दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली अख़बारों में शुमार वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने इतिहास के सबसे बड़े पुनर्गठन में से एक के तहत बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की है। अख़बार ने कुल स्टाफ के लगभग एक-तिहाई, यानी 300 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है। इस फैसले ने न सिर्फ अमेरिकी मीडिया जगत बल्कि वैश्विक पत्रकारिता को भी झकझोर कर रख दिया है।
इस बड़ी छंटनी की चपेट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और अख़बार के वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय स्तंभकार ईशान थरूर भी आ गए हैं। ईशान ने अख़बार से अपने अचानक अलग होने पर भावुक प्रतिक्रिया दी और इसे न्यूज़रूम तथा वैश्विक पत्रकारिता के लिए “बेहद दुखद दिन” बताया।
ईशान थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,

“आज अंतरराष्ट्रीय स्टाफ के अधिकांश साथियों और कई अन्य शानदार सहकर्मियों के साथ मुझे वॉशिंगटन पोस्ट से ले-ऑफ कर दिया गया है। हमारा न्यूज़रूम और खासकर वे बेहतरीन पत्रकार, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोस्ट की सेवा की, उनके लिए दिल से बहुत दुखी हूं।” एक अन्य पोस्ट में उन्होंने खाली न्यूज़रूम की तस्वीर साझा करते हुए सिर्फ इतना लिखा— “एक बुरा दिन।”
ईशान ने अपने कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि वर्ष 2017 में ‘वर्ल्डव्यू’ कॉलम की शुरुआत करना उनके लिए गर्व की बात थी, जिसका उद्देश्य पाठकों को वैश्विक मामलों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करना था। उन्होंने उन करीब पांच लाख सब्सक्राइबर्स का भी आभार जताया, जिन्होंने वर्षों तक उनकी रिपोर्टिंग को पढ़ा और सराहा।
वॉशिंगटन पोस्ट प्रबंधन ने छंटनी की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कदम व्यापक पुनर्गठन प्रक्रिया का हिस्सा है। अख़बार ने अपने स्पोर्ट्स सेक्शन को पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके अलावा कई विदेशी ब्यूरो, बुक कवरेज सेक्शन और अन्य डेस्क भी खत्म कर दिए गए हैं। सबसे चौंकाने वाला फैसला मिडिल ईस्ट की पूरी रिपोर्टिंग टीम और संपादकों को हटाने का रहा, जिसे मीडिया जगत में बेहद गंभीर कदम माना जा रहा है।
अख़बार के पूर्व कार्यकारी संपादक मार्टिन बैरन ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “खुद ब्रांड का खात्मा करना” करार दिया है। वहीं मौजूदा प्रबंधन का कहना है कि बदलती तकनीक, डिजिटल ट्रेंड्स और दर्शकों की आदतों के अनुसार खुद को ढालने के लिए यह “दर्दनाक लेकिन जरूरी” फैसला था।
इस छंटनी में कई दिग्गज पत्रकार भी शामिल हैं। काहिरा ब्यूरो चीफ क्लेयर पार्कर और युद्ध क्षेत्रों से रिपोर्टिंग करने वाली अनुभवी पत्रकार लिजी जॉनसन को भी अख़बार से बाहर कर दिया गया है। क्लेयर पार्कर ने एक्स पर लिखा कि उन्हें पूरी मिडिल ईस्ट रिपोर्टिंग टीम के साथ नौकरी से निकाल दिया गया है और यह फैसला “समझ से परे” है। वहीं लिजी जॉनसन, जिन्होंने हाल ही में यूक्रेन जैसे युद्ध क्षेत्र से रिपोर्टिंग की थी, ने भी अपनी छंटनी की पुष्टि की है।
पूरे पत्रकारिता जगत में इस फैसले को लेकर गुस्सा और हैरानी देखने को मिल रही है। द अटलांटिक में लिखे एक लेख में वॉशिंगटन पोस्ट की पूर्व पत्रकार ऐश्ले पार्कर ने चेतावनी दी कि करीब 150 वर्षों से अमेरिकी लोकतंत्र का स्तंभ रहे इस अख़बार की मौजूदा दिशा उसकी विरासत को गंभीर खतरे में डाल रही है।
