Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

विष्णु नागर को निराला सम्मान का औचित्य?

बोधिसत्व-

कवि विष्णु नागर को निराला सम्मान! वरिष्ठ कवि Vishnu Nagar जी को निराला सम्मान देने की घोषणा हुई है। यह हिन्दी साहित्य के लिये अत्यंत हर्ष और गर्व की बात है। महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की स्मृति में उनके परिवार द्वारा संचालित संस्था- निराला के निमित्त की ओर से दिया जाने वाला ‘निराला सम्मान’ इस वर्ष (2024) हिंदी के वरिष्ठ कवि, कहानीकार, व्यंग्यकार, पत्रकार, संपादक और प्रतिरोध की चेतना के पक्षधर संस्कृतिकर्मी श्री विष्णु नागर को दिया जायेगा।

यह निर्णय निर्णायकों की ऑनलाइन बैठक में लिया गया। निर्णायकों में वरिष्ठ कवि श्री अरुण कमल (निराला-सम्मान से सम्मानित रचनाकार), कवि- आलोचक श्री आशीष त्रिपाठी और ‘निराला के निमित्त’ संस्था की ओर से श्री विवेक निराला थे। तीनों निर्णायकों ने सर्वसम्मति से विष्णु नागर के नाम की संस्तुति की।

यह सम्मान निराला जी की पुण्यतिथि 15 अक्टूबर पर इलाहाबाद में एक समारोह में दिया जायेगा। यह चौथा सम्मान है। ध्यान देना उचित रहेगा कि पहला सम्मान राजेश जोशी, दूसरा चित्रा मुद्गल, तीसरा अरुण कमल को दिया गया है। यह सम्मान कविता और कथा- साहित्य के क्षेत्र में प्रतिष्ठित रचनाकारों के समस्त लेखन और उनके प्रगतिशील – लोकतांत्रिक सरोकारों के आधार पर दिया जाता है।

इस सम्मान में इक्कीस हजार रुपये की राशि के साथ मानपत्र और निराला जी की एक तस्वीर भेंट की जाती है। विशेष बात यह है कि सम्मान राशि और इस समारोह के आयोजन का पूरा खर्च निराला जी के परिवार के सदस्य अपनी निजी आय व कुछ मित्रों के छोटे- छोटे सहयोग से वहन करते हैं। इस सम्मान में किसी सेठ-महाजन-साहूकार या एनजीओ और सरकार से धेले भर की वित्तीय सहायता नहीं ली जाती है।

शीघ्र ही समारोह का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया जायेगा।

एक सर्वथा उचित व्यक्ति का चयन करने के लिए निर्णायकों और निराला के निमित्त के साथ कवि विवेक निराला और निराला कुटुंब का आभार!

साथ ही आदरणीय विष्णु नागर जी को हार्दिक बधाई!!

उनके पचपन वर्ष से अधिक की रचनात्मक यात्रा में हम सब शामिल हों! जय हो विष्णु भाई की!


अजय तिवारी-

विष्णु नागर पुराने मित्र हैं। जनवादी लेखक संघ में लंबे समय साथ काम करने का सुयोग रहा है। बहस-मुबाहसे का भी संयोग बनता रहा है। अभी निराला परिवार की ओर से दिया जाने वाला सम्मान नागर जी को घोषित हुआ है। इस अवसर पर शिष्टाचार का तकाज़ा है और उसी के अनुसार मैं विष्णु नागर को बधाई देता हूँ।

लेकिन इस अवसर पर कुछ विसंवादी स्वर मन में उठ रहे हैं और उन्हें दबाना ठीक नहीं।

निराला से नागर जी का यदि कोई सम्बन्ध खोजा जा सकता है तो वह सिर्फ़ साम्राज्य-विरोध का है। बाकी कोई रिश्ता खोजना दूर की कौड़ी होगा।

जैसे मध्य प्रदेश के साहित्यिकों का एक दल “केवल मुक्तिबोध” में सिमटा रहा था, उसी तरह दिल्ली के कवियों का एक गुट “केवल रघुवीर सहाय” में एकनिष्ठ रहा है। विष्णु नागर उस गुट के प्रमुख कवि हैं। उनके सबसे बड़े साथी मंगलेश डबराल थे जो अब नहीं हैं और असद ज़ैदी थे जो अब भी बीच-बीच में अस्तित्व प्रकट करते रहते हैं।

भारतेंदु हरिश्चंद्र से लेकर निराला तक आधुनिक हिंदी की महान परम्परा को असद ज़ैदी और विष्णु नागर साम्प्रदायिक फासीवाद का स्रोत मानते रहे हैं। इसपर बहसें भी हुई हैं। बहसों का संतोषजनक उत्तर न असद ज़ैदी ने दिया और न विष्णु नागर ने।

ये दोनों “जनवादी” कवि कुलीनतावाद के प्रणेता श्री अशोक वाजपेयी से इस बात पर एकमत रहे हैं कि भारतेंदु हरिश्चंद ने हिंदी की नींव बिगाड़ दी थी!

प्रगतिशील साहित्य में शिवदानसिंह चौहान के बाद असद ही सबसे बड़े सिद्धांतकार हैं जो छायावाद को हिन्दू सम्प्रदायवाद से ज़्यादा ख़तरनाक मानते हैं। उनमें भी निराला को तुलसीदास, महाराज शिवाजी को पत्र जैसी कुछ कविताओं के कारण हिन्दू सांप्रदायिकता का प्रचारक मानते रहे हैं। लगभग हर बात पर नागर जी असद ज़ैदी से सहमत रहे हैं।

आज जब नागर जी को निराला के नाम से सम्मान मिला है तब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि :

  1. क्या निर्णायक मण्डल ने इस पहलू पर विचार किया है कि सम्मानित कवि का निराला की विरासत से कोई दूर-दराज़ का रिश्ता बनता है या नहीं?
  2. क्या स्वयं विष्णु नागर निराला जी के प्रति असद ज़ैदी की धारणाओं का विरोध करते हैं?

यदि नागर जी असद जैसे नकली कवि की पाखण्ड और मूर्खता से भरी बातों का स्पष्ट विरोध नहीं करते तो उन्हें नैतिक आधार पर निराला के नाम का सम्मान अस्वीकार कर देना चाहिए था।

हम अपनी परंपरा के बारे में इन एकांगी ‘कवियों’ की तरह संकीर्ण नहीं हो सकते। हमारे लिए भारतेंदु भी मूल्यवान हैं और मैथिलीशरण गुप्त भी, प्रसाद और निराला भी मूल्यवान हैं और मुक्तिबोध और रघुवीर सहाय भी।

लेकिन सामान की तलाश के बहाने हिंदी भाषा और समाज की समूची क्रांतिकारी विरासत को मटियामेट करने वाले असद ज़ैदी जैसे पाखंडी को हम न अपनी विरासत मानते हैं, न अपना साथी। ऐसे कलंक साहित्य को ही नहीं, समाज को भी दूषित करते हैं।

निराला जी के नाम पर सम्मान ग्रहण करने से पहले विष्णु नागर को अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहिए कि वे निराला के बारे अपनी आत्मा के मित्र की राय से सहमत हैं या उसकी निंदा करते हैं?

सम्मान के निर्णायकों को भी अपने निर्णय का औचित्य समाज के सामने प्रस्तुत करना चाहिए।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन