क्या राजस्थान पुलिस वास्तव में एक संगठित आपराधिक गिरोह है?

नंदलाल व्यास

मैं पिछले काफी समय से यह लिखता और कहता आ रहा हूं कि राजस्थान पुलिस वास्तव में एक संगठित आपराधिक गिरोह है। आपने यह सुना है कि रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार होने वाले में हर तीसरा कार्मिक राजस्थान पुलिस का अधिकारी है। भ्रष्टाचार और अपराध का एक गंभीर गठजोड़ राजस्थान पुलिस ने खुद ने अपराधियों के साथ बनाया हुआ है और खुद राजस्थान पुलिस के कई सारे अधिकारी और कार्मिक भ्रष्टाचार व अपराध में खुलेआम लिप्त हैं।

आज तक तो यह सुना था कि चोर और डाकू ही लूटमार करते हैं लेकिन राजस्थान पुलिस के पाली जिले के कुछ पुलिस कार्मिकों ने पंजाब के एक व्यापारी के साथ लूट कर डाली और उसे डोडा पोस्ट के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर करीबन ₹2 लाख विभिन्न खातों में जमा भी करवा लिया।

एक थाना अधिकारी और कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल की इतनी जुर्रत तब तक नहीं हो सकती जब तक कि उनको भ्रष्ट उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त ना हो। यही हो रहा है राजस्थान पुलिस में। अधिकतर जिला स्तर पर जो अधिकारी लगे हैं वे थाना अधिकारियों से चौथ वसूली करते हैं और उनको अनुचित सरंक्षण प्रदान करते हैं। गंभीर से गंभीर शिकायत होने पर भी कोई कार्यवाही नहीं करते हैं।

पंजाब के व्यापारी के लूट प्रकरण में भला हो सीसीटीवी फुटेज के कैमरों का जिसकी फुटेज में पुलिस वाले उस व्यापारी को उसकी कार से उतार कर अपनी कार में बैठाते हुए दिख गए।

मेरा दावा है कि राजस्थान पुलिस के इस आपराधिक संगठित गिरोह का कोई भी बाल बांका नहीं कर सकता, अगर टोल नाके की फुटेज नहीं होती।

नंदलाल व्यास
सामाजिक व आरटीआई कार्यकर्ता
जोधपुर



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