वहीं अख़बार के एग्ज़ीक्यूटिव एडिटर मैट मरे ने स्टाफ को भेजे ईमेल में कहा कि संगठन हर किसी के लिए सब कुछ नहीं बन सकता। उन्होंने इसे “दर्दनाक लेकिन जरूरी” बताते हुए कहा कि डिजिटल युग में टिके रहने के लिए संसाधनों का पुनर्गठन अनिवार्य हो गया है।
कुल मिलाकर, वॉशिंगटन पोस्ट की यह ऐतिहासिक छंटनी सिर्फ एक संस्थान का आंतरिक फैसला नहीं, बल्कि वैश्विक मीडिया संकट और बदलते न्यूज़रूम मॉडल का बड़ा संकेत मानी जा रही है, जो आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित कर सकती है।
वाशिंगटन पोस्ट में पत्रकारों की भारी छंटनी, ईशान थरूर की नौकरी भी गई. वाशिंगटन पोस्ट में 4 फरवरी 2026 को बड़े पैमाने पर छंटनी हुई है। शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर को भी नौकरी से निकाल दिया आया है. कंपनी ने अपने कुल स्टाफ का एक-तिहाई से ज़्यादा हिस्सा कम कर दिया दिया है. न्यूजरूम में लगभग 800 पत्रकारों में से 300 से अधिक को निकाला गया है. स्पोर्ट्स सेक्शन पूरी तरह बंद कर दिया गया. किताबों का कवरेज खत्म. कई विदेशी ब्यूरो – मिडिल ईस्ट के सभी करस्पॉन्डेंट्स और एडिटर्स, लोकल न्यूज, इंटरनेशनल कवरेज और पॉडकास्ट को काफी कम किया गया. पूर्व एग्जीक्यूटिव एडिटर मार्टी बारन ने इसे पोस्ट के इतिहास के सबसे अंधेरे दिनों में से एक बताया. मिडिल ईस्ट ब्यूरो चीफ क्लेयर पार्कर ने बताया कि पूरा मिडिल ईस्ट टीम निकाल दी गई. यह छंटनी अमेरिकी मीडिया इंडस्ट्री में चल रही मुश्किलों का बड़ा उदाहरण है. -डॉ प्रकाश हिंदुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार
प्रकाश के रे-
‘द वाशिंगटन पोस्ट’ में भारी छँटनी: क्या हुआ और क्यों हुआ?
अमेरिका के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित अख़बारों में से एक ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने 300 से अधिक पत्रकारों की छँटनी की घोषणा की है.
क्या हुआ?
पोस्ट में कार्यरत लोगों में से लगभग एक-तिहाई की छँटनी हुई है.
इनमें अख़बार के एशिया एडिटर, नई दिल्ली के ब्यूरो चीफ़, सिडनी के ब्यूरो चीफ़, काहिरा के ब्यूरो चीफ़, मध्य-पूर्व की समूची रिपोर्टिंग टीम, चीन, ईरान, तुर्की आदि अनेक देशों में कार्यरत रिपोर्टर समेत बहुत से लोग हैं.
ऐसा लग रहा है कि एक तरह से एशिया और उत्तर अफ़्रीका से पोस्ट ने विदाई ले ली है.
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टरों के साथ अख़बार ने अपना इंटरनेशनल डेस्क भी लगभग ख़ाली कर दिया है. विदेशी डेस्कों की संख्या पहले 20 से अधिक थी, अब यह 12 के आसपास होगी.
स्पोर्ट्स कवरेज और किताबों वाली यूनिट भी बर्ख़ास्त कर दिये गये हैं. अख़बार ने अपना स्पोर्ट्स डेस्क और पोस्ट रिपोर्ट्स पॉडकास्ट भी बंद करने की घोषणा की है. मनोरंजन और इवेंट वाले पत्रकार अब स्पोर्ट्स भी देखेंगे.
हटाये गये पत्रकारों में स्थानीय और राष्ट्रीय रिपोर्टिंग एवं डेस्क वाले भी शामिल हैं. मेट्रो सेक्शन में पाँच सालों में कोई 40 लोग रह गये थे. अब यह संख्या 12 के आसपास रह गई है.
क्यों हुआ?
अख़बार की ओर से कहा गया है कि यह अख़बार में ‘स्थिरता’ लाने के लिए किया गया है.
बीते तीन साल से अख़बार के ऑनलाइन ट्रैफ़िक में गिरावट और समाचार उपभोग में एआई के उभार को मुख्य कारण बताया गया है. अब पोस्ट का फ़ोकस राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के मसलों पर अधिक होगा यानी ख़बरों के हिसाब से अब यह मुख्य रूप से अमेरिकी अख़बार होगा.
