रति मेरे मन में गहरा सम्मान है लेकिन यह पुरस्कार लेने में असमर्थ हूँ।
- मेरा मानना है कि लेखक और पत्रकार को हमेशा विपक्ष में रहना चाहिए और किसी भी तरह की सत्ता से दूर रहना चाहिए चाहे कोई सरकार हो। इस नाते भी मुझे यह पुरस्कार लेना साहित्य और पत्रकारिता की नैतिकता के खिलाफ है।
- मैं पूरी विनम्रता के साथ इस पुरस्कार को ग्रहण करने के लिए खुद को उपयुक्त नहीं मानता और आज देश में जिस तरह के हालात पैदा हो गए हैं विशेषकर बिहार में भी हालात खराब हो रहे हैं उसे देखते हुए एक निष्पक्ष पत्रकार और लेखक के लिए उचित नहीं कि वह कोई सरकारी पुरस्कार ग्रहण करें।
- आपका और आपके विभाग का एक बार फिर आभार कि आपने मेरा चयन इस पुरस्कार के लिए किया।

सादर
विमल कुमार, संपादक, स्त्रीलेखा
पुरस्कार देने की घोषणा वाला पत्र पढ़ें…