साल 2023 में ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ के 1.30 लाख प्रिंट सब्सक्राइबर और 25 लाख डिजिटल सब्सक्राइबर थे. उस साल सब्सक्रिप्शन के मामले में पोस्ट तीसरे पायदान पर था. ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर थे. पिछले साल प्रिंट सब्सक्रिप्शन एक लाख से नीचे आ गया, जो 55 साल में पहली बार हुआ है.
पोस्ट की स्थापना 1877 में हुई थी. इसका मालिकाना अनेक हाथों से गुज़रता हुआ 2013 में जेफ़ बेज़ोस के हाथ में आया, जब उन्होंने 25 करोड़ डॉलर में नगद ख़रीदा. उनके स्वामित्व में अख़बार घाटे से फ़ायदे में आया, पर फिर घाटा होने लगा. साल 2023 में अख़बार को 7.70 करोड़ और 2024 में 10 करोड़ डॉलर का घाटा हुआ.
घाटा कम करने के लिए पोस्ट ने 2023 और 2025 में कई पत्रकारों को स्वेच्छा से अख़बार छोड़ देने को कहा था, जिसके बदले उन्हें कुछ पैसा अधिक दिया गया. इससे अख़बार के न्यूज़रूम में कार्यरत लोगों की संख्या 800 से कम रह गई, जो पहले 1000 से अधिक थी.
प्रतिक्रिया
बेज़ोस ने अख़बार ख़रीदते समय भरोसा दिलाया था कि अख़बार को पैसे की समस्या नहीं होने दी जायेगी.
दिसंबर 2024 में भी उन्होंने कहा था कि जब भी पोस्ट को पैसे की ज़रूरत होती है, वे एक डॉटिंग पिता की तरह हाज़िर रहते हैं. लेकिन मामला उलटा रहा है. बेज़ोस एमेज़ॉन में भी लगातार छँटनी करते रहे हैं, जिसके वे संस्थापक और सीईओ हैं.
अख़बार के पूर्व मालिक डोनाल्ड ग्राहम ने दुख जताया है. वे स्पोर्ट्स सेक्शन के एडिटर भी रहे थे. इसे सेक्शन के साथ चालीस के दशक में उन्होंने अपना करियर शुरू किया था. अख़बार बेचने के बाद से अख़बार के मामलों पर यह उनकी पहली प्रतिक्रिया है.
हटाये गये कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया दी है. अख़बार के पत्रकारों के संगठन और पहले कार्यरत रहे पत्रकारों ने गहरा दुख और क्षोभ जताया है. इनमें से अनेकों ने दूसरे प्रकाशनों में इस पर लेख भी लिखा है. साल 2021 तक पोस्ट के कार्यकारी संपादक रहे मार्टिन बैरन ने इसे अख़बार के इतिहास के सबसे बुरे दिनों में एक कहा है. पोस्ट के अनेक पूर्व पत्रकारों ने पाठकों का आह्वान किया है कि वे छँटनी के ख़िलाफ़ बोलें.
अमेरिकी विश्लेषक इवान फीजेनबॉम की टिप्पणी रेखांकित करने योग्य है. उन्होंने क्षोभ जताते हुए कहा है कि दुनिया हर मिनट कम अमेरिका-केंद्रित होती जा रही है, जबकि अमेरिका पहले से कहीं अधिक अमेरिका-केंद्रित होता जा रहा है. यह एक निराशाजनक, लेकिन हमारे वर्तमान क्षण का उचित सारांश है. अब हमें दुनिया की ख़बरों की ज़रूरत नहीं रही है.
आशा है कि अगले कुछ दिनों में बेज़ोस और प्रबंधन की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण दिया जायेगा.
‘वाशिंगटन पोस्ट ‘ वही अखबार है जिसके दो पत्रकार बौब वुडवर्ड और कार्ल बर्नस्टीन की एक रिपोर्ट ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति अमेरिका के एक राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को चुनाव में धांधली के आरोप में त्यागपत्र देने को मजबूर कर दिया था। अखबार की मालकिन कैथरीन ग्राहम का ही साहस था कि वह रिपोर्ट छपी, अन्यथा उनके वकीलों ने कह दिया था कि अगर निक्सन का कुछ न बिगड़ा तो वाशिंगटन पोस्ट और जुड़े रेडियो स्टेशन और अन्य कारोबार को बड़ा ख़मियाज़ा भुगतने को तैयार रहना होगा। -जयंत सिंह तोमर


